दादरी के अखलाक को उसी गाँव वालों ने बसाया था और दी थी अपनी जमीन… दादरी बिसाहड़ा गाँव वालों के और भी खुलासे

उत्तर प्रदेश के नोएडा के दादरी का बिसाहड़ा गाँव 2015 में उस समय सुर्ख़ियों में आया था जब गौहत्यारे मोहम्मद अखलाख का गाँव के कुछ लोगों ने वध कर दिया था. 28 सितंबर 2015 को ये वारदात हुई थी तथा इस घटना के बाद देशभर में भूचाल आ गया था. अब अखलाख के बारे में गाँववालों ने जो जानकारी दी है वो काफी हैरतअंगेज है. गांववालों का कहना है कि अखलाख जिहादी तथा अगर उसे राम राम करता था तो वह जवाब तक तक नहीं देता था. गांववालों का ये भी कहना है कि उन्हें अखलाख के साथ हुई घटना पर कोई पछतावा नहीं है क्योंकि अखलाख पाकिस्तान गया था तथा जब वह वापस लौटकर आया तो वह पूरी तरह से जिहादी बन चुका था.

आपको बता दें कि दादरी काण्ड के तीन साल बाद मशहूर लेखिका लेखिका, पत्रकार तवलीन सिंह उस गांव का जायजा लेने पहुंची, कि आखिर उस मॉब लिचिंग का असर गांव वालों पर अब कितना है ?इंडियन एक्सप्रेस को लिखे अपने लेख में तवलीन ने लिखा है कि 3 साल बाद ये जानने की कोशिश कर रही थी, कि क्या बिसहेड़ा के लोगों को उस घटना का कोई मलाल है भी या नहीं ? उन्होने लिखा है कि इस घटना के बाद लोगों को कोई अफसोस नहीं है, लेकिन गांव वालों में एक अजीब सा भय जरुर दिखता है। करीब 70 साल से गांव में रह रहा एक मुस्लिम परिवार कहीं और जाकर बसा गया, जिसकी जानकारी किसी के पास नहीं है। मालूम हो बिसहेड़ा एक बड़ा गांव है, इस पर शहरों का प्रभाव दिखता है, तवलीन ने इस गांव में पहुंचकर कई लोगों से अखलाक के बारे में बात करने की कोशिश की, लेकिन सबने चुप्पी साध ली, बाद में एक शख्स ने कहा कि दूसरे छोर पर जाकर ये सब बात करें.

तवलीन सिंह ने अपने लेख में लिखा है कि गांव के दूसरे छोर पर जब वो पहुंची, तो उन्होने देखा कि एक खटिया पर कई लोग बैठे थे. उन्होने ने उन्हें देख उनका स्वागत किया। लेकिन जैसे ही उन्होने अखलाक का नाम लिया, तो वो चुप हो गये, वहां शांति छा गई। थोड़ी देर के बाद एक शख्स ने बताया कि अखलाक का परिवार इस गांव से जा चुका है, ऐसे में अब कोई जरुरत नहीं है, कि उसके बारे में यहां ज्यादा कोई बातचीत हो. जिसके बाद तवलीन ने पूछा कि गांव का अकेला मुस्लिम परिवार गांव छोड़कर चला गया, क्या आपलोगों को अफसोस है, इस पर एक शख्स ने कहा कि ये सबकुछ एंटी हिंदू समाजवादी पार्टी सरकार और मीडिया के ड्रामे की वजह से हुआ. ऋषिपाल नाम के शख्स ने कहा कि मेरे पिता ही थे, जिन्होने 70 साल पहले उस परिवार को यहां बसाया था, उसे रहने के लिये अपनी जमीन दी थी लेकिन इसके बाद भी उसने हमारी धार्मिक भावनाओं को कुचला. ऋषिपाल ने कहा कि अकेला मुस्लिम परिवार होने के नाते अखलाक को हिंदू भावनाओं का ध्यान रखना चाहिये थे, उसे बछड़ा नहीं काटना चाहिये था.

तवलीन ने पूछा कि क्या किसी ने उसे बछड़ा काटते देखा था ? सभी ने एकसुर में कहा कि बच्चों ने देखा था, कि वो एक बछड़े का सिर जमीन में गाड़ रहा था, उसी भीड़ से एक शख्स ने बताया कि उन्हीं बच्चों में उनका भतीजा भी था जो गांव के 18 युवकों के साथ पिछले दो साल से जेल में बंद है। उस शख्स ने बताया कि उस रात जो भी हुआ, गलत हुआ, क्योंकि लोगों की भीड़ जमा थी, किसी को नहीं मालूम कि अखलाक को किसने मारा. अगर यूपी में एंटी हिंदू सरकार नहीं होती, तो गांव के इतने युवक जेल में नहीं होते. जब तवलीन सिंह ने कहा कि इस बात के तो कोई सबूत नहीं थे, कि अखलाक ने गोकशी की थी, इस पर एक शख्स ने कहा कि आप क्या जानती है. उसके घर के फ्रिज में 10 किलो मांस रखा हुआ मिला था, क्या ये सबूत नहीं है, जब तवलीन सिंह ने भीड़ से कहा कि ये मानना थोड़ा मुश्किल लगता है कि छोटी सी फ्रिज में 10 किलो मांस रखा जा सकता है, ये सुनने के बाद वहां खड़े लोग उबल पड़े औरा नाराजगी जाहिर करने लगे कि यही एंटी हिन्दू सोच के कारण ये घटना हुई क्योंकि हिन्दू भावनाओं का सम्मान ही नहीं हुआ तथा उस समय की सरकार भी एंटी हिन्दू थी.

ऋषिपाल ने गांव वालों के गुस्से का माहौल शांत कराते हुए कहा कि अखलाक के साथ हुई घटना पर गांव वालों को कोई अफसोस या पछतावा नहीं है, वो इस्लामिक कट्टरपंथी बन गया था। आपको शायद पता नहीं होगा, कि पाकिस्तान में उसकी एक मौसी रहती है, जब से वो उससे मिलने जाने लगा, तब से वो बदल गया था। वो जिहादियों की तरह बातें करने लगा था। जब लोग उससे राम-राम कहते हैं, तो वो कोई जवाब नहीं देता था, हर समय इस्लाम की बातें किया करता था, वो भूल गया था कि गोकशी से हिंदू भावना आहत हो सकती है। उन लोगों ने कहा कि अखलाक को मारने वालों में गांव का कोई शख्स शामिल नहीं था, अगर मीडिया और सपा सरकार ने इसे इतना बड़ा मुद्दा नहीं बनाया होता, तो कोई परेशानी नहीं होती, आप लोग अब भी इस घटना को कुरदते रहते हो. वो इस दुनिया से जा चुका है, परिवार भी गांव छोड़ चुका है तो इस पर चर्चा बंद हो जानी चाहिए.

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