वो भारत भूमि को “माँ” कहने के लिए किसी भी हालत में नहीं तैयार, लेकिन गांधी को “बापू” और “पिता” शान से बुलाते हैं. आखिर कौन हैं वो ?

15 करोड़ हिन्दुओ को कत्ल कर देने की खुली धमकी देने वाले भारत की शांति , एकता और अखंडता के दुश्मन ओवैसी जैसे लोगों को आप ने खुल कर कहते सुना होता कि उनकी गर्दन पर चाकू रख देने के बाद भी वो वन्देमातरम और भारत माता की जय नहीं बोलेंगे . इतना ही नहीं , उनकी नकल हजारों ने भी और वो भी उनके समर्थक बन कर उनकी हां में हाँ मिलाने लगे थे. आगे चल कर इस बेसुरे सुर में कई अन्य में भी ताल में ताल मिला दी . ओवैसी को व्यापक समर्थन तब मिलता दिखा जब कई मजहबी उलेमा आदि ओवैसी के साथ खड़े होते दिखने लगे और वो सब के सब इसको अपने मज़हबी कायदे कानूनों से जोड़ कर अपने अपने हिसाब से इसकी व्याख्या करने लगे . कुछ ने इसको हराम तक घोषित कर दिया .. जबकि ये वो नारा था जिस को लगाते हुए भारत के कई वीरों ने ब्रिटिश सत्ता से जंग लड़ी और अपने प्राणों को गंवा दिया था .

लेकिन इसके बाद भी कुछ का दावा है कि आज़ादी की जंग में उनसे बड़ा योगदान किसी और का नहीं है . यद्दपि वो ये प्रमाण नहीं दे पाते कि लुटेरे , हत्यारे और आक्रान्ता मुगलों से लड़ी गयी उस जंग में उनका कितना योगदान है जिसको महाराणा प्रताप और छत्रपति शिवाजी ने बेहद विषम हालत मे लड़ी थी . आज़ादी की लड़ाई यद्दपि भारत हजार वर्षो से लड़ता आया है लेकिन मात्र उसको 150 वर्षो तक समेट देने की सोच कहाँ से और किस ने पैदा की ये मंथन का विषय जरूर हो सकता है . फिलहाल इन सबमे तमाम मजहबी नियम और कायदों के लागू होने के बाद एक चीज अलग देखने को मिली है .

ध्यान देने योग्य ये है कि उन तमाम लोगों जिनके मुह से भारत माता की जय और वन्देमातरम हराम घोषित हो चुका है , उनकी वाल , उनकी सोशल प्रोफाइल और उनकी जुबान पर गांधी को “बापू” या राष्ट्र “पिता” जैसे शब्द अक्सर आ जाया करते हैं . हैरानी की बात ये है कि भारत को माँ मानने से तमाम मजहबी और इंकार करने वालों ने गांधी को स्वेच्छा से और पूरे जोर शोर से “बापू” और “पिता” जैसे शब्द लगा कर सम्बोधित किया है . आज नाथूराम गोडसे की खबर को सुदर्शन न्यूज के वेब पोर्टल पर डालने के बाद नीचे कमेन्ट में एक वर्ग विशेष के लोगों के गांधी के साथ जोड़े गये बापू और पिता जैसे विशेषण सुखद अनुभूति करवाने वाले रहे लेकिन सवाल ये है कि गांधी को बापू और पिता मान लेने वालों को भारत को माँ कहने में क्या आपत्ति है ?

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