आज ही कोठारी बंधुओं ने श्रीराम की जन्मभूमि पर लहरा दिया था भगवा.. और उसे बर्दाश्त नहीं कर पाए थे मुलायम सिंह यादव


अमर बलिदानी श्रीराम भक्त कोठारी बंधु.. हो सकता है कि कूल ड्यूड टाइप लोग इनका नाम न जानते हों लेकिन जिसके अंदर भी हिंदुत्व की लौ ज्वाला बनकर दौड़ती है वह कोठारी बंधुओं को अवश्य जानता होगा. कोठारी बंधु(राम कोठारी तथा शरद कोठारी) हिंदुत्व की वो महानतम विभूति हैं जिन्होंने अयोध्या में आज के ही दिन बाबरी पर भगवा फहराया था. कोठारी बंधुओं के इस शौर्य को यूपी के तत्कालीन सीएम मुलायम सिंह यादव बर्दाश्त नहीं कर पाए थे तथा उन्होंने कारसेवकों पर गोलियां चलवा दी थी. इसी गोलीबारी में राम कोठारी तथा शरद कोठारी दोनों भाई बलिदान हो गये थे.

ये 1990 का वर्ष था. 21 से 30 अक्टूबर 1990 तक अयोध्या में लाखों की संख्या में श्रीराम भक्त कारसेवक जुट चुके थे. सब श्रीराम जन्मभूमि की ओर जाने की तैयारी में थे. जन्मभूमि के चारों तरफ भारी सुरक्षा थी. अयोध्या में लगे कर्फ्यू के बीच सुबह करीब 10 बजे चारों दिशाओं से बाबरी मस्जिद की ओर कारसेवक बढ़ने लगे. इनका नेतृत्व कर रहे थे अशोक सिंघल, उमा भारती, विनय कटियार जैसे नेता. श्रीराम जन्मभूमि के चारों तरफ और अयोध्या शहर में यूपी पीएसी के करीब 30 हजार जवान तैनात किए गए थे. इसी दिन बाबरी मस्जिद के गुंबद पर शरद  कोठारी (20 साल) और रामकुमार कोठारी (23 साल) नाम के दो भाइयों ने भगवा झंडा फहराया था.

मुलायम सिंह यादव उस वक्त यूपी के मुख्यमंत्री थे. उनका साफ निर्देश था कि बाबरी मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए.  लेकिन इसके बाद भी 5000 से ज्यादा श्रीराम भक्त कारसेवक श्रीराम जन्मभूमि तक पहुँच गये. शरद कोठारी तथा राम कोठारी नामक दोनों भाई गुंबद पर चढ़ गये तथा जयश्रीराम का उद्घोष करते हुए बाबरी पर भगवा फहरा दिया. कोठारी बंधुओं द्वारा बाबरी पर भगवा फहराते ही अयोध्या जयश्रीराम के नारों से गूँज उठी. फिर वो हुआ जिसका अंदाजा भी न था.

पुलिस ने कारसेवकों पर फायरिंग कर दी. सरकारी आंकड़ों के अनुसार 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या में हुई फायरिंग में 5 कारसेवकों की जान चली गई, जबकि वास्तविक संख्या इसके ज्यादा भी बताई जाती है. उस दिन सीआरपीएफ के जवानों ने दोनों कोठारी भाइयों को पीटकर खदेड़ दिया. किताब ‘अयोध्या के चश्मदीद’ के अनुसार कोठारी भाइयों के दोस्त राजेश अग्रवाल के अनुसार 22 अक्टूबर की रात शरद और रामकुमार कोठारी कोलकाता से चले थे तथा बनारस आकर रुक गए थे. सरकार ने ट्रेनें और बसें बंद कर रखी थीं. तो वे टैक्सी से आजमगढ़ के फूलपुर कस्बे तक आए. इसके बाद यहां से सड़क का रास्ता भी बंद था. लेकिन दोनों 25 अक्टूबर को अयोध्या की तरफ पैदल निकले पड़े.

करीब 200 किलोमीटर पैदल चलने के बाद 30 अक्टूबर को दोनों अयोध्या पहुंचे. 30 अक्टूबर को गुंबद(बाबरी) पर चढ़ने वाला पहला आदमी शरद कोठारी ही था. फिर उसका भाई रामकुमार भी चढ़ा. दोनों ने वहां भगवा झंडा फहराया था. किताब ‘अयोध्या के चश्मदीद’ के अनुसार 30 अक्टूबर को गुंबद पर झंडा लहराने के बाद शरद और रामकुमार 2 नवंबर को विनय कटियार के नेतृत्व में दिगंबर अखाड़े की तरफ से हनुमानगढ़ी की तरफ जा रहे थे. तभी फिर से पुलिस ने श्रीराम भक्तों पर गोलीबारी शुरू कर दी. इसका आदेश यूपी की सत्ता से आया था. जब पुलिस ने गोली चलाई तो दोनों पीछे हटकर लाल कोठी वाली गली के एक घर में छिप गए. लेकिन थोड़ी देर बाद जब वे दोनों बाहर निकले तो पुलिस फायरिंग का शिकार बन गए. दोनों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया.

पुलिस की पहली गोली रामकुमार कोठारी को लगी. गोली लगते ही रामकुमार कोठारी ने जयश्रीराम का उद्घोष किया तथा गिर पड़े. बड़े भाई रामकुमार कोठारी को गोली लगते देख छोटा भाई शरद कोठारी भी बाहर आ गया तथा गोली लगने से लहूलुहान अपने भाई राम कोठारी के ऊपर लेट गया. तभी कुछ गोलियां शरद कोठारी को आ लगी. इसके बाद दोनों भाईयों ने जयश्रीराम का नारा लगाया तथा दम तोड़ दिया. श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए दो भाई शरद कोठारी तथा राम कोठारी ने अपने प्राणों का बलिदान दे दिया था.

4 नवंबर 1990 को शरद और रामकुमार कोठारी का सरयू के घाट पर अंतिम संस्कार किया गया. उनके अंतिम संस्कार में हजारों लोग उमड़ पड़े थे. दोनों भाइयों के लिए अमर रहे के नारे गूंज रहे थे. इस घटना को आज करीब 30 वर्ष हो चुके हैं लेकिन जिस कार्य के लिए कोठारी बंधुओं ने अपना बलिदान दिया था वो कार्य अभी तक अधूरा है. उम्मीद है कि १७ नवम्बर पर सुप्रीम कोर्ट अयोध्या श्रीराम मंदिर मामले में फैसला सुनाएगा, जिसके बाद अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का निर्माण होगा. जब अतक अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण नहीं होता, कोठारी बंधुओं तथा अन्य तमाम बलिदानी कारसेवकों की आत्मा को शांति नहीं मिलेगी.


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