देश खुशियां मना रहा था एक कलंक के खत्म होने का..वो कलंक जिसको सभी धारा 370 के रूप में जानते थे..  इस संघर्ष की शुरुआती लड़ाई जिसने लड़ी थीं उनका नाम सुषमा स्वराज जी था.. उन्होंने उस युग मे इस धारा के खिलाफ आवाज उठाई थी जिस युग मे हिन्दू का नाम लेना ही साम्प्रदायिकता घोषित कर दी जाती थी.. उन्हें तो जैसे इस पल की प्रतीक्षा थी और जैसे उनका जीवन इसे देखने भर के लिए ही थमा हुआ था.. जिस लड़ाई को उन्होंने जीवन भर लड़ा उसमे जीत को देख कर अंत में उन्होंने आंखे मूंद ली और उनके आंखों को मूँदते ही अंत हो गया एक युग का जिसमे तमाम संघर्षों के बाद एक नारी शक्ति ने संसद में कदम रख कर समाज को शशक्तिकरण का एक बड़ा सन्देश दिया था..

भारत मे किसी के लिए भी इस पर विश्वास कर पाना असंभव सा लग रहा है लेकिन इसको स्वीकार करना ही पड़ेगा क्योंकि ये सच है कि प्रखर वक्ता, पूर्व विदेश मंत्री, प्रतिभाशाली वक्ता, लोकप्रिय नेता सुषमा स्वराज अब नहीं रहीं.. सुषमा जी के निधन पर सुदर्शन परिवार की तरफ़ से  हमारे प्रधान संपादक श्री सुरेश चव्हाणके जी ने शोकाकुल हो कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है…सुषमा जी का कार्य भारतीय राजनीति में प्रभावशाली महिला नेत्री के रूप में याद किया जाएगा. ऐसी नेत्री के निधन की ख़बर बताने में हम सबसे पीछे रहना चाहते है.. अचानक ही  इस खबर के बाद  देेेश में शोक की लहर दौड़ गयी है.. हर  कोई  एम्स की तरफ चल दिया है.

शोकाकुल केंद्रीय मंत्री अश्वनी चौबे , नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह आदि ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की हैं.. सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि किसी को कुछ करने , सोचने समझने का मौका ही नही मिला.. एम्स में 5 डॉक्टरों से उन्हें बचाने की हर संभव कोशिश की लेकिन वो नाकाम रहे.. कुछ ही देर पहले उन्होंने अंतिम सांस ली और उसके बाद देश एक शोक की लहर रूपी चादर में लिपट गया.


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