मेरे मंदिर में कोई नया साल मत मनाना .. ये हम हिंदुओं का दिन नहीं हैं – पुजारी रंगराजन

 हिंदू समाज अपनी संस्कृति और परम्पराओ से दिनोदिन दूर होता जा रहा है। अन्य धर्मो के बजाय हिन्दू धर्म के लोग इतने आधुनिक बनते जा रहे है की न उन्हें गीता का ज्ञान है, और न हिंदू रीती रिवाजो का। वेद और ग्रंथो के अध्यन से तो वे लाखो कोष दूर है। समय-समय पर हिन्दू धर्म के रक्षक हिदुओ को अपने धर्म और संस्कृति के प्रति जगाते रहे है। तेलंगाना चिलकुर बालाजी मंदिर के पुजारी रंगराजन ने नए साल पर जश्न मनाने को हिंदुत्व के खिलाफ बताया है।

उन्होंने अपने सभी भक्तो और हिदुओ से अपील की है की वे नए साल में एक दूसरे को शुभकामनाएं न दे। यदि किसी भक्त ने उन्हें शुभकामनाएं दी तो वे उनसे उठक-बैठक लगवाएँगे।

पुजारी ने तेलुगू नव वर्ष ‘उगादि’ मनाने की सलाह दी है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने इस बयान पर उन्होंने खुशी जाहिर की है। रंगराजन ने कहा कि वह हर साल नवंबर-दिसंबर के महीने में अपने भक्तों को न्यू ईयर से जुड़ी हिदायत देते हैं। कहा कि वे मंदिर में एक अध्यापक और भक्त छात्र की तरह हैं. ‘उगादि’ हमारा नया साल है, न कि 1 जनवरी.

ऐसे में अगर कोई नए साल की शुभकामनाएं देता है तो मुझे यह अधिकार है कि मैं उसको सजा दूं।
पुजारी रंगराजन ने कहा कि हम हिंदू संस्कृति को भूलते जा रहे हैं. हम खुद अपनी संस्कृति को नजरअंदाज कर रहे हैं जिसे हमे बचाने की सख्त जरूरत है। रंगराजन ने उन मंदिरों पर भी नाराजगी जाहिर की जो इंग्लिश न्यू ईयर पर मंदिर परिसर को सजाने पर पैसा खर्च करते हैं। उन्होंने कहा कि, हिंदू मंदिर को ऐसा करने की जरूरत नहीं है, चर्च तक न्यू ईयर पर पैसा खर्च करने से बचता है। मंदिरों द्वारा सजावट पर राशि खर्च करना फिजूल खर्च है। उन्होंने न्यू ईयर को और कुछ नहीं बल्कि भीड़ का नया साल करार दिया है। 

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