बदल रहा वक्त और सत्य साबित हो रहे सावरकर.. दुर्गा पूजा और श्रीराम के शौर्य दिवस दशहरा की बधाई उन्होंने दी जो कहते थे कि “अफीम है धर्म”


वीर सावरकर जी ने कभी कहा था की जिस दिन हिन्दू एक हो कर अपना वोट बैंक बना लेंगे उसी दिन तुष्टिकरण करने वाले सभी नेता हिन्दुओ की राजनीती करना शुरू कर देंगे.. पिछले लगभग 7 वर्षो के अन्दर जिस प्रकार से हिन्दुओ ने अपने बंटवारे पर लगाम लगाई है उसके बाद भारत की राजनीती में ऐसा आमूलचूल बदलाव आया है जो किसी ने सोचा भी नहीं था . ये बदलाव मात्र बयानों तक सीमित नहीं रहा बल्कि उसको अब जमीनी स्तर पर साफ़ देखा जा सकता है .

भगवा आतंकवाद कहने वाली पार्टी के मुखिया राहुल गांधी के मन्दिर दर्शन हर किसी ने देखे और उनके हिंदुत्व के प्रति खुद को नजदीक दिखाने की हद तो यहाँ तक आई की उन्होंने जनेऊ भी बाहर निकाल कर दिखानी शुरू कर दी .. कांग्रेस हिंदुत्व पर इस कदर चलने लगी की कांग्रेस के ही नेता शशि थरूर ने राहुल गांधी को चेता कर कहा की ज्यादा हिंदुत्व उनकी पार्टी के मूल वोटो को नुकसान पंहुचा सकता है . लेकिन अब जो बदलाव दिखा वो सबसे अप्रत्याशित है .

यहाँ बदलाव दिखाई दे रहा है वामपंथी पार्टी के मुखिया में.. ये मुखिया हैं सीताराम येचुरी जो कथित टुकड़े टुकड़े गैंग के मंचो पर भी दिखाई दिए हैं कई बार . इन्होने हिन्दुओ को जैसे ही माँ दुर्गा के नवमी व् भगवान श्रीराम के शौर्य दिवस दहशरा की बधाई दी , वो लोगों को हजम नहीं हुई और उन्होंने उनको ट्रोल करना शुरू कर दिया . बंगाल के आगामी विधानसभा चुनावो में अपने अस्तित्व की तलाश में भटक रही कम्युनिस्ट पार्टी के इस कदम को हिन्दुओ के अंदर पैठ बनाने वाला कदम माना जा रहा है .

यहाँ ये ध्यान रखना बेहद जरूरी है की इन्ही सीताराम येचुरी और इनकी पार्टी की विचारधारा के तमाम लोग धर्म को अफीम बताने का काम करते हैं . अब उसी माकपा के राष्ट्रीय महासचिव सीताराम येचुरी की पार्टी जब पश्चिम बंगाल में अस्तित्व खो चुकी है तब उन्हें मां दुर्गा की याद आने लगी है। धर्म को लोगों के जीवन में सबसे अनुपयोगी बताने वाले येचुरी ने अष्टमी के दिन नवमी और दशमी की शुभकामनाएं दी थी। इसी के बाद अब उन्हें ट्विटर पर उनके विरोध ही नहीं बल्कि समर्थक भी ट्रोल कर रहे हैं .

उन्होंने लिखा था कि महानवमी, दशहरा और विजयादशमी के त्योहारों की सभी को बधाई। बुराई पर अच्छाई की जीत हो। इसके बाद सोमवार तक हजारों लोगों ने उनके ट्वीट को रिट्वीट कर कमैंट्स और आलोचनाएं करना शुरू किया है। एक यूजर ने लिखा कि कॉमरेड येचुरी मैं वास्तव में सदमे में हूं। लेनिन, स्टालिन और मार्क्स की आत्माएं आज क्या कहेंगी? सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि धर्मनिरपेक्ष सबसे अधिक मुश्किल में पड़ गए होंगे। एक दूसरे यूज़र में लिखा कि सीताराम येचुरी अच्छी बात है कि आप अब हिंदू धर्म की ओर आकर्षित हो रहे हैं। आखिर सबको आना यहीं है लेकिन आपको याद रखना होगा कि दुर्गा अष्टमी को नवमी की शुभकामनाएं नहीं दी जाती।

 

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