जिस JNU में कभी लगे थे “भारत तेरे टुकड़े होंगे” के नारे, अब उसी JNU में पढ़ाये जायेंगे “वीर सावरकर जी”.. सरकार के इस कदम की हर तरफ मुक्त कंठ से प्रशंसा


वो 9 फरवरी 2016 का दिन था जब देश की राजधानी दिल्ली में स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय JNU सुर्ख़ियों में आ गया. JNU में “भारत तेरे टुकड़े होंगे इंशाअल्लाह इंशाअल्लाह” , “भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जारी” , “अफजल हम शर्मिन्दा हैं तेरे कातिल ज़िंदा हैं” , “हम लेके रहेंगे आज़ादी, कश्मीर की आजादी” जैसे नारे लगाये गये. JNU में देशविरोधी नारों को सुनकर पूरा देश आक्रोश से भड़क उठा तथा देशभर में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किये गये लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर देश के कथित सेक्यूलर नेताओं, बुद्धिजीवियों आदि ने इस घटना का विरोध नहीं किया बल्कि इस सबके जिम्मेदार लोगों के साथ खड़े हो गये.

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आज इस घटना को तीन साल हो चुके हैं तथा अब JNU बदला हुआ नजर आ रहा है. अब JNU में भारतमाता की जय तथा वन्देमातरम गूंजता हुआ सुनाई देता है. इस बीच जानकारी मिली है कि जिस JNU में कभी देश विरोधी नारे लगाये गये थे, उस JNU में अब जल्द ही वीर सावरकर को भी पढ़ाया जाएगा. हिंदुत्व विचारक और स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर के बारे में जेएनयू में पढ़ाया जाना अपने आप में एक बड़ा बदलाव है. दरअसल, स्वातंत्र्यवीर सावरकर अध्यासन केंद्र द्वारा जेएनयू से एक सेंटर बनाने की बात की जा रही है, जहां विद्यार्थी सावरकर के विभिन्न विषयों से संबंधित विचारों का अध्ययन कर सकें. इसमें सावरकर के हिंदुत्व, राजनीति और सामाजिक दायित्वों से संबंधित विचार मुख्य हैं.

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बता दें कि, इस सेंटर के निर्माण के लिए पूरी रूपरेखा के साथ प्रस्ताव भेजा जा चुका है और यह अब बातचीत के अंतिम दौर में है तथा लगभग इस पर मोहर लग चुकी है. सावरकर स्मारक के अध्यक्ष रणजीत सावरकर ने कहा कि, पुरानी पीढ़ी सावरकर के बारे में जानती हैं लेकिन नई पीढ़ी को नहीं पता कि सावरकर कौन हैं. उन्होंने कहा कि, यह प्रस्ताव इसीलिए भेजा गया है ताकि नई पीढ़ी जान सकें कि आखिर सावरकर कौन थे और उनके राजनीतिक विचार और समाज के लिए योगदान क्या थे. रणजीत सावरकर ने यह भी कहा कि, इस सेंटर से स्टूडेंट सावरकर पर एमफिल, सेट, नेट और पीएचडी भी कर सकेंगे.

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उन्होंने बताया कि 14 मार्च को जेएनयू में सावरकर के जीवन पर आधारित एक हिंदी ड्रामा मृत्युंजय का मंचन हुआ था जिस पर वहां के स्टूडेंट्स की काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं थीं, उसके बाद से ही अध्यासन केंद्र ने जेएनयू के विद्यार्थियों को सावरकर के विचारों से रूबरू करने की ठान ली थी. वीर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन के अग्रिम पंक्ति के स्वतंत्रता सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे. हिन्दू राष्ट्र की विचारधारा को विकसित करने का बहुत बडा श्रेय सावरकर को जाता है.

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वीर सावरकर एक महान क्रान्तिकारी होने के साथ ही एक चिन्तक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, वकील, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे. वे एक ऐसे इतिहासकार भी थे जिन्होंने हिन्दू राष्ट्र की विजय के इतिहास को प्रामाणिक ढँग से लिपिबद्ध किया है. उनके राजनीतिक दर्शन में उपयोगितावाद, तर्कवाद और सकारात्मकवाद, मानवतावाद, सार्वभौमिकता, व्यावहारिकता और यथार्थवाद के तत्व थे. वीर सावरकर को पढ़कर जेएनयू के विद्यार्थी निश्चित ही हमारी संस्कृति की जड़ों में वापस लौट सकेंगे.

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