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क्या सच में इस्लाम मन्दिर के घंटियों, घंटो और मजीरों के बारे में वही मानता है जो अदालत में बताया गया ?


जब भी भारत में धर्मनिरपेक्षता की बात की जाती है तो उस समय बुद्धिजीवी वर्ग सबसे आगे खुद को रखते हुए अपने साथ मुस्लिमो को भी इसका एक स्तम्भ बताता है . अमर्त्य सेन जैसों के हिसाब से तो पश्चिम बंगाल की अशांति की वजह हिन्दू संगठन होते हैं .. लेकिन सर्वे भवनु सुखिना का सिद्धांत आत्मसात करने वाले हिन्दू इसके बाद भी अपने आराध्य के जन्मस्थल के लिए अदालत के आगे धैर्य धारण कर के खड़े रहते हैं और अपनी जीत की कामना भी उसी श्रीराम से कर रहे हैं जिनके लिए वो मुकदमा लड़ रहे हैं .

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इसके बाद भी सेकुलरिज्म के स्तम्भ के रूप में ओवैसी जैसे दंगाइयो को गिना गया . कभी कभी तो जाकिर नाईक तक को गले लगाया गया और ओसामा बिन लादेन को जी शब्द से सम्बोधित किया गया पर अब श्रीराम जन्मभूमि मामले की सुनवाई के दौरान आया है एक ऐसा विषय जो किसी के लिए भी नया और हैरान कर देने वाला है . यहाँ सुनवाई के दौरान हिन्दू पक्ष से जो सबूत प्रस्तुत हुए हैं उसमे से एक ये भी है कि इस्लाम घंटे, घंटियों और मजीरों आदि को शैतान के हथियार मानता है..

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श्रीराम जन्मभूमि मामले की अदालत में सुनवाई के दौरान एक इंच भी पीछे हटने के लिए न तैयार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के जरिये ही दुनिया सच को देख रही है .. फिलहाल इसी मामले में सुनवाई के दौरान श्री राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की ओर से वरिष्ठ वकील PN मिश्र ने अपनी जिरह शुरू करते हुए नमाज पढ़ने तरीक़ों के बारे में बताया. वकील PN मिश्रा ने सही मुस्लिम हदीस का हवाला देते हुए कहा कि उसमें लिखा है कि पैगम्बर मोहम्मद ने कहा है कि घंटी बजा कर नमाज नहीं पढ़ी जा सकती, क्योंकि यह शैतान का इंस्टूमेंट है. घंटी बजाने से फरिश्ते उस घर या जगह पर नही आते हैं. अब सवाल ये उठता है कि हिन्दू मन्दिरों में अनिवार्य घंटी, घंटे , ढोल , मजीरे आदि क्या सच में इस्लाम के जानकारों  के हिसाब से शैतान के वाद्य हैं ?

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निश्चित तौर पर मुस्लिम विद्वानों और जानकारी को इस मामले में संज्ञान ले कर अपना स्पष्टीकरण देना चाहिए जिस  से टी वी डिबेट पर उनके द्वारा की जाने वाली तमाम सेक्युलर  बातो और धर्मनिरपेक्षता की दुहाई के कथनी करनी में फर्क न लगे.. फिलहाल अभी तक इस मामले में किसी  भी बड़े मुस्लिम विद्वान या जानकार का कोई भी खंडन नहीं आया है जिसके बाद आम जनता खास कर हिन्दू समाज का कौतूहल और जिज्ञासा इस मामले का सच जानने के लिए बढती जा रही है..

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