चुनाव से पहले एक पार्टी खडी हुई JNU के नारेबाजो के साथ .. वही पार्टी जिसने मोहनचंद्र शर्मा के बलिदान पर उठाया था सवाल

ये अचानक घटी घटना नहीं है , इसके संकेत वो पार्टी बार बार दे रही है और पहले भी देती रही है . JNU में जिन भारत विरोधी नारों ने न सिर्फ देश बल्कि विदेशो में भी भारत की छवि को धूमिल कर दिया था अब उन्ही नारेबजो के साथ एक ऐसी पार्टी खड़ी हुई है जिसको एक पूरा प्रदेश चलाने के लिए जनता ने प्रचंड बहुमत के साथ समर्थन दिया है . धीरे धीरे वो पार्टी बिजली , पानी आदि के मुद्दों से बाहर निकल कर अब कथित टुकड़े टुकड़े गैंग के साथ कदमताल करती दिख रही है .

ज्ञात हो कि भारत विरोधी नारे लगाने वालों के साथ खड़े होने वाले उस नेता का नाम है अरविन्द केजरीवाल जिन्होंने राजनीती बदलने के नाम पर आम आदमी पार्टी का गठन किया था लेकिन अब तमाम संदिग्ध आतंकियों और अलगाववादियों के पैरोकार के रूप में सामने आने लगे हैं . अब तमाम लोगों को ये शक होता है कि कहीं दिल्ली की जनता को राहत देने का नाम ले कर अन्ना हजारे की आड़ में खड़ी की गई आम आदमी पार्टी का उद्देश्य कुछ और तो नहीं था .

विदित हो कि JNU के नारेबाजो के परोक्ष समर्थन में आते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को कहा कि जेएनयू राजद्रोह मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा लोकसभा चुनाव से ठीक पहले आरोपपत्र दायर किये जाने से कई सवाल खड़े होते हैं और इसका आप सरकार द्वारा ‘विधिक अध्ययन’ किए जाने की जरूरत है. अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पुलिस ने जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और नौ अन्य के खिलाफ राजद्रोह के मामले के सिलसिले में अदालत में आरोपपत्र दायर करने में तीन वर्ष का समय लिया. गत महीने अदालत ने कन्हैया और अन्य के खिलाफ आरोपपत्र प्राधिकारियों से जरूरी मंजूरी प्राप्त किये बिना दायर किए जाने पर सवाल उठाये थे.बुधवार को अदालत ने दिल्ली सरकार से कहा कि वह मामले में अभियोजन के लिए जरूरी मंजूरी प्रदान करने की प्रक्रिया में तेजी लाए.

 

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