Breaking News:

“संघ के सेवा भाव को समझना है तो हेडगेवार जी को पढ़ें” – श्री मोहन भागवत जी “भविष्य भारत का” कार्यक्रम में

खबर शुरू करने से पहले थोडा इतिहास जान लीजिये ..  साल 1934 से वामपंथी पार्टी ने ‘गांधी बायकॉट कमेटी’ बनाकर महात्मा गाँधी के ख़िलाफ़ एक अभियान चलाया. इसके बाद इसे एक राजनीतिक मोर्चे ‘लीग अगेंस्ट गांधीज़्म’ में बदल दिया गया. वामपंथियों ने महात्मा गांधी पर अंग्रेज़ों के प्रति नरम रुख़ अपनाने का आरोप लगाया. इसके साथ ही गांधी पर ये आरोप लगाया गया कि उन्होंने कामगार और कृषक वर्ग के हितों के साथ समझौता किया और साम्राज्यवादियों के ख़िलाफ़ आंदोलन चलाने में धर्म का इस्तेमाल किया. लेकिन आरएसएस के संस्थापक डॉक्टर के. बी. हेडगेवार जी मानते थे कि हिंदुओं को जाति और दूसरी पहचानों से ऊपर उठकर हिंदू के रूप में एकजुट होना पड़ेगा.

जाति, भाषा और क्षेत्रीय पहचान को चुनौती दिए बिना इनकी जगह ‘हिंदू पहचान’ को महत्व देने का फ़ैसला रणनीतिक रूप से आरएसएस की गतिविधियों में शामिल किया गया. ऐसी रोजाना की गतिविधियों को ही शाखा कहा गया. आज देश में आरएसएस की 50 हज़ार से अधिक दैनिक सभाएं (शाखा) होती हैं. इसके साथ ही अन्य सामूहिक बैठकों के अलावा 30 हज़ार साप्ताहिक बैठकें होती हैं. इन बैठकों में लगभग दस लाख लोग शामिल होते हैं. ये लोग एक समान विचारों के साथ आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए काम करते हैं. इन सबके अलावा आरएसएस ने उन हज़ारों नागरिकों को प्रेरित किया है जिन्होंने ग्रामीण, आदिवासी, विज्ञान और तकनीक से लेकर लगभग हर क्षेत्र में ग़ैर-सरकारी संगठन खड़े किए हैं. इन्होंने उस दृढ़ विश्वास को अपने साथ रखा है कि समाज की हर समस्या का समाधान मौजूद है और प्रत्येक व्यक्ति के पास कुछ न कुछ समाधान है.

दिल्ली में एक महत्वपूर्ण व्याख्यान में आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख श्री मोहन भागवत जी ने कहा है कि अगर ठीक से किसी को राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ को समझना है तो बेहतर होगा कि वो इसके संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार को समझे . वन्दनीय हेडगेवार जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि डॉक्टर हेडगेवार ने चिकित्सा की पढ़ाई करने के बाद अपना जीवन देश को समर्पित कर दिया. इसके साथ ही वो कांग्रेस से जुड़े गए और जल्द ही विदर्भ प्रदेश के प्रमुख कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उनका नाम शामिल हो गया. नागपुर में कांग्रेस के कार्यक्रमों के तहत लोगों को आजादी के आंदोलन से जोड़ने के लिए उन्होंने जो भाषण दिए, उसके चलते उन पर नागपुर के कोर्ट में अभियोग चला. उन्होंने राजधानी के विज्ञान भवन में ‘भविष्य का भारत: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दृष्टिकोण’ नाम से आयोजित व्याख्यान श्रृंखला के पहले दिन ये बात कही.

मोहन भागवत ने बताया, ‘डॉक्टर हेडगेवार ने जज से कहा कि किस कानून के तहत अंग्रेजों को भारत पर राज करने का अधिकार मिलता है. वो कानून बताओ. ऐसा कोई कानून है ही नहीं. इसलिए मैं आपके शासन को नहीं मानता. अगर ये राज द्रोह है और अंग्रेजों का शासन क्या है?’ इस पर जज ने उन्हें एक साल की सजा देते हुए कहा कि जिस भाषण के बचाव में उन्होंने अपना भाषण दिया, वो भाषण और ज्यादा भड़काऊ है. जेल से छूटने के बाद उनका जगह जगह स्वागत समारोह हुआ और एक कार्यक्रम की अध्यक्ष खुद मोती लाल नेहरू ने की. मोहन भागवत ने बताया कि डॉक्टर हेडगेवार मानते थे कि यदि किसी की विचारधारा अलग है, लेकिन वह प्रमाणिक है, देश के कल्याण की भावना से काम कर रहा है, तो उससे कोई विरोध नहीं. सभी विचारधाराओं के लोग उनके अच्छे मित्र थे. नागपुर के बैरिस्टर रुइकर कम्युनिस्ट थे, लेकिन हेडगेवार के अच्छे दोस्त थे. हेडगेवार उनसे मजाक में कहते थे, ‘यू आर ए रिच लिबरल एंड आईएम ए पुअर कैपटलिस्ट.’ इस कार्यक्रम में फिल्म जगत की कई हस्तियां शामिल हुईं, जिनमें मनीषा कोईराला, रवि किशन, अन्नू कपूर और गजेंद्र चौहान शामिल हैं.

श्री भागवत जी ने अपने भाषण की शुरुआत में साफ़ साफ़ शब्दों में कहा कि उनका उद्देश्य किसी को अपने शब्दों से खुश करना या संतुष्ट करना नहीं है, लेकिन आपके प्रश्नों का उत्तर अपनी जानकारी के आधार पर दूंगा. पिछले कई वर्षों में आरएसएस की तरफ से दिल्ली में इस तरह का ये सबसे बड़ा आयोजन है, जहां समाज के विभिन्न क्षेत्रों में असर रखने वाले लोगों के बीच प्रमुख मुद्दों पर मोहन भागवत अपने विचार रख रहे हैं. ये व्याख्यान 18 और 19 सितंबर को भी शाम साढ़े पांच बजे से होंगे. मोहन भागवत आखिरी दिन लोगों के सवालों के जवाब देंगे. इस तरह संघ की पूरी कोशिश है कि वो समाज के सभी लोगों तक अपनी बात पहुंचाए. इस कार्यक्रम को कवर कर रहे सुदर्शन न्यूज संवाददाता श्री गौरव मिश्रा जी ने आम जनता तक सबसे तेज , सटीक तथ्य पहुचाएं ..

Share This Post