दक्षिण में एक पार्टी ने खुलकर दिखाई भगवा से दुश्मनी… बोली- “नहीं होने देंगे भगवाकरण”

सनातनी सभ्यता, सनातनी संस्कृति की पहिचान भगवा को आतंक बता चुकी भारत की तथाकथित सेक्यूलर राजनीति ने एक बार पुनः भगवा को चुनौती दी है. इस बार भगवा को ये चुनौती मिली है दक्षिण भारत से, जहाँ के एक प्रमुख राजनैतिक दल ने हिंदुस्तान का भगवाकरण न होने देने का संकल्प लिया है. हम बात कर रहे है दक्षिण भारत के एक प्रमुख राजनैतिक दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम अर्थात द्रमुक की. तामिलनाडू के पूर्व मुख्यमंत्री करूणानिधि के पुत्र तथा द्रमुक के राष्ट्रीय अध्यक्ष एमके स्टालिन ने कहा है कि वह किसी भी सूरत में हिंदुस्तान का भगवाकरण नहीं होने देंगे.

द्रमुक ने मोदी सरकार पर शनिवार को हमला करते हुए उस पर ”चुनावी तानाशाही” करने का आरोप लगाया और साथ ही भाजपा के ”भगवाकरण के सपनों” को शिकस्त देने का प्रण किया. पार्टी के अध्यक्ष एम के स्टालिन के नेतृत्व में जिला सचिवों, सांसदों और विधायकों की बैठक में कहा गया कि पार्टी संवैधानिक मूल्यों का बरकरार रखने के लिए कोई भी कीमत चुकाने के लिए तैयार है. स्टालिन ने कहा कि केंद्र सरकार देश का भगवाकरण करने का प्रयास कर rhई है लेकिन उनका संकल्प है कि वह किसी भी हालात में देश का भगवाकरण नहीं होने देंगे तथा भाजपा के भगवाकरण के सपने शिकस्त देंगे. स्टालिन को 28 अगस्त को पार्टी प्रमुख बनाए जाने के बाद हुई इस पहली बैठक में नोटबंदी, राफेल सौदे, नीट और मौजूदा आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दे पर केन्द्र की आलोचना की गई.

द्रमुक की बैठक में पारित प्रस्ताव में कहा गया, ”भाजपा सरकार तमिलनाडु के हितों की अनदेखी कर रही है, बहुसंख्यकों को प्रभावित और सांप्रदायिकता को बढ़ावा दे रही है, यहां तक कि मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और भाजपा का विरोध करने वालों को राष्ट्र विरोधी करार दिया जा रहा है.” वी रिजेक्ट बीजेपीज सैफ्रोनाइजेशन ड्री्म्स’ शीर्षक वाले इस प्रस्ताव में कहा गया है कि भाजपा सरकार की आलोचना करने वाली मीडिया को डराया जा रहा है वहीं दलितों और अल्पसंख्यकों को कई स्थानों पर निशाना बनाया जा रहा है. इस दौरान राज्य में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक की भी आलोचना की गईं. द्रमुक ने आरोप लगाया कि अन्नाद्रमुक भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गई है और उसे सत्ता से बेदखल करने का प्रण लिया गया.

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