“श्रीराम के लिए प्राण भी दे सकता हूं” .. कहने वाले कल्याण सिंह वापस आ रहे भाजपा की सक्रिय राजनीति में

अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि आन्दोलन के प्रमुख चेहरों की अगर बात की जाए तो इसमें उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री तथा राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. कल्याण सिंह वो नाम है जिनकी एक समय देश की राजनीति में तूती बोलती थी तथा उन्हें धर्मपुत्र कल्याण सिंह कहा जाने लगा था. वो समय हर किसी को याद होगा जब 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद कल्याण सिंह ने यूपी के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था तथा कहा था कि वह श्रीराम के लिए सरकार तो क्या, अपने प्राणों का बलिदान भी दे देंगे.

प्रभु श्रीराम के लिए प्राणों का बलिदान देने की बता करने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह आज फिर औपचारिक रूप से भाजपाई हो जाएंगे. उन्हें बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह पार्टी मुख्यालय पर पार्टी की सदस्यता दिलाएंगे. वह दोपहर 1 बजे पार्टी ऑफिस पहुंचेंगे तथा बीजेपी की सदस्यता लेंगे. इसके बाद कल्याण सिंह दोपहर 3.30 बजे एक प्रेस कांफ्रेन्स को संबोधित करेंगे.

कानून-व्यवस्था को संभालने का मुद्दा हो, जातिगत वोट का गणित हो या फिर विकास की बात हो सभी कसौटियों पर कल्याण सिंह से बेहतर कोई नाम शायद ही दूसरा हो. राजस्थान के राज्यपाल के तौर पर पिछले 5 सालों से सक्रिय राजनीति से दूर रहे कल्याण सिंह एक बार फिर नई पारी की तैयारी में हैं. कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव के साथ-साथ  राम मंदिर निर्माण में भी बड़ी भूमिका मेें नजर आ सकते हैं.

सभी जानते हैं कि राम मंदिर आंदोलन से कल्याण सिंह का पुराना नाता रहा है. अयोध्या में बाबरी विध्वंस विवाद में उनकी सत्ता चली गई थी. 6 दिसम्बर 1992 को विवादित स्थल को कारसेवकों ने जब ढहाना शुरू किया तो कल्याण सिंह ने पूरी घटना की जिम्मेदारी खुद ले ली थी और पद का मोह न करते हुए सरकार से इस्तीफा भी दे दिया था. बताया जाता है कि उसी समय कल्याण सिंह ने कहा था कि उन्हें अपनी सरकार जाने का दुःख नहीं है तथा श्रीराम के लिए वह प्राण भी दे सकते हैं.
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