रुहुल अमीन को मस्जिद में घुसता देख कर गूंजने लगे मारो मारो के नारे.. नारे लगाने वाले भी मुसलमान थे और रुहुल अमीन भी.. पर ऐसा क्यों ?

वो एक मुसलमान था, वो कोशिश करता था कि उस से कोई भूल चूक न हो जाए इस्लामिक कानूनों को निभाने में . वो इस्लाम मजहब और राजनीति का आपस में कोई भी रिश्ता नहीं रखता था. उसके हिसाब से इस्लाम उसका व्यक्तिगत जीवन था और राजनीति उसका सामाजिक स्वरूप . लेकिन उसको पता ही नहीं था कि उसको जहाँ हिन्दू समाज दिल खोल का स्वीकार करेगा तो वहीँ उसके ही समाज के लोग उसको मारने के लिए दौड़ पड़ेंगे .. लेकिन ऐसा हो गया उस दिन .

यहाँ मामला है पश्चिम बंगाल का जहाँ ममता बनर्जी शासन कर रही हैं.. ममता बनर्जी के शासन में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओ की एक एक कर के हत्या आम बात हो चली है.. इसके अलावा वो प्रदेश बंगलादेशी घुसपैठ से किस प्रकार से प्रभावित है ये किसी से छिपा नहीं है.. ममता बनर्जी के शासन में संवैधानिक ढाँचे की बात अगर की जाए तो CBI को गिरफ्तार करने के लिए स्थानीय पुलिस को आदेश दे दिया जाता है और बाद में उन्ही पुलिस वालों के समर्थन में मुख्यमंत्री तक धरने पर बैठ जातीं है..

उन्ही सेक्युलर ममता बनर्जी के शासन की है ये घटना जहाँ एक मुस्लिम को मस्जिद में उसी के मजहब के कई लोगों ने इसलिए नहीं घुसने दिया क्योकि वो भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता था.. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि अमीन को लाठी डंडों से मारने की धमकी भी दी गई. बीजेपी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टीएमसी पर निशाना साधा जिसमें रुहुल अमिन भी मौजूद था। ये घटना पश्चिम बंगाल के कूच विहार इलाके की है .. बीजेपी जिलाध्यक्ष मालती राभा ने कहा तृणमूल सांप्रदायिक राजनीती में विश्वास रखती है जिसका सबूत आज साफ़ हो गया..


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