1 घंटे पहले तक काम किया था मनोहर पर्रिकर ने.. काम तभी रुका जब सांस रुकी


देश के पूर्व रक्षा मंत्री तथा गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर जी सच्चे कर्मयोगी थे. पर्रिकर जी ने कहा था कि वह अपने जीवन की आख़िरी साँस तक गोवा तथा देश की सेवा करेंगे. मनोहर पार्रिकर जी ने अपने इस वादे को पूरी तरह से निभाया तथा कैसर जैसी बीमारी से लंबे समय तक जूझने के बाद भी वह अनवरत काम करते रहे. अपनी मौत से 1 घंटे पहले तक पर्रिकर जी काम की बात कर रहे थे. उनका काम तभी रुका जब उनकी सांस रुकी.  ईमानदारी तथा सादगी की अनोखी मिशल सच्चे कर्मयोगी मनोहर पर्रिकर जी के निधन पर आज पूरा हिंदुस्तान रो रहा है तथा नाम आँखों से अपने नायक को विदाई दे रहा है.

गोवा विधानसभा पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र आर्लेकर ने एक अखबार से बातचीत   में बताया कि मैं रविवार दोपहर डेढ़ बजे पर्रिकरजी से मिलने गया था. वह होश में थे. मैंने उनसे तबीयत के बारे में पूछा, लेकिन वह दफ्तर के कामकाज के बारे में बात करने लगे. हालांकि, वह ज्यादा बात नहीं कर पा रहे थे, फिर भी लगातार कुछ बोलने की कोशिश करते रहे. डॉक्टर उन्हें बात नहीं करने को कहते रहे. मैं वहां से लौट आया. आॅफिस पहुंचा ही था कि उनके देहांत की खबर आ गई. मैं तुरंत उनके घर पहुंचा.

राजेंद्र आर्लेकर ने बताया कि उनका पार्थिव शरीर देखकर उनके साथ बिताए 30 साल के अच्छे-बुरे पल आंखों के आगे घूमने लगे. एक साल पहले उन्हें पता चला था कि कैंसर है लेकिन इससे उनके काम पर बहुत कम असर पड़ा. वे इलाज के लिए अमेरिका गए. वहां से भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए काम की मॉनीटरिंग करते रहे. बैठकें करते रहे. कहते थे- ‘अगर मैं बैठ जाऊंगा तो और बीमार हो जाऊंगा.’ शायद इसीलिए वह कड़ी धूप में भी निर्माणाधीन पुल का जायजा लेने पहुंच गए थे. जिस दिन वह दफ्तर नहीं आ पाते, घर से काम करते थे. घर पर मंत्रिमंडल की बैठक लेते थे. उनकी सादगी के सब कायल थे. कई बातें ऐसी हैं, जो आजकल के नेताओं में नहीं दिखती.

2004 के फिल्म फेस्टिवल में सब मेहमान भी हैरान रह गए थे, जब पर्रिकर पसीने से लथपथ होकर पुलिसवालों के साथ ट्रैफिक कंट्रोल कर रहे थे. सादगी इतनी कि बेटे की शादी में जहां मेहमान शानदार सूट-बूट में थे, पर्रिकर हाफ शर्ट, क्रीज वाली साधारण पैंट और सैंडिल पहने आवभगत में जुटे थे. जब वह बीमार नहीं थे तो 16-18 घंटे काम करना उनकी आदत थी, एक बार वह आधी रात तक अपने ओएसडी गिरिराज वरनेकर के साथ किसी प्रोजेक्ट पर काम करते रहे. जाते समय वरनेकर ने पूछा, कल किस समय आना है? जवाब मिला- कल थोड़ी देरी से आ सकते हो. सुबह 6.30 तक आ जाना. वरनेकर सुबह 6:15 बजे सीएम हाउस पहुंचे तो देखा कि पर्रिकर 5.15 बजे से ही फाइलें निपटा रहे हैं. ऐसे थे भारतमाता के सपूत मनोहर पर्रिकर जी….

 

“अलविदा मनोहर पर्रिकर जी”


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