जानिये वो 10 मामले जिसमें श्रीराम के नाम को बदनाम करने की साजिश हुई बेनकाब.. जान और जाग चुका है हिंदू समाज पर नहीं मान रहे साजिशकर्ता

मोदी सरकार 2 बनने के बाद एक ट्रेंड सा चल गया है कि देश में “जय श्रीराम” न बोलने के कारण हिन्दू संगठनों के लोग मुस्लिम समुदाय के लोगों को मार रहे हैं. आये दिन देश के किसी न किसी जगह से मुसलमानों के साथ ज्यादती और उनसे जबरन जय श्री राम का नारा लगवाने तथा ऐसा न करने पर मुस्लिमों को पीटने की खबरें आती हैं. इन खबरों को मीडिया में उछाला जाता है, सोशल मीडिया पर फैलाया जाता है, ताकि जयश्रीराम के पावन उद्घोष को बदनाम किया जा सके, लेकिन पुलिस जब गहनता से जाँच करती है, तो अधिकतर मामला झूठा, फर्ज़ी और मनगढ़ंत निकलता है.

देशभर से ऐसे एक नहीं तमाम मामले सामने आ चुके हैं जब मुस्लिम समुदाय के लोगों की तरफ से ये आरोप लगाया गया कि उन्हें जयश्रीराम न बोलने के कारण हिन्दू समाज ने लोगों ने पीटा. इन खबरों को देश की कथित लिबरल मीडिया तथा बुद्धिजीवियों द्वारा भी जमकर उछाला गया लेकिन जब इन मामलों की तहकीकात की गई तो सामने आया कि ये मामले झूठे थे तथा आपसी झगडे को हिन्दू मुस्लिम विवाद का रूप दिया ताकि जयश्रीराम के पावाव जयघोष को बदनाम किया जा सके. हम यहाँ आपको ऐसे ही 10 मामले बताने जा रहे हैं जिनमें एक साजिश के तहत जयश्रीराम के उद्घोष को बनदाम करने की कोशिश की गई.

29 जुलाई, चंदौली, उत्तर प्रदेश

खबर सामने आई कि उत्तर प्रदेश के चंदौली गाँव में खालीद ने जय श्री राम नहीं बोला, तो उसे आग में झोंक दिया गया. लेकिन जब इसकी जांच हुई तो हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई. चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह ने इस बारे में बयान जारी करते हुए कहा कि पुलिस ने खालीद के बयानों में विरोधाभास पाया है. उन्होंने बताया कि एक चश्मदीद के बयान के मुताबिक, खालीद को किसी समूह ने आग में नहीं झोंका, बल्कि उसने खुद ही आग लगाई थी. खालीद ने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया? इसकी पड़ताल चल रही है।

उन्होंने कहा कि बच्चा जिस तरह से अलग-अलग लोगों को अलग-अलग बयान दे रहा है, उसे देखकर ऐसा लग रहा है कि जैसे उसे किसी ने ये सारी बातें सिखाई हैं. एसपी ने बताया कि बच्चा जिस दो गाँवों के बारे में बात कर रहा है, वो दोनों गाँव अलग- अलग दिशाओं में स्थित है और जिस जगह के बारे में वो बता रहा है वहाँ की सीसीटीवी फुटेज में वो कहीं भी नहीं है. इससे साफ जाहिर हो रहा है कि खालीद किसी के सिखाने पर ये बयान दे रहा है. ये भी सामने आया कि खालीद के अब्बू के मित्र जाहिद अंसारी के कहने पर खालीद ने ये बयान दिए थे.

21 जुलाई, संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र

महाराष्ट्र के औरंगाबाद में शेख आमेर ने आजाद चौक से बजरंग चौक की तरफ जाते वक्त एक कार वाले से मामूली सा विवाद हो गया. आमेर ने उन लोगों को सबक सिखाने का सोचा और एक ही दिन पहले शहर के हुडको कॉर्नर पर घटी घटना को याद करते हुए उसने जय श्री राम न बोलने पर पिटाई की झूठी कहानी बनाई और पुलिस में शिकायत कर दी. शिकायत दर्ज कराने के एक दिन बाद ही आमेर अपने बयान से पलट गया. उसने अपना बयान वापस लेते हुए कहा कि उसने अपने समुदाय के सदस्यों के बीच अपना कद बढ़ाने और उससे झगड़ा करने वाले लोगों को सबक सिखाने के लिए मनगढ़ंत कहानी के आधार पर पुलिस से शिकायत की थी.

20 जुलाई, संभाजीनगर (औरंगाबाद), महाराष्ट्र

इमरान इस्माइल पटेल ने दावा किया कि रात को भीड़ ने घर लौटते समय पकड़ कर मारपीट की और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया. वहीं न केवल पुलिस बल्कि इमरान को बचाने वाले चश्मदीद ने भी उसके दावे की तस्दीक करने से साफ़ मना कर दिया. पुलिस के अनुसार यह एक निजी रंजिश के चलते हुई हाथापाई थी, जिसमें झूठी कहानी गढ़ते हुए जयश्रीराम के नारे को डाला गया.

14 जुलाई, मुज़फ़्फ़रनगर, उत्तर प्रदेश न दाढ़ी नोंची, न राम-नाम बुलवाया

इमाम इमलाकुर रहमान जब अपने साथ मारपीट की बात पर मुज़फ़्फ़रनगर में FIR करने पहुँचे तो न ही मामले में कोई जय श्री राम था, और न ही उन्होंने दाढ़ी नोंचे जाने की बात अपनी FIR में कही. लेकिन जब तक वह मामले की पूरी FIR करने बागपत पहुँचे (जहाँ का मामला था), यह सब चीज़ें बागपत FIR में अतिरिक्त आ गईं थीं. न केवल इन्हें एसपी ने ख़ारिज किया, बल्कि अंदेशा भी जताया कि साम्प्रदायिक एंगल जानबूझकर जोड़ा गया ताकि मामले में त्वरित कार्रवाई हो.

12 जुलाई, उन्नाव, उत्तर प्रदेश

क्रिकेट खेलने में स्थानीय लड़कों से हुए हुए विवाद और झगड़े को लेकर मदरसे के बच्चे जब काज़ी निसार मिस्बाही के पास पहुँचे तो क़ाज़ी साहब खुद ही ‘स्पिनर’ निकले. न केवल मदरसे के बच्चों से जबरन जय श्री राम बुलवाए जाने का ‘स्पिन’ उन्होंने मामले में लगा दिया, बल्कि धमकी भी दी कि अगर जुमे तक उनके बताए चार ‘दोषियों’ को उसी जुमे तक न पकड़ा गया तो ‘जो एक्शन कहीं भी नहीं हुआ, वो होगा‘. वह बात और है कि न केवल पुलिस की जाँच में यह मामला भी साम्प्रदायिक रूप से खोखला निकला, बल्कि फिर भी प्रदेश के प्रमुख सचिव (सूचना) तक को मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ गई.

5 जुलाई, कानपुर, उत्तर प्रदेश

ऑटो-ड्राइवर आतिब पर हमला बेशक हुआ, लेकिन यहाँ भी जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर करने की बात झूठ निकली. पुलिस जाँच के अनुसार यह एक नशे में हुई हाथापाई थी, जिसकी परिणति आतिब को शौचालय में बाँधकर पीटने के रूप में हुई लेकिन जयश्रीराम का कोई एंगल ही नहीं था.

29 जून, कूच बिहार, पश्चिम बंगाल

आप्सी मियाँ ने अपने हममज़हब असगर को कान पकड़ कर उठक-बैठक लगाने और जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया और लिबरल गिरोह ने हिन्दुओं को जिम्मेदार ठहराने में समय नहीं लगाया. यह भी ध्यान नहीं दिया कि कुछ बिहार पश्चिम बंगाल में है- जहाँ हिन्दू खुद भी अगर जय श्री राम बोलें तो हो सकता है उन्हें गोली मारी जा सकती है. ऐसे में एक हिन्दू भला मुसलमान से जय श्री राम बुलवाएगा?

23 जून, दिल्ली

रोहिणी, सेक्टर-20 के मदरसे में पढ़ाने वाले मोहम्मद मोमिन ने आरोप लगाया कि जय श्री राम बोलने से इंकार करने पर कुछ लोगों ने उनकी कार को टक्कर मार दी. पुलिस ने जाँच की लेकिन एक भी चश्मदीद गवाह ने मोमिन की बात का समर्थन नहीं किया. घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी फुटेज से भी आरोपों की पुष्टि नहीं हुई.

2 जून, करीमनगर, तेलंगाना

किसी समय ’15 मिनट के लिए पुलिस हटा दो’ का दावा करने वाले अकबरुद्दीन ओवैसी की AIMIM के नेता रहे और आजकल ‘मजलिस बचाओ’ से जुड़े अमजद उल्लाह खान ने दावा किया कि भाजपा-संघ के लोगों ने एक मुसलमान किशोर को पीटा क्योंकि उसने जय श्री राम कहने से मना कर दिया था. करीमनगर के कमिश्नर ने साफ किया कि उनकी जाँच में ऐसा कुछ नहीं निकला, और यह निजी कारणों से हुई हिंसा थी- मुसलमान लड़का किसी किशोरी को तंग करने को लेकर उस लड़की के पक्ष के लोगों के हाथों पिटा था. यही नहीं, पिटने वाले लड़के के भी अपने बेटे की गलती मानते हुए माफ़ी माँगी.

28 मई, गुरुग्राम: हरियाणा

मोहम्मद बरकत ने दावा किया कि गुरुग्राम में कुछ हिन्दुओं ने उसे घेर कर मारा, उसकी इस्लामी गोल टोपी फेंक दी और ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया. हरकत में आई गुरुग्राम पुलिस ने 15 लोगों को हिरासत में लिया, 50 के करीब सीसीटीवी फुटेज खंगालीं, और अंत में इस नतीजे पर पहुँची कि बरकत अली के साथ मार-पीट तो हुई, लेकिन न ही उसकी टोपी किसी ने ‘फेंकी’ और न ही जय श्री राम बोलने के लिए मजबूर किया गया.

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