पुरुषों को गर्भवती करे सरकार -मौलाना गुलज़ार आज़मी

जब बात महिलाओं के हक , हुकूक , सम्मान , ईमान व स्वाभिमान की आ जाती है तो न जाने क्यों समाज का एक खास वर्ग जिसे अक्सर बोलचाल की भाषा मे मज़हबी कट्टरपंथी बोला जाता है , वो सामने आ कर खड़ा हो जाता है और भारत की सरकार तो दूर भारत की अदालत व भारत के संविधान को भी ताख पर रखने जैसे बयान जारी करने लगता है .. महज कुछ दिन पहले महिलाओं के तीन तलाक वाले मुद्दे पर सबने सड़क से संसद व संसद से अदालत तक इसके कुछ प्रमाण देखे भी थे …

एक बार फिर से औरतों को समानता देने के मुद्दे पर जमीयत उलेमा ने अपने तेवर ऐसे दिखाए हैं जैसे वो सरकार को सीधी चुनौती दे रहा हो अंजाम भुगतने आदि की ..ज्ञात हो कि जमीयत उलेमा के सचिव गुलजार आजमी ने एक बेतुका व घोर आपत्तिजनक संवेदनहीन बयान देते हुए कहा है कि यदि सबको लिंग के आधार पर समानता चाहिए तो क्यों नहीं नौ महीने में से आधे-आधे समय के लिए महिला और पुरुष प्रेग्नेंट हो जाते हैं।

पुरुषों को गर्भवती करने की मांग के पीछे उनका यह बयान सरकार द्वारा 45 साल की उम्र से ऊपर की महिलाओं को हज पर बिना किसी पुरुष के जाने की इजाजत देने के प्रस्ताव के बाद आया है। एक बार फिर अपने मज़हबी विचारधारा का हवाला देते हुए इसे इस्लाम व शरिया कानून में दखल बता कर इसका हर हाल में विरोध का एलान किया गया है उन्होंने कुरान के हवाले से कहा कि मुस्लिम महिलाओं को हज पर अकेले जाने देने का फैसला गैरकानूनी है। कुरान में साफ-साफ कहा गया है कि हज पर एक महिला अकेले नहीं जा सकती।’

इतना ही नही, उन्होंने मोदी सरकार पर आरोप भी लगाए गए हैं कि सरकार  मुस्लिमों से जुड़े हुए मुद्दे उठाकर उन्हें बेचैन कर रही है..आगे कहा गया कि अगर सरकार औरतों को अकेले हज पर भेजी तो इसके अंजाम ठीक नहीं होंगे और देश भर का मुसलमान सड़को पर उतरेगा ..इसके साथ उन्होंने देश भर के मौलाना व मौलवियों से इस मुद्दे पर सरकार की खिलाफत की अपील की और साफ तौर पर तीन तलाक वाले अंदाज़ में कहा कि वो कानून बनने के बाद भी इसे कतई नहीं मानेंगे भले ही इसके लिए उन्हें सड़को पर उतरना पड़े ।। सरकार को चेतावनी वो भी महिला समानता के मुद्दे पर देना भारत मे बढ़ते कट्टरपंथ के स्तर को दिखाता है जिसके विरुद्ध जनमानस को जागरूक होने की जरूरत है ।।

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