जुमे की नमाज के वक्त हुआ तीन तलाक बिल का विरोध.. कश्मीर में नहीं UP में


तम्मा जद्दोजहद तथा विपक्ष के तगड़े विरोध के बाद भी आखिरकार 30 जुलाई को मोदी सरकार इस्लामिक कुरीति तीन तलाक के खिलाफ बिल को राज्यसभा से पास कराने में कामयाब हो गई. तीन तलाक बिल का जहाँ देश के ज्यादातर लोग समर्थन कर रहे हैं तो इस्लामिक कट्टरपंथी अभी भी इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं. राज्यसभा से पास होने के बाद तीन तलाक बिल को राष्ट्रपति ने भी मंजूरी दे दी हियो लेकिन कल शुक्रवार को जुमे की नमाज से पहले तीन तलाक बिल के विरोध का सरेआम एलान किया. ये विरोध कश्मीर या बंगाल नहीं बल्कि UP में हुआ.

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मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर का है जहाँ  जुमे की नमाज से पहले शहर की कई मस्जिदों में तीन तलाक बिल के खिलाफ तकरीरें कीं गईं. जुम्मे की नमाज से पहले शहर की आइम्मा मसाजिद ने कहा की तीन तलाक बिल शरीयत के पूरी तरह खिलाफ हैं. मुसलमानों को चाहिए कि वह दीन की हिफाजत के लिए शादी ब्याह और विरासत के मामले शरई पंचायतों में आपसी रजामंदी से हल कराएं. इसके अलावा नई मस्जिद बाबू पुरवा में शहर काजी मौलाना रियाज अहमद हशमती और मौलाना तनवीर बिलाल ने कहा कि तीन तलाक बिल शरीयत के खिलाफ है.

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शहर काजी मौलाना रियाज अहमद हशमती और मौलाना तनवीर बिलाल ने कहा कि मुसलमान सब कुछ कर सकता है लेकिन शरीयत की खिलाफवर्जी नहीं कर सकता. गद्दियांना ईदगाह के इमाम मौलाना हाशिम अशरफी ने कहा कि बिल शरीयत में दखल अंदाजी है. मुसलमानों को चाहिए कि वह अपने मामलों का हल खुद करें जिस तरह से लोग जमीन की खरीद-फरोख्त में या ऐसे ही मामलों में बड़ों से सलाह मशवरा करते हैं, उसी तरह पति पत्नी के बीच ताल्लुकात खराब हो जाने पर उलमा या मस्जिदों के  इमामों से राब्ता करें.

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मौलाना हाशिम अशरफी ने कहा कि मुसलमान अपने दीन को महफूज रखें, ये उनकी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि तीन तलाक बिल शरीयत के खिलाफ है, शरीयत में दखलंदाजी है. सईदाबाद  मस्जिद, हीरामन पुरवा मस्जिद और तलाक महल मस्जिद में भी तकरीरे की गई. सभी मस्जिदों में बिल के खिलाफ दुआएं मांगी गई. मुसलमानों को सलाह दी गई कि वह विरोध में कोई ऐसा काम न करें जिससे परेशानी हो. उलमा इस मामले में संजीदगी से गौर कर रहे हैं.

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