देवबंद का उलेमा चुनौती दे रहा है योगी और मोदी के शासन को.. ये चुनौती है सीधे-सीधे राष्ट्र को

तीन तलाक ऐसा मुद्दा है जिसकी वजह से मुस्लिम बहनों को लगातार जिल्लत झेलनी पड़ी है और लगातार वो दिक्कतों का सामना करती है पर अब भी शायद मुस्लिम समुदाय को उनकी हालातो पर तरस नहीं आता तभी तो तीन तलाक के लिए, मुस्लिम बहनों कि सबलता के लिए जो फैसले किए गए उसके खिलाफ मजहबी ठेकेदार खड़े है. उनको मुस्लिम औरत का सबल होना पसंद नहीं आ रहा है.

ज्ञात हो कि तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बिल तैयार किया गया है.

उसके खिलाफ देवबंद उलेमा ने नाराजगी जताई है.इतना ही नहीं उलेमा ने साथ में यह भी चेताया है कि सरकार को कोई भी कानून बनाने से पहले शरीयत के जानकारों से राय मशवरा अवश्य करना चाहिए क्योंकि शरीयत के खिलाफ देश का मुसलमान कोई फैसला नहीं मानेगा. ये इस देश का, इस लोकतंत्र का, एक तरह से अपमान है और सरकार को ऐसी हिमाकत करने वालों के कान ऐठने चाहिए. ताकि देश के खिलाफ बात करने से पहले कोई 100 बार सोचे.

आपको बता दे कि सरकार के फैसले से नाराज देवबंद के मोहतमिम मुफ्ती अबुल कासिम नौमानी भी मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़े रहने का ऐलान कर चुके हैं. केबिनेट की मंजूरी मिल जाने पर ऐतराज जताते हुए मुफ्ती ने कहा कि तीन तलाक मुसलमानों का निजी मामला है और हर मुसलमान इस मुद्दे पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के साथ खड़ा है. उन्होंने चेताते हुए कहा कि सरकार को चाहिए कि वो कोई ऐसा कदम ना उठाए जिससे टकराव की स्थिती पैदा हो, क्योंकि मुसलमान शरीयत के खिलाफ कोई भी फैसला किसी कीमत पर नहीं मानेगा.

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