किस अधिकारी की सलाह पर हटाई गई हिंदुत्व की आवाज बुलंद करने वाले कई लोगों की सुरक्षा. कमलेश तिवारी का गुनाहगार वो भी क्यों नही ?


तमाम प्रयासों से एक बार फिर से प्रचंड बहुमत में आई सरकार को पहले तो विपक्ष ने तमाम प्रयासों से आमने सामने लड़ कर हराने का प्रयास किया लेकिन जब उसमे सफलता नहीं मिली तो उन्होंने सरकार में ही रह कर सरकार की जडो को खोदने की एक बड़ी साजिश की. ऐसा पुख्ता तौर पर तो नहीं लेकिन जो हालात सबके सामने दिखाई दे रहे हैं, उस हिसाब से तो लगता ही है. अचानक ही लिया जाने लगा एक अजीब सा फैसला और उस फैसले का कुप्रभाव अब साफ़ दिखाई दे रहा है..

विदित हो की या तो इसको अतिविश्वास कहा जाएगा सरकार का या तो किसी की साजिश जिसने हिंदुत्व की आवाज उठाने वालो की सुरक्षा या तो वापस लेने की या फिर उसमे भारी कटौती करने की सलाह दी.. वो सलाह भी यकीनन इतने सजा संवार कर रखी गई रही होगी कि उस पर सरकार ने फ़ौरन ही विश्वास कर डाला और उस विश्वास ने धीरे धीरे अतिविश्वास का रूप ले लिया.. उस अतिविश्वास के चलते ही आज कमलेश तिवारी की नृशंस हत्या हो गई है जिसमे सरकार बैकफुट पर है..

हर कोई जानता था की कमलेश तिवारी मजहबी उन्मादियो के निशाने पर काफी समय से रहे थे.. उनके सर तक को कलम करने और इनाम ले जाने के फतवे जारी थे.. फिर भी सरकार को निचले स्तर के अधिकारियो ने रिपोर्ट भेजी कि इनकी सुरक्षा में कटौती कर दी जाय.. आखिरकार सरकार ने इसको विश्वास लायक रिपोर्ट समझा और फ़ौरन ही उस पर अमल हो गया . कमलेश तिवारी ने अपनी सुरक्षा घटाने का विरोध भी किया था और अपने साथ किसी अनहोनी का जिम्मेदार इसी निर्णय को बताया था..

फिलहाल इसको कहना गलत नहीं होगा की अगर गहराई से जांच की जाय तो निश्चित तौर पर कुछ न कुछ ऐसा निकल कर सामने आएगा जिनकी रिपोर्ट पर धर्म की लड़ाई लड़ते या अधर्म के खिलाफ आवाज उठाते लोगों की सुरक्षा को छीना गया.. सुदर्शन न्यूज पर इस पूरे मामले को विस्तार से आज अर्थात 18 अक्टूबर को रात 8 बजे बिंदास बोल में देखिएगा और कटघरे में खड़ा कीजिएगा उन अधिकारियो को जिन्होंने सरकार को ऐसी आत्मघाती सलाह दी थी ..


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