सुदर्शन के खिलाफ राज्यसभा में 2 बार खड़े हुए शरद यादव की राज्यसभा सदस्यता ख़त्म. साथ ही वो विशेषाधिकार भी जिसका करते रहे दुरुपयोग

राजनितिक क्षेत्र से एक बड़ी खबर समाने आयी है कि जेडीयू पार्टी से बगावत करने के लिए शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता समापत कर दी

गयी है। जेडीयू के महागठबंधन से अलग होकर बीजेपी के साथ सरकार बनाने के बाद से ही बागी तेवर अपनाए हुए थे। जिसका खामियाजा उनके मिला कि

उनको राज्यसभा सदस्यता से हाथ धोना पड़ा।

बता दें कि जेडीयू ने शरद यादव के खिलाप बगावत और बागी तेवर के मामले में राज्यसभा सचिवालय के पास शिकायत दर्ज की और इसके बाद उपराष्ट्रपति

वेंकैया नायडू ने दोनों नेताओं की सदस्यता समाप्त करने का फैसला लिया।

राज्यसभा सचिवालय के अनुसार संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2 (1) (a) के

अनुसार दोनों नेताओं की सदस्यता रद्द की गई। राज्यसभा में पार्टी के नेता आर सी पी सिंह जी ने इसकी पुष्टि की। शरद यादव का समय अभी 5 साल बाकी था

जबकि अली अनवर का 6 महीने बाकी है। जेडीयू ने अगस्त में शरद यादव को राज्यसभा में जेडीयू के नेता पद से हटा दिया गया था। वही दूसरी ओर जेडीयू

पार्टी के मना करने पर भी शरद यादव ने पटना में हुई लालू की ‘बीजेपी भगाओ, देश बचाओ’ रैली में शामिल हुए थे और मंच से नीतीश कुमार पर हमला बोला

था।

गौरतलब है कि जब शरद यादव को राज्यसभा में जेडीयू पार्टी के नेता पद से हटाया था तो उस समय आरसीपी सिंह को राज्यसभा में जेडीयू पार्टी के नेता बनाया

गया था। इस मामले में जेडीयू नेता के.सी. त्यागी ने कहा था कि “लालू की पार्टी रैली में शामिल होकर उन्होंने पार्टी विरोधी गतिविधियों को अंजाम दिया और यह

दलबदल कानून का सीधा उल्लंघन है। ” इससे राज्यसभा की सदस्यता समापत होने से शरद यादव और अली अनवर को बड़ा झटका लग सकता है।
 शरद यादव बहुत दिनों से राजनितिक क्षेत्र में सकिर्य थे और शुरू से ही उनकी छवि बगावत नेता के रूप में थी। राज्यसभा सदस्यता छीनने से शरद यादव की

राजनितिक करियर पर असर पड़ सकता है।

आपको बता दे कि ये वही शरद यादव है जो सुदर्शन के खिलाफ सदन में खड़ा हुए है पर कहते है न कि जीत हमेसा सत्य के साथ खड़े रहने से मिलती है .

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