हर बार फौज के विरोध में खड़ी होने वाली अरुंधति रॉय शायद पहली बार देखेंगी कानून का असली रूप, जानिए पूरा घटनाक्रम….

भारत में एक नया फैशन चला है। देश को गाली दो, देश के लोकतंत्र को कोसो, देश की सरकार को कोसो और रातों रात फेमस हो जाओ। अगर आपकी किताब आ रही, अगर आपकी फिल्म आ रही है। देश विरोधी बयान दो और अपनी फिल्म, अपनी किताब का फ्री ऑफ कॉस्ट प्रचार करो, रातों रात मीडिया में छा जाओ। अरुंधति रॉय इन्ही नामो में से एक है। अरुंधति रॉय को विवादों में रहने का बड़ा शौख है। आये दिन देश विरोधी बयानों से चर्चा में रहती है। लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता है।  
अरुंधति रॉय ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के प्रोफेसर जीएन साईंबाबा के बारे में लिखे लेख में अदालत की आलोचना की थी। साईंबाबा को नक्सलियों के साथ संबंध के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के खिलाफ साईंबाबा ने अपील की थी, जिसे कोर्ट ने ठुकरा दिया था। इसी को लेकर अरुंधति ने एक पत्रिका में लेख लिखा था। इस लेख में उन्होंने अदालत की अवमानना की थी। इस अवमानन के खिलाफ कोर्ट ने नोटिस जारी किया था। 
पिछली सुनवाई में अरुंधति रॉय के खिलाफ कोर्ट के नोटिस पर रोक नहीं लगाया था। मुख्य न्यायाधीस जेएस खेहर और जस्टिस डीवाई की बेंच ने अरुंधति की याचिका को मान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका मानते हुए मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में चल रहे सुनवाई पर रोक लगा दी है। अब सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले की सुनवाई करेगा। 
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