चमकी बुखार को काबू करना काश योगी आदित्यनाथ से सीखे होते नीतीश कुमार.. तभी यूपी रहा बेअसर

बिहार में चमकी बुखार(एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम यानी एईएस) के कारण 100 से ज्यादा मासूम बच्चे काल के मुंह में   समा चुके हैं, जिसे लेकर पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है. बिहार में सैकड़ों माँ-बाप की चीखें तथा उनका करुण क्रंदन किसी को भी झकझोरने के लिए काफी है. चमकी बुखार से निपटने में बिहार सरकार की लापरवाही तथा लेटलतीफी के के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तथा पूरी बिहार सरकार की जमकर आलोचना की जा रही है.

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लेकिन हम यहाँ बात कर रहे हैं बिहार से सटे उत्तरप्रदेश की जहाँ चमकी बुखार पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया है. जिस तरह से बिहार से सटे उत्तर प्रदेश के जिलों में चमकी बुखार बेअसर रहा है, उससे लोग नीतीश कुमार को नसीहत दे रहे हैं कि अगर उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीख ली होती तो बिहार के सैकड़ों मासूमों को इस तरह बेमौत नहीं मरना पड़ता, सैकड़ों माओं की गोद सूनी नहीं होती.

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चमकी बुखार पर जिस तरह से यूपी सरकार ने काबू पाया है, उसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पशेंट ऑडिट फार्मूला’ को रामबाण माना जा रहा है. बताया गया है कि गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में यूपी, बिहार और नेपाल से आने वाले इंसेफेलाइटिस प्रभावित बच्‍चों के लिए सीएम योगी आदित्‍यनाथ के ‘पशेंट ऑडिट फार्मूला’ एक वरदान साबित हुआ है. साल 2018 से यूपी के सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने पेशेंट ऑडिट फार्मूला और पेशंट केयर फार्मूला लागू किया था। इस फार्मूले से यहां भर्ती होने वाले मरीजों और मौतों का आंकड़ा काफी कम हो गया है.

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गोरखपुर बीआरडी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि इस फार्मूले से यहां भर्ती होने वाले मरीजों और मौतों का आंकड़ों में काफी कमी आई है. डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि जापानी इंसेफेलाइटिस के टीकाकरण के कारण इसके मरीजों की संख्‍या में काफी कमी आई है क्‍योंकि इसका मुख्य कारण शहर से लेकर गांव तक जनता के बीच जाकर जागरूकता अभियान के जरिए इस गंभीर बीमारी से बचाव की जानकारी दी गई.

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बीआरडी मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल कहते हैं कि सीएम योगी आदित्‍यनाथ यहां के सांसद रहे हैं, वे भली-भांति यहां से परिचित रहे हैं. उन्‍होंने काफी काम किया है. गांव-गांव में शौचालय बनने और दस्‍तक अभियान की अहम भूमिका है, इससे लोगों को जागरूकता आई है. इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारी दो साल में यूपी में घटकर आधी और गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज में महज सात फीसदी रह गई है. योगी सरकार के निर्देश पर दस्‍तक अभियान की शुरुआत अप्रैल माह शुरू होते ही कर दी गई. वहीं जिलाधिकारी के साथ विभिन्‍न विभागों के अधिकारी भी इंसेफेलाइटिस की रोकथाम के लिए रैलियां निकाली गई.

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योगी सरकार की सक्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ऐसा पहली बार हुआ जब इंसेफेलाइटिस के बुखार पर वार के लिए स्‍लोगन के साथ स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के साथ पांच अन्‍य विभागों की टीम भी एकजुट थी. चिकित्‍सा शिक्षा, महिला कल्‍याण, बाल विकास, पंचायती राज और नगर निगम की टीमों ने मिलकर लगातार पेयजल, स्‍वच्‍छता, टीकाकारण और जागरूकता के ऐसे कार्यक्रम चलाए, जिसका असर अस्‍पताल से लेकर गांवों तक महसूस होने लगा.

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सीएम योगी आदित्यनाथ की सकारात्‍मक सोच का नतीजा ये रहा कि चार दशक से पूर्वांचल में अपना पांव पसारी इस बीमारी में उनके फार्मूले ने चमत्कार करने का काम किया. जिस तरह से उत्तर प्रदेश चमकी बुखार से बेअसर रहा है, उससे लोग बार बार नीतीश कुमार को नसीहत दे रहे हैं कि अभी भी वो योगी सरकार से सलाह मशविरा करें तो शायद इस बीमारी पर काबू पाया जा सकता है तथा मासूमों जी जान बच सकती है.

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भले ही योगी सरकार की ये पहल भले ही अभी पूरी तरह कामयाब न हो लेकिन काफी ज्यादा हद तक सफल हो रही है. इससे न सिर्फ मरीजों की संख्या में कमी आ रही है बल्कि मरीजों की मौतों का आंकड़ा भी काफी ज्यादा कम हो गया है, या न के बराबर है. इसीलिये लोग कह रहे हैं कि अगर बिहार सरकार भी कुछ इसी तर्ज पर काम शुरू करती तो कम से कम सरकार की लापरवाही पर सवाल नहीं खड़े होते, तथा शायद इतनी बड़ी त्रासदी नहीं होती.

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