पूरा देश जानना चाह रहा था शहरी नक्सलियों पर कोर्ट का फैसला.. आखिरकार वो आ ही गया

भीमा कोरेगांव हिंसा में साजिशकर्ता शहरी नक्सलियों को लेकर पूरे देश की निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हुई थी. देश जानना चाह रहा था कि कोर्ट शहरी नक्सलियों को पुलिस हिरासत में भेजेगा या फिर उन्हें जमानत दे देगा. सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए तीनों शहरी नक्सलियों अरूण फरेरा, वेरनन गोंजाल्विस और सुधा भारद्वाज की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है तथा वही फैसला दिया है, जिसकी देश को अपेक्षा थी. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले के पुणे की एक अदालत ने आरोपी अरुण फरेरा और वेरनन गोंजाल्विस को 6 नवंबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है.

सुधा भारद्वाज को पुणे पुलिस हरियाणा के फरीदाबाद स्थित उनके आवास से लेकर चली गई है. शुक्रवार को तीनों कार्यकर्ताओं की जमानत याचिका को पुणे की सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया था. जिला और सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) के डी वडाणे ने गॉनजैल्विस और फेरेरा सहित सुधा भारद्वाज की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि पुलिस द्वारा एकत्र सामग्री से प्रतीत होता है कि उनके माओवादियों से कथित संबंध हैं.

बता दें कि तीनों पहले ही नजरबंद थे लेकिन पुणे पुलिस उनको हिरासत में नहीं ले पा रही थी क्योंकि विभिन्न अदालतों ने उस पर (उनको हिरासत में लेने पर) रोक लगा रखी थी. जमानत याचिका के खारिज होने पर पुणे पुलिस ने फेरेरा और गॉनजैल्विस को हिरासत में ले लिया. पुणे पुलिस ने एक जनवरी को भीमा-कोरेगांव में हुई हिंसा में कथित संलिप्तता के चलते अगस्त में इन तीनों को कवि पी वरवरा राव और गौतम नवलखा के साथ गिरफ्तार किया था. पुलिस ने दावा किया है कि उसने इनके और शीर्ष माओवादी नेताओं के बीच ई-मेल पर हुई बातचीत को भी जब्त किया है. मामले में नवलखा को दिल्ली हाई कोर्ट ने रिहा कर दिया था. बांबे हाई कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर एक नवंबर तक अंतरिम रोक लगा रखी है. उसी दिन प्राथमिकी में गड़बड़ी की जांच की मांग वाली उनकी याचिका पर सुनवाई की जाएगी.

जिला और सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) के डी वडाणे ने कहा, ‘ समाजसेवा, मानवाधिकार से जुड़े कार्यों की आड़ में ये लोग प्रतिबंधित संगठन (सीपीआई माओवादी) के लिए काम कर रहे हैं और भारत की एकता, अखंडता, सुरक्षा, संप्रभुता को खतरा पहुंचाने के लिए की जा रही गतिविधियों में संलिप्त हैं.’ न्यायाधीश ने शुक्रवार को दिए आदेश में कहा, अभी इस चरण में, जांच अधिकारी द्वारा एकत्र की गई सामग्री के आधार पर, प्रथम दृष्टया आरोपियों के प्रतिबंधित संगठन (सीपीआई माओवादी) के साथ संबंधों की पुष्टि होती है। उन्होंने कहा कि जांच एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है।

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