जो चाह रहा था राष्ट्र वो हुआ राज्यसभा में.. ख़ुशी से झूम उठी मुस्लिम महिलायें , कट्टरपन्थियो के हौसले पस्त

एक लम्बी जद्दोजहद चली , कईयों ने वर्षो तक इसके सपने देखे और कईयों ने इस पर संघर्ष किया . कुछ को घर छोड़ना पड़ा तो कुछ को दुनिया ही छोड़ कर जानी पड़ी .. लेकिन आख़िरकार उनको पहले सफलता सुप्रीम कोर्ट से मिली थी, फिर उन्हें दूसरी सफलता उन्हें तब मिली जब लोकसभा में ये बिल पास हुआ था और अब मुस्लिम महिलाओं की नई खुशहाल जिन्दगी की कानूनी रूप से शुरुआत हो गई है ..जी हाँ , भारतीय जनता पार्टी की मोदी सरकार के नेतृत्व में मुस्लिम महिलाओं को मिली है एक बहुत बड़े दंश से राहत .

ध्यान देने योग्य है कि गुलाम नबी आज़ाद के नेतृत्व में कांग्रेस के बड़े विरोध के बाद भी आख़िरकार राज्यसभा में तीन तलाक बिल पास हो गया है. इस से पहले लोकसभा में इस बिल को पास करवाने में भाजपा सरकार सफल हुई थी लेकिन राज्यसभा को ले कर संदेह बना था. शुरुआत से ही इस बिल के खिलाफ कांग्रेस और AIADMK ने सदन से वॉकआउट कर दिया था . कांग्रेस ने इस बिल के कुछ प्रावधानों पर असहमति जताई और इसे सिलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग की थी. आरोप प्रत्यारोप के बीच में तमाम दांव पेंच चलते रहे .

लेकिन कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दलील दी कि मुस्लिम महिलाओं को अत्याचार से बचाने के लिए इस बिल का पास होना जरूरी है. राज्य सभा में इस बिल के पक्ष में 99 मत पड़े है जबकि विपक्ष में 84 राज्यसभा सांसदों ने वोट किया .. कई सदस्यों की गैर मौजूदगी के चलते इस बिल को पास होने में आसानी हुई . इस बिल के पास होते ही पूरे भारत की मुस्लिम महिलाओं में ख़ुशी की लहर दौड़ गई और मिठाई आदि बांटी जाने लगी .. कई पीडिताओ ने भाजपा सरकार की प्रशंशा की थी .

 

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