उधर हो रही थी विश्वास जीतने की कोशिश, इधर पुलवामा में तीन और गद्दारों ने उठा लिए भारत के खिलाफ हथियार

2019 के लोकसभा चुनावों में बंपार जीत के बाद जब पीएम मोदी ने अपने नवनिर्वाचित सांसदों को संबोधित किया तो उसमें उनके द्वारा कही गई एक बात ने सबसे ज्यादा सुर्खियाँ बटोरीं. पीएम मोदी ने कहा था कि अब उनको देश के अल्प्संखयक(मुस्लिम) समाज का विश्वास जीतना है. एकतरफ पीएम मोदी अल्पसंख्यक मुस्लिमों का विश्वास जीतने की बात कर रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर के पुलवामा के तीन गद्दारों ने भारत के खिलाफ ही हथियार उठा लिए हैं तथा इस्लामिक आतंकी दल लश्कर में शामिल हो गये हैं.

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सूत्रों के हवाले से प्राप्त हुई जानकारी के मुताबिक़, आतंकी बने इन तीनों देश के गद्दार युवकों की तस्‍वीरें इन दिनों सोशल मीडिया में वायरल हो चुकी है. एके-47 राइफल के साथ सोशल मीडिया में मौजूद तस्‍वीरों के मुताबिक, तीनों गद्दार युवकों ने लश्‍कर-ए-तैयबा नामक इस्लामिक आतंकी संगठन ज्‍वाइन किया है. जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस का स्‍पेशल ऑपरेशन स्‍क्‍वायड इन तस्‍वीरों की सत्‍यता की जांच में जुट गई है.

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बताया गया है कि आतंकी संगठन लश्‍कर-ए-तैयबा ज्‍वाइन करने वाले तीनों युवकों की पहचान इरशाद डार, नजीम डार और रफीक डार के रूप में हुई है. तीनों युवक लंबे समय से अपने घर से लापता था. गुरुवार सुबह अचालन तीनों युवकों की तस्‍वीरें हथियारों के साथ सोशल मीडिया में वायरल होना शुरू हो गई. जिसके बाद, जम्‍मू और कश्‍मीर पुलिस के साथ खुफिया एजेंसियां इन तीनों युवकों का सुराग तलाशने की कवायद में जुट गई हैं.

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सुरक्षाबल से जुड़े वरिष्‍ठ अधिकारी ने बताया कि नजीम डार नामक युवक मूल रूप से पुलवामा के काकापोरा इलाके का रहने वाला है. उसने हाल में बैचलर ऑफ कम्‍प्‍यूटर एप्‍लीकेशन (बीसीए) की डिग्री हालिस की थी. बताया जा रहा है कि नजीम डार में 17 जून को लश्‍कर-ए-तैयबा का आतंकी बना है. उन्‍होंने बताया कि कथित तौर पर आतंकी बनने वाला दूसरा युवक इरशाद डार पुलवामा के त्रिचाल का रहने वाला है. उसने अरबी भाषा में मौलवी का कोर्स किया है.

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सूत्रों की मानें तो इरशाद डार पहले आतंकियों के स्‍लीपर सेल की तरह काम कर रहा था. लश्‍कर-ए-तैयबा ने उसे घाटी के युवकों को गुमराह कर आतंक के रास्‍ते में ढकेलने की जिम्‍मेदारी सौंपी हुई थी. कई युवकों को आतंक के रास्‍ते में ढकेलने के बाद वह खुद एक जून को लश्‍कर-ए-तैयबा का आतंकी बन गया. आतंक के रास्‍ते पर निकले रफीक डार मूल रूप से संबूरा इलाके का रहने वाला है. उसने दसवीं तक की पढ़ाई की है. सूत्रों की माने तो बीते दिनों तक वह पत्‍थरबाजों को इकट्ठा कर सुरक्षाबलों पर पत्‍थरबाजी की घटनाओं को अंजाम दिलाता आया है तथा 1 जून को उसने भी हथियार उठा लिया है.

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