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दिल्ली में केजरीवाल के जीत की धमक उडीसा तक.. हिन्दू मन्दिरों की योजनायें निकालते नवीन पटनायक अब अल्पसंख्यको के इबादतगाहों पर खर्च करेंगे धन


दिल्ली के चुनावों में उग्र हिंदुत्व की विचारधारा के साथ लड़ने वाली भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद अब देश भर में राजनैतिक परिदृश्य बदलने लगे हैं. शिवसेना जैसी हिन्दूवादी पार्टियों के रुख का बदलाव सबने पहले से देखा ही था अब कुछ ऐसे लोग भी उसी विचारधारा को आत्मसात करते दिखाई दे रहे हैं जिन्होंने अभी हाल में ही अपनी परम्परागत राजनीति से थोडा सा हट कर राह पकड़ ली थी.

इसमें से एक हैं उडीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक. इन्होने भारतीय जनता पार्टी का CAA मुद्दे पर पूरा साथ दिया था और आने वाला उडीसा का चुनाव ऐसा माना जा रहा था कि दोनों साथ ही मिल कर लड़ेंगे. पर अचानक ही समय बदल जैसा गया है और पटनायक ने संभवतः दिल्ली की हार से अपने तेजी से एक दिशा में आगे बढ़ रही राजनीति को थोडा सा बदला है..उस बदलाव में अब फिर से वही सेकुलरिज्म शामिल है जिसका भारत में पहले भी बोलबाला रहा है.

उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने बुधवार को मुस्लिमों सहित अल्पसंख्यकों के मजहबी स्थलों , इबादतगाहो के विकास के लिए 16 करोड़ रुपये मंजूर किए। इस धन का उपयोग उनकी इबादतगाहो में सुविधाओं और सामुदायिक हॉल के निर्माण के लिए किया जाएगा. इससे पहले पटनायक सरकार ने पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर, कोणार्क में सूर्य मंदिर, गंजम में तारा तारिणी मंदिर, बारीपाड़ा में जगन्नाथ मंदिर और कई अन्य मंदिरों के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू कीं थी.

बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी मीडिया विज्ञप्ति के अनुसार, विशेष समस्या निधियों से अल्पसंख्यकों के धार्मिक संस्थानों को राशि प्रदान की जाएगी।  निर्णय के अनुसार, भुवनेश्वर के सत्यनगर में जीसस क्राइस्ट चर्च, मिशन रोड में मदर मेरी भुवनेश्वर कैथोलिक चर्च और कटक ओडिया बैपटिस्ट चर्च को 2-2 करोड़ रुपये मिलेंगे। इसी तरह भुवनेश्वर में यूनिट- IV कैपिटल मस्जिद और कटक में कदम-ए-रसूल मस्जिद को 2-2 लाख रुपये मिलेंगे। इसके अलावा, कई अन्य मस्जिदों और चर्चों को उनके संस्थानों में सुविधाओं और सामुदायिक हॉल के विकास के लिए 1 करोड़ रुपये प्रदान किए जाएंगे।


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