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देवबंद में बन रहे थे बंगलादेशी अपराधियों के फर्जी प्रमाण पत्र… भारत को तबाह करने की साजिश के खुलासे से हैरान है देश

हमारे देश में बांग्लादेशी शरणार्थियों का मामला एक समस्या कैसे बन गया? इसका एक जवाब जो हमेशा तैयार रहता है वह यह है कि समस्या इसलिए पनपी क्योंकि अधिकांश प्रवासी अवैध हैं. अवैध प्रवासियों का इस्तेमाल सीमापार आतंकवाद और सामाजिक तनाव पैदा करने लिए किया जा रहा है.आपको बता दे की इनके अवैध रूप से भारत आने के कारण इनसे जुड़ी अर्थव्यवस्था भी अवैध है या ये कहा जा सकता है कि चोरी-छिपे होती है.

फर्जी आधार कार्ड तथा अन्य फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार अभी यान चलाये जा रहे है.मामला सहारनपुर का है जहां बांग्लादेशियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत एटीएस की टीम ने फतवों के शहर देवबंद से दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया है. एटीएस के आईजी असीम अरुण की ओर से जारी की गई सरकारी विज्ञप्ति में बताया गया कि सहारनपुर के साथ- साथ गाजियाबाद से भी फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर बांग्लादेशियों के पासपोर्ट बनाने वाले लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

उन्होंने बताया कि एटीएस को सूचना मिली थी कि फर्जी आधार कार्ड तथा अन्य प्रमाण पत्रों के आधार पर भारत में रहने वाले बांग्लादेशियों का गिरोह सक्रिय है.जांच के दौरान पता चला कि युसूफ अली नाम व्यक्ति ने भी देवबंद से ही फर्जी पते पर पासपोर्ट बनवाया है.वह इस गिरोह का सक्रिय सदस्य है और वर्तमान में मुदानगर में रह रहा है.इसके बाद एटीएस, अभिसूचना इकाई सहारनपुर और जिला सहारनपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने देवबंद से वसीम अहमद पुत्र निसार निवासी मोहल्ला पठानपुरा देवबंद तथा अहसान अहमद पुत्र बदरूजमा निवासी मोहल्ला किला देवबंद को गिरफ्तार कर उनके पास से लैपटॉप, कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, भारी मात्रा में फोटो, बने व अधबने प्रमाण पतथा अनेक प्रमाण पत्रों की सैकड़ों फोटोकॉपी बरामद हुई है.

दोनों से पूछताछ करने पर पता चला कि शपथ पत्र तथा स्कूल के फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर फर्जी आधार कार्ड, वोटर कार्ड तथा मूल निवासी प्रमाण पत्र तैयार करा लेते थे तथा सांठगांठ कर जांच पूरी कराकर पासपोर्ट बनवा लेते थे.राष्ट्रीय सुरक्षा एवं आतंकवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर यूपी एटीएस तथा अन्य एजेंसियां अभी जानकारी जुटाने में जुड़ी है.

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