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“भारत के कानून नहीं बल्कि मैं इस्लामिक कानून के हिसाब से बालिग़ हो चुकी हूँ”.. ये मामला अब सुप्रीम कोर्ट में.. कहीं शरिया की आहट तो नहीं ?

अभी ज्यादा समय नहीं हुआ जब सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद के पैरोकारों ने कहा था कि वो हिन्दुओ की भावना आदि को बिना देखे भारत के कानून के हिसाब से न्याय करे .. निर्विवाद रूप में अयोध्या हिन्दुओ के सर्वोच्च तीर्थो में से एक है और भगवान् श्रीराम हिन्दुओं ने आराध्य.. पर उनके लिए भी कहा गया था कि कानून के हिसाब से चलना चाहिए अदालत को बजाय कि आस्था के हिसाब से .. लेकिन अब जो मामला पंहुचा है उसी सुप्रीम कोर्ट में उस को क्या कहा जाएगा ये तय करे बुद्धिजीवी समाज .

एक मुस्लिम लड़की जिसके भारत के कानून के हिसाब से नाबालिग होने के चलते उसके निकाह को प्रयागराज उच्च न्यायालय ने कानूनी वैध होने से मना कर दिया है और निकाह को खरिज कर दिया है, अब वही लडकी सुप्रीम कोर्ट पहुची है और उसका कहना है कि भले ही वो भारत के कानून के हिसाब से नाबालिग है लेकिन वो मुसलमान है और उसके मजहबी इस्लामिक कानून के हिसाब से वो बालिग हो चुकी है और उसको उसके इस्लामिक कानून के हिसाब से हक है अब निकाह कर लेने का..

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में नाबालिग मुस्लिम लड़की ने कहा है कि उसने इस्लामिक कानून के हिसाब से अपना निकाह किया है। वह प्यूबर्टी (रजस्वला) की उम्र पा चुकी है और इस्लामिक नियमो के अनुसार वो अब अपनी जिंदगी जीने को आजाद है। हाई कोर्ट ने लड़की की शादी को शून्य करार देते हुए उसे शेल्टर होम में भेजने का आदेश दिया था। सबसे बड़ी बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने लड़की की दलीलों को सुनने के बाद इस पर विचार के लिए सहमति व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है..

नाबालिग मुस्लिम लडकी के अनुसार हाईकोर्ट इस तथ्य की सराहना करने में विफल रहा कि उसका निकाह मुस्लिम कानून के अनुसार हुआ है। याचिका में लड़की ने अपने जीने और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा करने का अनुरोध करते हुये दलील दी है कि वह एक युवक से प्रेम करती है और इस साल जून में मुस्लिम कानून के अनुसार उनका निकाह हो चुका है। जबकि एक मुसलमान होने के बाद भी लड़की के अब्बा ने पुलिस में दर्ज कराई गई शिकायत में कहा कि एक युवक और उसके साथियों ने उसकी बेटी का अपहरण कर लिया है..

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