पूर्व सेनापति ने गिनाई वो चार गलतियां जिसका अंजाम आज तक भुगत रहा हैं भारत… पढ़ कर शायद आप भी बोलेगे कि- सहमत हूं सर

2017 में 1962 का युद्ध स्मरण करावा रहा है चीन. चीन लगातार भारत पर 1962 के युद्ध के द्वारा दबाव बनाने की कोशिश में लगा हुआ है. कभी 1962 जैसा परिणाम भुगतने की चेतावनी दी जा रही है. जहां तक 1962 की हार की बात है तो यह एक तरह की राजनीतिक पराजय थी भारत पंचशील के स्वर्णिम स्वप्न में खोकर जब हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे में खोया हुआ था, तभी 1962 की लड़ाई चीन द्वारा विश्वासघात के रूप में भारत को प्राप्त हुई.

सिक्किम सीमा पर चीन के साथ डोकलाम विवाद को हल हुए अभी मुश्किल से कुछ समय ही बीता है और विवादों का दौर बना ही हुआ है.पूर्व सेनाध्य क्ष वीपी मलिक ने स्ट्रेटजी और प्लान के बीच फर्क बताते हुए कठोर शब्दोंे में भारतीय राजनीति पर सवाल उठाया। उनके अनुसार, प्लान कामयाब हो यह जरूरी नहीं, मगर स्ट्रेटजी का कामयाब होना जरूरी है।देश में आज तक नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी को लेकर कभी साफ तौर पर कुछ नहीं लिखा गया।
ऐसी कई गलतियां हैं, जो सही स्ट्रेटजी न होने की वजह से आज देश के लिए समस्या बन गई हैं और इनका खामियाजा हम आज भी भुगत रहे हैं उन्होंने कहा कि पहली गलती प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की ओर से 1948 में कश्मीर विवाद के लिए युनाइटेड नेशन (संयुक्त राष्ट्र) जाना था, जबकि यह मसला हमें उसी वक्त साफ तौर पर पाकिस्तान से सुलझा लेना चाहिए था। इसी वजह से आज तक कश्मीर में संघर्ष जारी है।
दूसरी गलती- चीन-पाकिस्तान से हमारी सीमा तय नहीं.पूर्व प्रधानमंत्री नेहरू ने पाकिस्तान और चीन दोनों से ही पक्के तौर पर सीमा तय नहीं की। हमने तिब्बत को अपने हाथों से जाने दिया। तीसरी गलती- 1965 की लड़ाई के बाद हाजीपुर पोस्ट वापस देना.चौथी गलती- 1972 में पाकिस्तानी कैदी सैनिकों को छोड़ना. जनरल मलिक ने कहा कि हमारी सरकार की वजह से हमें समय-समय पर जंग के बाद कई उतार-चढ़ाव देखने पड़े।उस समय हमारे पास कई शर्ते पूरी करने का समय था, जिसमें आज सरहद जैसे मुद्दे सुलझ जाते. विवाद को सुलझाने के लिए आज सही और नई स्ट्रेटजी अपनाने की जरुरत है.
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