क्या अम्बेडकर चाहते थे दलितों और मुसलमानों में एकता ? योगी आदित्यनाथ ने किया बड़ा खुलासा

पिछले कुछ समय से देश में मोदी लहर की धार को कुंड करने के लिए, बीजेपी के विजय रथ को रोकने के लिए दलित-मुस्लिम एकता का नया शिगूफा छेड़ा गया है. बीजेपी तथा पीएम मोदी के बढ़ते प्रभाव के कारण हाशिये पर आये कथित सेक्यूलर विपक्षियों द्वारा दलित-मुस्लिम एकता की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही हैं, जय भीम-जय मीम का नारा दिया जा रहा है. जय भीम-जय मीम के नारे के माध्यम से भीमराव रामजी आंबेडकर का मुस्लिमों के साथ कनेक्शन जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

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लेकिन क्या सच में आंबेडकर दलित-मुस्लिम एकता के हितैषी थे? क्या आंबेडकर दलित-मुस्लिम एकता की बातें करते थे? इन सभी सवालों को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के फायरब्रांड हिंदूवादी नेता योगी आदित्यनाथ ने बड़ा खुलासा किया है. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर दलित-मुस्लिम एकता के सख्त विरोधी थे. डॉ. आंबेडकर ने पाकिस्तान बनाने समेत मुस्लिम लीग के हर प्रस्ताव का विरोध किया था.

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यूपी की मुख्यमंत्री रही बसपा प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए योगी ने कहा कि जिस सपा सरकार ने सहारनपुर मेडिकल कॉलेज का नाम कांशीराम से बदलकर एक मुस्लिम के नाम पर किया, उसी के साथ सहारनपुर में मंच साझा किया. बसपा संस्थापक कांशीराम का इससे ज्यादा अपमान नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि काशीराम का अपमान करने वाली सपा के साथ आज मायावती ने हाथ मिला लिया   है.

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