शायद दिल्ली छोड़ कर पूरे भारत के मामले में संज्ञान लेती हैं दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल जी ?..अगर नहीं तो आप पार्टी के गालीबाज नेता सोमनाथ पर मौन क्यों ?

इनकी सिंहनी जैसी दहाड़ सबने उत्तर प्रदेश के उन्नाव मामले में देखी थी.. तब योगी आदित्यनाथ से ले कर केंद्र सरकार तक कोई नही बचा था शायद जिसको इन्होंने नैतिकता, मानवता, नारी सम्मान आदि की दुहाई पर झकझोरा नरहा हो .. उसके बाद इनके पराक्रम के दर्शन हुए थे कठुआ मामले में जो जम्मू कश्मीर प्रदेश में आता है .. यद्द्पि वो मामला तब भी संदिग्ध था और अब भी सन्देह में है लेकिन संदिग्ध मामले को भी पूरे विश्वास से उठा कर इन्होंने दुनिया को वो स्वरूप दिखाया था कि अब भारत मे कोई ऐसी महिला नही जो इनके रहते असुरक्षित महसूस करेगी .. इस बीच इन्होंने राजस्थान, बिहार आदि की घटनाओं का स्वतः संज्ञान लिया तो पूरे भारत भर की पीड़ित महिलाएं इनकी तरफ आशा की नजर से देखने लगीं ..

ये चर्चा चल रही है दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्षा स्वाति मालीवाल जी की ..लेकिन बीच मे कुछ ऐसा हुआ कि पूरे भारत के मामलों का स्वतः संज्ञान लेने वाली स्वाति मालीवाल जी उनके मुख्य अधिकार क्षेत्र में आने वाले दिल्ली की घटनाओं पर शांत दिखने लगीं ..न सिर्फ शांत बल्कि उन मामलों से किनारा भी करती दिखीं .. फिर सवाल खड़े होने लगे कि अध्यक्षा जी क्या दिल्ली की महिलाओं का कोई मान सम्मान या स्वाभिमान आपकी दृष्टि में है ?  या आम आदमी के नेताओं, मंत्रियों द्वारा प्रताड़ित होने के बाद कोई ऐसी खास वजह है जो आप उस पर मौन धारण कर लेती हैं ? महिला आयोग का  पद जाति, धर्म, मत, मज़हब, राजनीति, कूटनीति आदि से कहीं परे होता है पर सिर्फ एक पार्टी के शासित प्रदेशों में तेजी दिखाना व अपने अधिकार क्षेत्र में खामोश रहना कहीं न कहीं मीडिया व जनता को सवाल करने पर मजबूर कर देता है ..

ये पहला उदाहरण नही है ..  दिल्ली में वोटबैंक की उपजाऊ फसल बन गए अवैध बंगलदेशियो द्वारा पातीराम की पत्नी विधवा व उसकी बेटी अनाथ कर दी जाती हैं लेकिन एक शब्द नही बोला जाता है दिल्ली के ही महिला आयोग द्वारा .. इसके बाद जहांगीरपुरी की महिलाएं सुदर्शन न्यूज के कैमरे पर हिम्मत कर के आती हैं और अवैध रोहिंग्या द्वारा अपने व अपनी बेटियों बहनों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाती हैं ..पर अन्य प्रदेशों के मामलों पर पूरी नजर गड़ाए मालीवाल जी को समय नही मिलता इन मुद्दों पर संज्ञान लेने का ..इसके बाद करोल बाग में एक अबोध बच्ची के साथ उसको ही स्कूल ले जाने वाला टैक्सी ड्राइवर बलात्कार करता है लेकिन मामला फिर से वर्ग विशेष से जुड़ा होने के नाते एक लंबी खामोशी छाई रहती है ..दिल्ली के ब्रह्मपुरी से महिलाएं पलायन की स्थिति में आ जाती हैं , श्रीनिवासपुरी से एक महिला अपनी जान की गुहार लाइव कैमरे से लगाती है लेकिन ये सभी मामले एक वर्ग के खिलाफ एक वर्ग विशेष से जुड़े होते हैं इसलिए शायद अध्यक्षा जी इसको अनसुना कर देती हैं ..

अब नया मामला आम आदमी पार्टी के एक गालीबाज नेता का है जो आम आदमी पार्टी में नम्बर 2 या 3 की हस्ती रखता है .. ये जब चाहे महिलाओं के घरों में खुद से ही छापा मार देते हैं, जब चाहे अपनी पत्नी से क्रूरता दिखा दें और अब तो खुलेआम टी वी डिबेट में सुदर्शन न्यूज की महिला एंकर को ऐसी भद्दी बात बोल रहे जो शायद आम आदमी पार्टी की सभाओं के अलावा और कहीं नही बोली या सुनी जा सकती हैं ..पर हैरानी ये है कि इसको दिल्ली का महिला आयोग भी सुन रहा है और बेहद खामोशी से इसको देख भी रहा .. महिलाओं के अपमान की बुनियाद पर खड़ी आम आदमी पार्टी से भले ही किसी को कोई आशा न हो पर महिलाओं के ही नाम पर बने आयोग द्वारा महिलाओं की ऐसी उपेक्षा से सवाल तो खड़ा होता ही है कि वो कौन सी मजबूरी है अध्यक्षा महोदया जी की कि वो आप पार्टी या वर्ग विशेष से जुड़े मामले आते ही खामोश हो जाती हैं ?  उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार , जम्मू कश्मीर के मुद्दों को स्वतः संज्ञान लेने वाली मालीवाल जी के अधिकार क्षेत्र दिल्ली की महिलाएं जानना चाहती हैं कि “चिराग तले ये अंधेरा क्यों ” …

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