जहाँ शिव चालीसा हाथ में लेने वाले हिन्दू फ़ौरन कर लिए गये थे गिरफ्तार, उसी ताजमहल (तेजोमहालय) में जबरन पढ़ी गयी नमाज़. देखती रह गयी आगरा पुलिस व् CISF

कभी वो तमाम लड़के भारत के स्वघोषित सेकुलर टीम के साथ साथ वामपंथियो और बुद्धिजीवियों के निशाने पर आ गये थे और उनको साम्प्रदायिक उन्मादी आदि नाम से सम्बोधित किया जाने लगा था जिसमे कभी तेजोमहालय रहे ताज महल में उनके तन पर भगवा वस्त्र और हाथों में महादेव शिव की चालीसा दिखाई देने लगी थी . उस समय न सिर्फ मीडिया के बड़े वर्ग ने बल्कि भारत के तमाम बड़े नामो ने इस मामले में बड़ी और कड़ी आपत्ति जताते हुए इस इमारत को प्यार आदि की निशानी बताते हुये धार्मिक उन्मादी आदि के लिए हिन्दू समाज तक को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश की थी .

विदित हो कि अक्सर आज़म खान के बयानों में आते रहने वाली इमारत जिसको दुनिया का 7वां अजूबा भी कहा जाता है उसी कभी तेजोमहालय उर्फ़ ताजमहल में खुलेआम सुप्रीम कोर्ट का आदेश और एएसआई का क़ानून दम तोड़ता दिखा . यही नहीं , ये चुनौती सीधे सीधे योगी सत्ता और मोदी शासन दोनों को मानी जा सकती है जब सर्वोच्च न्यायालय की रोक और तमाम सरकारी निर्देश के बावजूद वहां पर मुसलमानों ने बाकायदा नमाज़ पढ़ी .. उनके चेहरे पर न ही किसी प्रकार का खौफ दिखा और न ही किसी नियम आदि का कोई असर . एक वायरल हो रहे वीडियो के अनुसार तमाम मुस्लिम घूमने के बहाने से टूर-टिकट लेकर ताजमहल के परिसर में दाखिल हुए और फिर अंदर नमाज के लिए बैठ गए। इस दौरान उन्हें एएसआई अधिकारियों ने रोका-टोका भी, लेकिन उनकी जिद के आगे मजहबी कट्टरपंथी हावी रहे और वो उन्हें किसी भी प्रकार से मनाने में असफल साबित हुआ . ये मामला दबाया भी जा रहा था अगर इसका पूरा मामला वीडियो के साथ सोशल मीडिया पर वायरल न हुआ होता तो . 

ध्यान देने योग्य ये है कि भारत की धरोहर और ऐतिहासिक महत्त्व की इस इमारत में न सिर्फ नमाज पढ़ने बल्कि किसी भी साम्प्रदायिक कार्यों की सुप्रीम कोर्ट ने 19 जुलाई 2018 को रोक लगाई थी। तब आदेश दिया था कि सिर्फ शुक्रवार को ताजमहल मस्जिद में नमाज अदा हो सकती है। बाद में एसएसआई ने शुक्रवार वाली नमाज भी रोक दी थी। बावजूद इसके मंगलवार को कुछ लोग ताजमहल पहुंच गए, जिनमें से आधा दर्जन लोगों ने नमाज अदा की। बता दें कि शुक्रवार को ताजमहल बंद रहता है, लेकिन नमाजियों के लिए दोपहर में 2 घंटे के लिए इसे खोल देना पड़ा। इस मामले में कभी शिव चालीसा पढने पर झपट पड़े CISF के जवान भी असहाय नजर आये और वीडियो वायरल होने के बाद सीआईएसएफ से जवाब मांगा गया तो उसका कहना था कि उनके पास ऐसा कोई आदेश नहीं आया है कि मुसलमान यहां सिर्फ शुक्रवार को ही नमाज पढ़ें। अगर कोई टिकट लेकर घुसता है तो उसे कैसे रोकें? वह टूरिस्ट बनकर आया हो। जबकि वायरल हो रहे वीडियो में नमाजिए जबरदस्ती अंदर दाखिल होते दिख रहे हैं। इस मुद्दे पर आगरा पुलिस का भी मूक दर्शक के रूप में रहा और वो इस मामले से साफ़ बच कर निकलती दिखने की कोशिश में नजर आ रही है .

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