वायुसेना के 4 जांबाजों की ह्त्या करके भी सरकारी सुविधा में घूमता था दरिंदा यासीन मलिक.. लेकिन मोदी सरकार में होने जा रहा है न्याय


कश्मीर का अलगाववादी आतंकी यासीन मलिक.. वो यासीन जो फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे कैद है तथा मोदी सरकार के आने से पहले वह सरकारी सुविधाओं में घूमता था.. वो यासीन मलिक 1990 में श्रीनगर में राष्ट्र रक्षक एयरफ़ोर्स के 4 जांबाजों की ह्त्या का जिम्मेदार है. अफ़सोस कि यासीन मलिक ने एयरफ़ोर्स के 4 जांबाजों की ह्त्या की, इसके बाद भी वह अब तक सरकारी सुविधाओं का लाभ लेता रहा, पाकिस्तान परस्ती करता था और हमारे देश के सत्ताधीश उसके खिलाफ केस तक नहीं चला सके.

लेकिन अब यासीन मलिक पर इस मामले में भी कानूनी शिंकजा कसना शुरू हो गया है. खबर के मुताबिक़, 1990 में श्रीनगर में दिन दहाड़े हुई भारतीय वायुसेना के जांबाज अफसरों की हत्याकांड में 11 सितंबर को  कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसके बाद कोर्ट ने कहा कि 1 अक्टूबर से  टाडा कोर्ट में सुनवाई होगी. जम्मू टाडा कोर्ट ने मलिक के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी करते हुए पुलिस को उन्हें 11 सितंबर तक कोर्ट के सामने पेश करने को कहा था.

देश को थर्रा कर रख देने वाली ये आतंकी वारदात 25 जनवरी, 1990 की है. जेकेएलएफ सरगना यासीन मलिक ने इंडियन एयरफोर्स के चार जांबाज अफसरों को श्रीनगर में दिन दहाड़े गोलियों से भून दिया था. यासीन ने स्कवार्डन लीडर रवि खन्ना की शरीर में अत्याधुनिक राइफल से 26 बुलेट उतार दिए थे. इसी केस की सुनवाई 11 सितंबर से शुरू हुई है. इस केस में ट्रायल शुरू होने में 30 साल इसलिए लग गए, क्योंकि यासीन मलिक जैसे आतंकवादी को नेताओं और सिस्टम का संरक्षण मिला हुआ था. वह लगभग 30 साल तक बेखौफ होकर सरकारी खर्चे पर देश-विदेश घूमता रहा और जम्मू-कश्मीर से लेकर केंद्र तक की सरकारें उसे कथित तौर पर संरक्षण देती रहीं और कई नेता उसे आधुनिक युग का गांधी साबित करने में लगे रहे

इससे भी शर्मनाक ये है कि इस सबके बाद भी उसे कश्मीर मुद्दे का एक प्रमुख स्टेक होल्डर तक बताया गया, जो भारत सरकार से बातचीत के लिए भी शर्तें लगाता रहा. हालाँकि मोदी सरकार में यासीन मलिक पर शिकंजा कस चुका है तथा उसके संगठन जेकेएलएफ को बैन करके उसे गिरफ्तार कर जेल में डाला गया है. उसके खिलाफ टाडा, आरपीसी और आर्म्स ऐक्ट के तहत मुकदमा दर्ज है. उसके खिलाफ दर्ज चार्जशीट के मुताबिक उसने क्लाशनिकोव्स राइफल से निहत्थे अफसरों पर ताबड़तोड़ गोलियों की बौछार कर दी.

एक मीडिया सूत्र से बात करते हुए सीबीआई के स्पेशल प्रोसेक्यूटर पवित्र सिंह भारद्वाज ने बताया है कि यासीन मालिक का ऐसा दबदबा था कि लोग उससे डरते थे. उसे इलाज के बहाने जनता के पैसों पर फर्जी तरीके से न्यूयॉर्क जाने की इजाजत दी गई. उनके मुताबिक वह ‘कान का पर्दा दिखाने के लिए न्यूयॉर्क गया…..उसने झूठा हलफनामा दिया कि मेरे खिलाफ कोई केस नहीं है…लेकिन कोई ऐक्शन नहीं लिया सेंटर ने, उसी आधार पर उसे भेज दिया. सीबीआई का ऑब्जेक्शन नहीं लिया, हमारा नहीं लिया. …..सरकार ने खर्चा बर्दाश्त किया…सेंट्रल गवर्नमेंट ने.’ उन्होंने बताया कि नेशनल कांफ्रेंस की सरकार उसे खुलेआम समर्थन करती थी और केंद्र सरकार भी उसे सपोर्ट करती थी. महबूबा मुफ्ती और फारूक अब्दुल्ला ने उसका खुलकर समर्थन किया.

अब जब तीन दशक बाद यासीन के खिलाफ मुकदमा शुरू हुआ है तो शहीद स्कवार्डन लीडर रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना को सुकून मिला है. इन 30 में उन्होंने जो संघर्ष किया है उनके एक-एक शब्दों में उस दर्द की टीस महसूस की जा सकती है. उन्होंने कहा है कि “30 साल बाद एयरफोर्स के इन अधिकारियों की हत्या के मामले में कुछ न्याय होता देख रही हूं…..तब वे (स्कवार्डन लीडर रवि खन्ना) सिर्फ 38 साल के थे……हादसों की तरह जिंदगी गुजार दी. अब जब जिंदगी खत्म होने को आई तो एक रोशनी की किरण दिखाई दे रही है कि मेरे पति का जिसने कत्ल किया है, खून किया है…आज मैं उस इंसाफ को 30 साल के बाद देखने जा रही हूं.”

जिस समय रवि खन्ना शहीद हुए उनके बच्चे महज साढ़े छह और साढ़े आठ साल के थे. उनकी पत्नी ने उनकी वर्दी को छूकर जो प्रण लिया था उन्होंने उसे पूरा कर दिखाया है. आज उन्होंने अपने दोनों बच्चों को देश का जिम्मेदार नागरिक बनाया है. वो सिस्टम, सरकार और आतंकियों के रहनुमा बने बैठे नेताओं से पूछती हैं, “मेरे पति का कसूर क्या था? उसने यूनिफॉर्म पहनी थी, यही कसूर था? मुझे बड़ा अफसोस होता है अपने देश की हालत देखकर कि कैसे एक किलर को इस तरह से ऑनर किया जाता है…. और जिनके साथ ये हादसा होता है उनके साथ क्या सलूक किया जाता है?” उन्होंने कहा कि ‘उन्हें विदेश भेजने के लिए सरकार ने एक शहीद की ताबूत में से पैसे निकालकर दे दिए. हुकूमतें ऐसा क्यों करती हैं…..उन्हें इतनी समझ आनी चाहिए कि दूसरे के दिल पर क्या गुजरती है…उसका खून कर दिया और लाश के साथ जो बचा-खुचा चिपका है वो भी पी जाएं…….’

शहीद स्कवार्डन लीडर रवि खन्ना की पत्नी निर्मल खन्ना बहुत ही दर्द लेकिन गर्व से कहती हैं कि मेरे पति ने 27 बुलेट्स खाए थे….. बीते 30 वर्षों में उन्होंने कई जख्म झेले हैं. अपने कलेजे की टीस को उन्होंने वीर रस की एक कविता के जरिए व्यक्त करने की कोशिश की है- “कैसी थी वो पोशाक जो ले गई मेरा सुहाग…खड़ा वो सड़क किनारे था, ना था उसमें कोई रोष-नाराज कर्तव्यवद्ध सुंदर ….पहना था उसने सेनानी लिबास…जानता था वो की कफन है मेरी पोशाक …जानते हुए भी पहना था वायुसेना का लिबास….काम देश की आ सकी ऐसी थी वो सुंदर पोशाक….उनका कसूर क्या था? अब उन्होंने उम्मीद जताई है कि मोदी सरकार में आतंकी यासीन को सजा मिलेगी तथा उनके पति तथा उनके साथियों के बलिदान की आत्मा को शांति मिलेगी.


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