2 दिन पहले हरदोई में बच्ची को कार से रौंदता चला गया था फैजान.. लेकिन नेताओं का शोर फैजान के खिलाफ क्यों नहीं ?

क्या न्याय के भी 2 रूप होते हैं ? या पार्टी और मत मजहब देख कर ही जागृत होता है कुछ लोगों का न्याय .. जो चीज सामने प्रत्यक्ष हो उसको अनदेखा कर के जिसमे संदेह हो उसको सत्य बताने की रीत भले ही जोर शोर से चलाई जा रही हो लेकिन निश्चित तौर पर आज का जागरूक समाज सब कुछ शांति से देखता और समझता है.. वो अंत में वही करता है जो सही होता है .. न्याय पाने का अधिकारी निश्चित रूप से हर कोई समान रूप से है लेकिन जब न्याय पार्टी या जाति मजहब देख कर माँगा जाय तो मांगने वाले की मंशा पर सवाल उठते हैं .

अचानक ही उत्तर प्रदेश में नेताओं का जमावड़ा लग गया है .. प्रियंका गांधी भी सक्रिय हो उठी हैं और यहाँ तक कि अपने खुद के दिल्ली में कई मामलो में खामोश रहने वाली स्वाति मालीवाल भी.. सब के सब लखनऊ की तरफ कूच कर दिए हैं एक ऐसे मामले में जिसमे असल सच अभी परदे के पीछे है . विधायक कुलदीप सेंगर पर आरोप लगाने वाली लड़की का एक्सीडेंट होता है.. वो ट्रक किसका है और किस की गलती से हुआ ये सब अभी कुछ भी सामने नहीं आया है और पुलिस तेजी से जांच कर रही है .

लेकिन उस से पहले ही कई नेता और मीडिया के कुछ वर्ग खुद को जज की भूमिका में प्रस्तुत कर देते हैं और पुलिस को लापरवाह बताने के साथ साथ चरणबद्ध ढंग से योगी आदित्यनाथ पर सवाल उठाना शुरू कर देते हैं.. पुलिस अधिकारी हर प्रकार की जांच के लिए खुद को तैयार होने की घोषणा कर देते हैं लेकिन उसके बाद भी पीड़ित के परिवार से भी ज्यादा शोर नेताओ द्वारा मचाया जाता है . हर जांच से पहले नेताओं की जुबानी जांच में इसको एक साजिश घोषित कर दिया जाता है .

निश्चित तौर पर उन्नाव की पीडिता को संतुलित न्याय मिलना चाहिए लेकिन हैरानी तब हुई जब मात्र 2 दिन पहले लखनऊ से मात्र थोड़ी ही दूरी पर हरदोई में एक कार चालक जिसका नाम फैजान था , वो ब्रिटेन और फ्रांस के अंदाज़ में स्कूल से लौट रही बच्चियों को रौंद देता है .. CCTV से निकली फुटेज में साफ दिखाई देता है कि जैसे उसने बाकायदा मंशा जताई हो इस कृत्य की .. इस खबर को सुदर्शन न्यूज ने प्रमुखता से दिखाया लेकिन उस पर आज बोल रहे किसी नेता या अभिनेता ने एक बार भी ये नही पुछा कि फैजान ने ऐसा क्यों किया .

मासूम बच्चियों और महिलाओं के प्रति बढे अपराध के जिम्मेदार दरिन्दे हैं उतने ही जिम्मेदार उन दरिंदो के पक्षधर भी जो किसी दूसरे मामले के बहाने किसी दूसरे मामले को दबाने की मंशा रखते हैं .यहाँ उन नेताओं के भी अजीब रूप देखने को मिले जो खुद को जमीन से जुड़ा जरूर बताते हैं , जो खुद को गरीब किसान मजदूर का प्रतिनिधित्व करने वाला बताते है लेकिन उनकी आवाज केवल हाईप्रोफाइल मामलो में ही खुला करती है . हरदोई में फैज़ान के कृत्य का वीडियो नीचे देखिये और सोचिये कि इस पर क्यों छाई रही ख़ामोशी ? क्या ये एक्सीडेंट नहीं था ? या इसमें उन्हें नहीं दिखी न्याय की जरूरत ? –

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