लखनऊ के बजाय कहीं और तय थी कमलेश तिवारी की ह्त्या की साजिश.. आखिर क्या हुआ ऐसा कि बदल गई जगह


हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी हत्याकांड को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. कमलेश तिवारी हत्याकांड पांचो मुख्य उन्मादियों की गिरफ्तारी के बाद उनसे पूंछताछ में सामने आया है कि पहले कमलेश तिवारी की ह्त्या लखनऊ नहीं बल्कि कहीं और करने की योजना बनाई गई थी. लेकिन फिर कुछ ऐसा हुआ कि उन्मादियों ने अपनी योजना में बदलाव किया तथा यूपी की राजधानी लखनऊ में कमलेश तिवारी के घर में ही घुसकर उनकी ह्त्या कर दी.

पता चला है कि उन्मादी पहले उत्तर प्रदेश के ही बरेली में कमलेश तिवारी की ह्त्या करने वाले थे. कमलेश तिवारी भी छह और सात अक्टूबर में बरेली थे. रात भर रुकने के बाद वह मुरादाबाद चले गये. हिंदू वादी नेता पार्टी के विस्तार के सिलसिले में बरेली आये थे. हालांकि हत्यारे उस वक्त अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाये. 6 अक्टूबर को कमलेश तिवारी ने अगस्त्य मुनि आश्रम में पार्टी के नेता केके शंखधार समेत कई पदाधिकारियों से मुलाकात की थी. उनके आने की सूचना हिंदू संगठनो और शिवसेना के नेताओं को दी गई थी. 7 अक्टूबर को कमलेश तिवारी एक अन्य कार्यक्रम में शामिल होने के लिए मुरादाबाद निकल गये थे.

सूत्रों की मानें तो उन पर बरेली में ही हमला कर हत्या किये जाने की तैयारी थी, लेकिन किसी वजह से साजिशकर्ता इसको अंजाम नहीं दे पाये. कमलेश तिवारी के बरेली दौरे के बीच शहर में मौजूद साजिशकर्ताओं के मददगारों ने उनकी रेकी की थी. पहले बरेली में ही हत्या को अंजाम देने की योजना बनाई गई थी लेकिन वे इस हत्याकांड के जरिये एक बडा़ सन्देश देना चाहते थे. इस वजह से कमलेश तिवारी की हत्या के लिये लखनऊ उनका खुद का घर और शुक्रवार (जुमा) का दिन चुना गया.

जानकारी मिली है कि कमलेश तिवारी के हत्यारे और साजिशकर्ता पुलिस से भी ज्यादा ‘स्मार्ट’ चल रहे थे. उनके पास एक स्मार्ट फोन है जो बीच-बीच में ऑन-ऑफ होता रहता था. साथ ही सूरत में उनके इस ऑपरेशन का ‘कमांड सेंटर’ बना हुआ है जहां से इस स्मार्ट फोन पर ही उन्हें फरमान भेजे जा रहे थे. इन निर्देशों पर काम करते हुए हत्यारे पुलिस और एसटीएफ से बच निकल रहे थे. इस आधार पर माना जा रहा है कि सूरत में हत्यारों के और भी मददगार छिपे हुए हैं, जिसकी जानकारी पुलिस टीम जुटा रही है.


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