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क्या 3 दिन पहले से ही बन चुकी थी मोहन भागवत जी के विरोध की पटकथा ? वो भी उसी संगम क्षेत्र से ..

तीर्थराज प्रयागराज में उस समय अफरातफरी मच गयी थी जब अचानक ही संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के कार्यक्रम और अभिभाषण के दौरान हंगामा मच गया था . अचानक ही भगवा वेश में मौजूद तमाम लोगों ने शोर मचाना शुरू कर दिया और मोहन भागवत जी से श्रीराम जी के मन्दिर निर्माण की तारीख पूछने लगे. यद्दपि इतने के बाद भी मोहन भागवत जी शांत और संयत रहे लेकिन उनके विरोध की खबरें तमाम समाचार माध्यमो ने प्रकाशित कर डालीं .

इसी धर्म संसद में जय श्रीराम के नारे लगने लगे और एक धडा मोहन भागवत से राम मंदिर के निर्माण की तिथि पूछने लगा ..इसी के बाद अचानक ही वहां पर चल रही धर्म संसद दो खेमों बंटी नजर आने लगी और दोनों तरफ से एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगने लगे . यद्दपि अपने सम्बोधन में धर्म संसद को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने कहा, राम मंदिर के निर्माण से कम कुछ भी स्वीकार नहीं है। ये हमारी मांग रहेगी। अब सरकार कैसे करेगी देखना होगा। हम 1990 में 20-30 साल का लक्ष्य मानकर चले थे। 30 साल पूरे होने में बस 2 साल बाकी हैं।

इतना ही नहीं उन्होंने आगे भी कहा कि श्रीराम जी के भव्य मंदिर निर्माण के प्रयास को सम्पूर्ण बल संघ देगा। चुनाव के मद्देनजर फ़िलहाल आंदोलन की घोषणा नहीं की। लेकिन 4-6 महीने में इस पर कुछ हो गया तो ठीक नहीं तो सब देखेंगे। इस हंगामें को लेकर विहिप ने आरोप लगाया कि, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती के समर्थित साधु-संतों ने जानबूझकर हंगामा किया है। इस हंगामे को अगर गहनता से देखा और जाना जाय तो लगभग ३ दिन पीछे जाना होगा . ये जगह VHP के  धर्मसंसद की जगह नहीं बल्कि सेक्टर 10 का एक पंडाल होगा जहाँ पर पिछले ३ दिनों से एक और  धर्म संसद चल रही थी.. आइये जानते हैं इस धर्मसंसद में उठी तमाम आवाजो को जिसको हमारे संवादाता ने वहां मौजूद हो कर जानी और सुनी ..

1- ये स्थान था जगतगुरु शंकराचार्य श्री स्वरूपानंद जी के उत्तराधिकारी श्री अविमुक्तेश्वारानन्द जी के द्वारा संचालित धर्मसंसद जिसको परम धर्म संसद का नाम दिया गया था . ये एक भव्य पंडाल में आयोजित की गयी थी जिसमे देश ही नहीं बल्कि विदेश से भी तमाम वक्ता आये हुए थे . 

2 – परम धर्मसंसद में एक वक्ता के बयान थे – “भारतीय जनता पार्टी ने समाज को धोखा दिया है और छल किया है जनता के साथ” श्रीराम मन्दिर न बन पाने के जिम्मेदार नरेंद्र मोदी हैं . 

3- परम धर्मसंसद में एक वक्ता के बयान थे – ” इस धर्मसंसद का नाम परम धर्मसंसद है, इस से बड़ी धर्म संसद अब हो ही नहीं सकती है .. ये असली वाली है , इसके बाद जो होगी वो नकली होगी” .. ये इशारा VHP की आने वाली धर्मसंसद की तरफ था . 

4- एक अन्य वक्ता के बयान थे –  शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द जी बहुत पहले ही श्रीराम मन्दिर का निर्माण करवा चुके होते जिसके लिए कांग्रेस भी सहयोग करने को तैयार थी ..

5 – एक अन्य वक्ता के बयान थे – ” देव और असुर सब जाति और धर्म में पाए जाते हैं . हिन्दुओ में भी और मुसलमानो में भी देव हैं और असुर भी हैं . 

6 – एक अन्य वक्ता के बयान थे – ” जिस स्थान को कारसेवा में गिराया गया वो कोई मस्जिद थी ही नहीं बल्कि वो प्रभु श्रीराम का मन्दिर था जिसको जान बूझ कर ध्वस्त कर दिया गया और भगवान श्रीराम को मन्दिर से तम्बू में ला दिया गया . 

7- एक अन्य वक्ता के बयान थे कि – ” ये मन्दिर भाजपा संघ आदि कोई नहीं बनवा सकता है , इस मन्दिर का निर्माण अगर कोई करवा सकता है तो शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी और उसकी तारीख भी रख दी गयी . 

8- एक अन्य वक्ता के बयान थे – ” इस कुम्भ में योगी सरकार ने व्यवस्थाएं एकदम भी समुचित और संतोषजनक नहीं की है .. साधू संतो का अपमान हुआ है इस सरकार में . 

 

उपरोक्त बयानों के आधार पर सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस परम धर्मसंसद में मौजूद लोग न हो राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ से और न ही भारतीय जनता पार्टी से खुश थे और उनके अन्दर भारी असंतोष था . कहीं न कहीं ये भी सम्भव है कि इसी धर्मसंसद में मौजूद कुछ लोगों ने अपने गुस्से को VHP की धर्मसंसद में संघ प्रमुख मोहन भागवत जी के आगे प्रकट कर दिया हो . फिलहाल इस मामले में अभी पूरा सच सामने आना बाक़ी है .

 

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