गांधी के सपनों का देश.. जांबाज़ पुलिस अधीक्षक की हत्या करने वाले दुर्दांत नक्सली को फूल माला पहना कर कर सरेंडर करवाया गया. मिला 2 लाख कर चेक भी


इसको ही गाँधी का देश कहा जा सकता है जहाँ पर हिंसा आदि की कोई गुंजाईश नहीं है . इसका असल नजारा पहले तो कश्मीर में तैनात उन सैनिको को देख कर लगाया जा सकता है जो थप्पड़ और पत्थर दोनों खाने के बाद भी सर झुका कर निकल जाया करते हैं जबकि कई अन्य ऐसे देश भी है जहाँ सैनिको या सेना आदि के जाने के बाद या तो सम्मान से या तो डर से लोग खड़े हो जाया करते हैं . अब उस से भी बड़ा कुछ देखने को मिला है झारखंड में .

ज्ञात हो कि एक लम्बे समय तक रक्त की होली खेलने वाले 25 लाख के नक्सली ने आख़िरकार सरेंडर ही कर दिया . इसके द्वारा खेली गयी रक्त की होली में सिर्फ आम जनता और सामान्य पुलिसकर्मी ही नहीं बल्कि वो जांबाज़ पुलिस अधीक्षक भी था जो अपने जीवन का एक एक पल समर्पित कर गया था देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए . हैरानी की बात ये है कि इस नक्सली के खुद के हिसाब से ये सरेंडर इसलिए कर रहा है क्योकि इसको नक्सल बनाने वाले इसका अब ध्यान नही रखते थे .

कुल मिला कर ये साबित हुआ कि ये अपनों की उपेक्षा आदि से नक्सल का मार्ग छोड़ा है .. इतना ही नहीं इसको सरकार की तरफ से दो लाख रूपये का इनाम भी मिला . झारखंड के गिरिडीह में प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी के बिहार-बंगाल स्पेशल एरिया कमेटी के सदस्य और 25 लाख रुपये के इनामी नक्सली बलवीर महतो ने आत्मसमर्पण कर दिया है। गिरिडीहनगर थाना क्षेत्र के पुलिस लाइन में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कुख्यात नक्सली बलबीर महतो उर्फ रौशन दा उर्फ विपुल दा ने गुरुवार को सरेंडर किया। इस दौरान डीआईजी पंकज काम्बोज, गिरिडीह एसपी सुरेंद्र झा सहित कई अन्य पुलिस कर्मी मौजूद रहे।

समर्पण के बाद प्रशासन के द्वारा उसे दो लाख रुपये का चेक दिया गया। बलवीर के मुताबिक जो लालच देकर लोगों को नक्सली संगठन में लाया जाता हैं, वहां वैसी कोई सुविधा उन्हें नहीं दी जाती हैं। बीमार होने पर संगठन कोई ख्याल नहीं रखता है। पुलिस को तीन पेज के दिए लिखित बयान में बलबीर ने बताया कि वो बिना किसी डर या दबाव के आत्मसमर्पण कर रहा है। उसने बयान में लिखा है कि सीपीआई माओवादी में आने से पहले घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं रहने के चलते 1999 में मुंबई काम करने गया। यहां पांच साल तक होटल में वेटर के तौर पर काम किया। इस दौरान किसी से मारपीट हुई तो वापस घर आ गया। सरेंडर करने वाले नक्सली बलबीर पर पाकुड़ के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार की हत्या का मुख्य सूत्रधार होने, गिरिडीह कैदी वाहन ब्रेक में शामिल होने, सारंडा जंगल मुठभेड़ समेत करीब दो दर्जन मामलों में शामिल होने का आरोप है।

 


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