पहले दलित लड़की से की छेड़छाड़, फिर तोड़ डाली अंबेडकर की प्रतिमा… अब तक नहीं दिखे वहां एक भी तथाकथित मसीहा

दलित मुस्लिम एकता और उसके गठजोड़ पर कई दलों की राजनीति टिकी हुई है.. कईयो को इसी बहाने विधानसभा और लोकसभा तक की सीट भी मिल चुकी है..यकीनन एकता कभी भी बुरी नही होती और एक स्वस्थ समाज के लिए बेहद जरूरी भी होती है लेकिन जब एक पक्ष के खिलाफ जहर भर कर दूसरे पक्ष को पाला पोसा जाता है तो वहां पर एक संतुलित समाज की कल्पना भी करना व्यर्थ हो जाता है .. फिलहाल कुछ राजनेताओ के दावों पर सवाल खड़ा करती एक खबर ने हिला कर रख दिया है समाज को..

विदित हो कि ये घटना उत्तर प्रदेश के जिला देवरिया की है.. यहाँ के गौरी बाज़ार क्षेत्र के गांव करज़हा मवहरा में भीमराव अंबेडकर की टूटी प्रतिमा बन गयी थी आक्रोश का कारण और जातिवादी नेताओ ने जांच की रिपोर्ट आने तक अपनी बयानबाजी को तेज कर दिया था.. लेकिन जब उस पूरी घटना का सच सामने आया तो अचानक ही इस मामले में कथित सेकुलर नेताओं की राजनीति पर विराम जैसा लग गया और मामले की लीपापोती की कोशिशें शुरू कर दी गईं..

इस मामले की शुरुआत मज़हबी उन्मादियों द्वारा हुई थी जिन्होंने उस गांव की एक दलित लड़कीं से छेड़छाड़ की थी.. मामला 2 अलग अलग सम्प्रदायों से जुड़ा होने के कारण पुलिस फौरन सक्रिय हुई थी और कार्यवाही भी तत्काल हुई थी.. इस मामले में पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया था और तब से ये खुन्नस दलितों से भी आगे बढ़ कर सीधे भीमराव अंबेडकर तक पहुच गयी थी..

जब पुलिस ने इस मामले की जांच तह तक जा कर की तो पाया गया कि जेल जाने के कारण एक समुदाय में दलितों  के लिए गुस्सा था और उसी के चलते उन्होंने भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा को खंडित कर दिया था..पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए खुद से उस प्रतिमा का पुनर्निर्माण करवाया और उसको तोड़ने वाले उन्मादियों को जल्द गिरफ्तार करने का आश्वासन दिया.. पुलिस की त्वरित कार्यवाही से बेहद सन्तुष्ट गांव के कई लोगों ने उस तथाकथित जातिवादियों के लिए अपना रोष प्रकट दिया जो दलित बच्ची के साथ हुई पहले छेड़छाड़ व बाद में अम्बेडकर की प्रतिमा के खण्डित होने के बाद भी खामोश केवल इसलिए रहे कि तोड़ने वाले एक वर्ग विशेष से हैं..

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