चंदे की आड़ में काला धन बसूलने वाले लोगों की अब खैर नहीं. सख्त हुई मोदी सरकार

पहले नोटबंदी का साहसिक फैसला। फिर एक देश एक कर (जीएसटी) जैसे बिल को पास करवाना। ऐसा लग रहा मोदी सरकार ने इस देश के सारे काले, भ्रष्ट लोगों को नाको चने चबवाने का फैसला कर लिया है। मोदी मंत्रिमंडल का ना खायेंगे ना खाने देंगे का मंत्र मोदी के मंत्रियो के ऊपर सर चढ़ कर बोल रहा है। इसकी बानगी देखने को लगभग हर रोज ही मिल रही। पर ताजा मामला ये है की राजनीतिक चंदे में पारदर्शिता लाना अब सरकार के एजेंडे में सबसे ऊपर है।
 
अरुण जेटली ने बयान जारी करते हुए कहा कि राजनीतिक चंदे की वर्तमान व्यवस्था 70 साल से भी ज्यादा पुरानी है। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत देश का इससे कोई भला नहीं हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस व्यवस्था में सुधार लाने पर लगातार जोर दिये हुये हैं। जनता में इस बात के लिए व्यापक समर्थन है और फेरबदल बेहद जरुरी है। जेटली ने अपने बजट भाषण में मौजूदा नकद चंदे की जगह चुनावी बांड लाने का एलान किया था। 
मंगलवार को मीडिया रिपोर्टो के हवाले से कहा गया कि सरकार इस सिलसिले में कानून का मसौदा तैयार कर रही है और इस पर विचार-विमर्श जल्दी शुरू कर दिया जायेगा और सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। आने वाले दिनों में चंदे की काली कमाई पर नकेल कसने की कवायद चालू होने वाली है और बीजेपी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध नज़र आ रही है। अब देखना दिलचसप होगा इससे किन किन पार्टियों की दिक्कते चालू होंगी।   
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