पहले फौजी का सामान लूटा, फिर पुलिस पर आरोप लगाया.. अगर “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” कहावत सच में देखनी है जो बिजनौर आइये

बचपन में आप ने किताबों में कई बार पढ़ा होगा कि “उल्टा चोर कोतवाल को डांटे” लेकिन अगर कभी इसको असल रूप में चोर और कोतवाल के रूप में न देखा हो तो इस समय उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के स्योहारा थाने में जा कर देख सकते हैं . यहाँ चोर भी है और कोतवाल भी .. फिलहाल जानते हैं पूरे मामले को जो इस घटना को चरितार्थ करती है . घर के आपसी झगड़ों से ले कर बड़े बड़े आतंकी हमलो से अपने सीमित संसाधन और बाहुबल से दिन में भूखे रहे कर और रात में जाग कर संघर्ष करती पुलिस जब आखिर फर्जी और आधारहीन आरोपों का भी सामना करना पड़ता है तो ये यकीनन पुलिस से ज्यादा उस समाज के लिए घातक होता है जिसकी रक्षा वो पुलिस वाला कर रहा होता है . शारीरिक रूप से घायल जवान कई बार अपने मोर्चे पर डटा रहता है लेकिन मानसिक रूप से चोटिल रक्षको के लिए मोर्चे पर डटे रहना किसी भी रूप से सम्भव नहीं हो पाता . .

ज्ञात हो कि फर्जी मामलों में किसी निर्दोष को सज़ा न हो इसके लिए पुलिस प्रशासन को न सिर्फ शासन से बल्कि भारत की माननीय अदालतों तक से आये दिन दिशा निर्देश मिला करते हैं और इन फर्जी मामले के अपराधो को रोकना उत्तर प्रदेश शासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी जिसको किसी भी हाल में रोकने के लिए शासन के निर्देश थे . उसी निर्देश पर चलते हुए जब कानून व्यवस्था के पेंच कसे गये तब से ऐसे कई मामले सामने आये हैं जब पुलिस वालों को फर्जी और आधारहीन आरोपों का शिकार बनाया गया है . पिछले कुछ समय में तमाम पुलिस वालों ने आत्महत्या की है जिसमे कुछ विभागीय दबाव के शिकार बने थे तो कुछ ऐसे ही फर्जी आरोप लगाने वालों के ..

फर्जी आरोपों की लाइन लगाए ये वो लोग हैं जो कभी कानून को ठीक से पालन करने में अपनी तौहीनी समझते थे लेकिन जब से प्रशासन ने उनको सही राह दिखाने की कोशिश की तो वो अपने असल रूप में आ गये और निशाने पर ले लिया प्रशासन को ही .उत्तर प्रदेश के योगीराज में जहाँ पुलिस बेहद चुस्त और दुरुस्त हो कर प्रशासनिक और कानूनी शासन को मजबूती के साथ पटरी पर लाना चाहती है वहीँ उसकी राह में तरह तरफ से रोड़े बिछाये जा रहे हैं . कहीं उसे पत्थरों का सामना करना पड़ रहा , कहीं उसे गोलियां झेलनी पड़ रही .. और अब इन सब बातों से पार पा जाए तो अंतिम हथियार के रूप में आधारहीन और नकली स्वरचित आरोप झेलने पर मजबूर किया जा रहा . इस मामले में नम्बर उस बिजनौर जिले का लगाया गया है जो अपनी शांति और सौहार्द के लिए पिछले कुछ समय से अन्य जनपदों के लिए एक मिसाल बना हुआ है. इस जिले में ये शांति और सौहार्द इसलिए है क्योकि यहाँ के प्रशासन ने उसके लिए जीत तोड़ और रात दिन मेहनत की है. सीधे शासन की देखरेख में यहाँ उन अधिकारियो व कर्मचारियों को तैनात किया गया है जिन्हें किसी भी अनावश्यक दबाव और अवैध प्रभाव से झुकाया न जा सके . उन्हें में से एक हैं स्योहारा थाने थानाध्यक्ष श्री अरिहंत कुमार सिद्धार्थ जी .. इनके व् इनके साथी पुलिस स्टाफ की सक्रियता से स्योहारा थानाक्षेत्र में अपराध का स्तर बाकी स्थानों से बेहद कम है और जनता में शांति और सौहार्द है ..

नया मामला आया है उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले से. यहाँ पर थानाक्षेत्र स्योहारा में एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी पर कुछ लोगों ने साजिशन ऐसे आरोप लगाए जिसमे जमीनी स्तर पर कोई सच्चाई प्रथम दृष्टया नहीं दिख रही है . हालात तो यहाँ तक बनाए जाने लगे कि अटैची चोरों पर हुई कार्यवाही को सीधे सीधे योगी राज से जोड़ा जाने लगा. चोरो के खिलाफ पुलिस की संवैधानिक और कानूनी कार्यवाही में थर्ड डिग्री का मसाला लगाया जाने लगा जो कि पूर्व सुनियोजित प्रतीत हो रहा है . पूरे मामले के अनुसार गत 11 सितम्बर की रात को ताजपुर निवासी देश की रक्षा करता एक फौजी अपनी पत्नी के साथ स्योहारा नगर में प्रवेश करता है जो की असम राईफल में पर बेहद संवेदनशील स्थान नागालैंड में तैनात रह कर देश की रक्षा कर रहा है. देश का ये रक्षक ऑटो में बैठ कर अपने घर आ रहा था कि अचानक ही अटैची चोरों ने उसके बैग से कीमती ज़ेवर चुरा लिए, जिसकी शिकायत उक्त फ़ौजी ने स्थानीय स्योहारा थाने में की . मामला देश के एक रक्षक से जुड़ा था जिसके आधार पर समाज की रक्षक पुलिस ने फ़ौरन ही त्वरित कार्यवाही करते हुए अटैची चोरों को खोज निकाला जिसमे  बुढनपुर निवासी 45 साल के शकील व लाम्बा खेड़ा निवासी लगभग 20 साल के कामिल को धर दबोचा.

इतना ही नहीं बेहद कम समय में पुलिस ने इन दोनों चोरों से जिस प्रकार चोरी किया गया माल बरामद किया वो अपने आप में पुलिस की सक्रियता की एक बड़ी मिसाल बन गया है . इस मामले में सबसे बड़ा हैरान कर देने वाला मोड़ तब आया जब समाज की शांति के दुश्मन माने जा सकने वाले ऐसे चोरों के समर्थन में खुद को नेता कहने वाले और खुद को मीडिया का बताने वाले कुछ लोग आये और उन्होंने थानाध्यक्ष श्री अरिहंत कुमार सिद्धार्थ पर अनावश्यक रूप से दबाव बनाना शुरू कर दिया . तमाम कोशिशे उस समय नाकाम हो गयी जब थानाध्यक्ष महोदय ने सत्य से इंच भर भी हटने से मना कर दिया .. उस समय न्यायोचित कार्यवाही करते हुए दोनों चोरों को माल बरामद कर के जेल भेज दिया गया . इसके बाद अचानक ही पुलिस के गुडवर्क की तारीफ करने के बजाय उसके खिलाफ कुछ चुनिन्दा लोगों से साजिशें रचनी शुरू कर दी .

सबसे पहले तो निर्लज्जता की हद पार करते हुए फौजी पर दबाव बनाने की कोशिश की गयी अपने मामले को वापस लेने की लेकिन वो भी अपनी शिकायत पर अडिग रहे .. फिर कोई रास्ता न दिखने पर OFFENCE  IS BEST DEFENSE का दुर्दांत अपराधियों द्वारा बनाये गये नियम अपनाते हुए कामिल और शकील के परिवार वालों ने अपने परिजन की निर्लज्ज हरकत पर शर्मिंदा होने के बजाय सीधे सीधे पुलिस को ही निशाने अपर लेना शुरू कर दिया . पुलिस की अंध विरोधी छवि रखने वाले कुछ लोगों ने इसमें उनका साथ दे कर मामले को हवा देने की कोशिश की ..इन लोगों ने कामिल और शकील को अवैध हिरासत मे रखने व थर्ड डिग्री देने का आरोप मढना शुरू कर दिया जबकि हिरासत के समय किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार न करने की बात पुलिस की तरफ से बताई जा रही है .

ये दोनों अटैची चोर इतने शातिर अदाकार और अभिनय करते थे कि ये चोरी कर के पीड़ित के साथ ही चोरी का सामान तलाशना शुरू कर देते थे और पीड़ित को शक भी नहीं होता था ठीक वही अभियान इन दोनों ने अपनी गिरफ्तारी के समय भी किया जब उन दोनों को थाने से अदालत भेजा जा रहा था . बेहद सोची समझी साजिश से बनाये गये एक वीडियो में इन दोनों ने खुद को ऐसे चलने का बहना बनाया कि इन्हें बहुत दर्द हो रहा है लेकिन असल में मेडिकल रिपोर्ट में इन दोनों के सभी अभिनय की पोल खुल गयी . आखिरकार इन दोनों को न्यायालय में पेश कर के जेल भेज दिया गया और इधर इनके घर वाले अपने परिजन के कृत्य पर शर्मिंदा होने के बजाय लगातार पुलिस विरोधी बयान देते रहे .

इन अटैची चोरों के अस्पताल में मेडिकल के समय भी इनके कुछ पैरवीकर्ता वहां जमा हुए थे . हैरानी की बात ये है कि उस पैरवी करने वालों की भीड़ मे से कोई एक भी सीमा पर देश की रक्षा कर रहे उस सैनिक के पक्ष में नहीं बोल रहा था . पैरवी करने के लिए जमा होने वालों में वो भी थे जो कभी कभी प्रशासन पर सुस्ती और चोरों को समय से न पकड़ने का आरोप लगाया करते थे . यहाँ शकील के परिजनों ने पुलिस पर घर मे घुसकर तोड़फोड़ व मारपीट का आरोप लगाया जबकि कहीं से किसी के भी शरीर पर कोई निशान नहीं दिखे और सूत्र ये भी बताते हैं कि पुलिस को बदनाम करने के लिए अपने घर का सामान खुद ही पलट लिया गया और उसकी वीडियो बनवा डाली गयी ..

असल में बताया ये भी जा रहा है कि पुलिस के खिलाफ इस लामबंदी में सिर्फ अटैची चोरों का परिवार ही नहीं बल्कि वो तमाम लोग हैं जिनके कई काले कारनामे स्योहारा थाना पुलिस की सक्रियता से बंद हो चुके थे . इन तमाम में वो भी थे जो गौ मांस के कारोबार , गौ तस्करी जैसे अपराधों में संलिप्त थे और थानेदार श्री अरिहंत कुमार सिद्धार्थ जी के कार्यवाही के जद में आये थे . उन्होंने इस अटैची चोरी को एक मौके की तरह देखा और इन चोरों को मोहरा बना कर गढ़ डाली एक नई कहानी . यहाँ ये ध्यान देने योग्य है कि अपने घर से मिला संरक्षण भी इन दोनों की इन बिगड़ती आदतों की जिम्मेदार हैं . फिलहाल ये मामला सामने आते ही पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाई और मौके पर मुआयना करते हुए न्यायोचित कार्यवाही की . इस मामले में हर प्रभाव का इस्तेमाल किया अपराध को दबाने का और स्थानीय पुलिस को दबाव में लेने का पर वो सब नाकाम रहा .. .

इस मामले में उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लाया गया है जिन्होंने जांच जारी होने की बात कही है लेकिन लगभग पूरा क्षेत्र इस घटना की सत्यता से परिचित है . इस पूरे मामले में कुछ सवाल उठते हैं . क्या न्याय की मांग सिर्फ अटैची चोरों के लिए करना ही मानवाधिकार की बात है , उस फौजी के लिए नहीं जो सीमा पर देश की रक्षा करता है और घर आते ही चोरों का शिकार हो गया था ?  ऐसे आधारहीन आरोपों से आरोपित किये गए थानाधय्क्ष स्योहारा स्वय एक साफ़ छवि वाले कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में गिने जाते हैं .फिर भी उनके ऊपर ऐसे आरोप कहीं न कहीं न सिर्फ उन्हें बल्कि वर्दी में निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते तमाम पुलिसवालों के मनोबल पर असर डालता है . अल्पसंख्यक होने के नाते इतना अतिविश्वास था कि उसकी साजिश कामयाब हो जायेगी लेकिन न सिर्फ पुलिस वाले अपितु आम जनता भी इन आरोपों को ठीक से जानती है और सबको आशा में है कि वही होगा जो न्यायोचित होगा ..

असल में इस पूरे मामले से बिजनौर के पुलिस विभाग को स्योहारा क्षेत्र में अवैध कार्य करने वाले असामाजिक तत्वों द्वारा एक परोक्ष चेतावनी देने की कोशिश भी है कि यदि उनके अनैतिक कार्यों में रुकावट डाली तो ऐसे ही आरोपों से उन्हें मानसिक प्रताड़ित किया जाएगा. इसलिए एक स्टाफ को निशाने पर ले कर इस प्रकार की मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है जिस से वो अपराधियों के विरुद्ध की जा रही अपनी कठोर कार्यवाही से विचलित हो जाएँ . लेकिन तारीफ करनी होगी पुलिस बल की जो ऐसे तमाम आरोपों को झेलते हुए भी जनता की सुरक्षा दिन में भूखे रह कर और रातों में जाग कर कर रहा है . सुदर्शन न्यूज की जमीनी पड़ताल में आम जनता की ये राय सामने आई है कि अरिहंत कुमार जी की तैनाती के बाद इलाके में अपराधियों की गतिविधियाँ बहुत कम हुई हैं और आम जनता को काफी राहत मिली है . लेकिन यही कार्य उन अपराधिक तत्वों को रास नहीं आ रहे हैं .

यहाँ प्रसंशा की पात्र बिजनौर जिले की वो पुलिस है जो अपने दायित्यो को जानते हुए इस मामले में सब कुछ शीशे की तरफ साफ़ होने के बाद भी ऐसे झूठे मामलों पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की . , असल में गहराई से पड़ताल करने पर सामने आता है कि इस पूरे मामले में सीधे निशाना योगी सरकार को बनाने की साजिश रची गयी है . आये दिन ऐसे तमाम मामले सामने आ रहे हैं जिसमे शासन और प्रशासन के अधिकारियो को ऐसे कई झूठे और स्वरचित मामलो से न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है बल्कि उनके सामाजिक जीवन को भी प्रभावित किया गया है .. बिजनौर के सिपाही कमल शुक्ला , रामपुर के सब इंस्पेक्टर जय प्रकाश , मुरादाबाद चंदौसी के चौकी इंचार्ज हरपाल सिंह , शाहजहांपुर के सिपाही के , जौनपुर में थानेदार अखिलेश जी , जौनपुर में ही पूरी शाहगंज कोतवाली पर , देवरिया में थानाध्यक्ष श्रवण यादव , श्रावस्ती के सिरसिया थाने के थानेदार श्री यशवंत चौधरी , रामपुर जिले के थाना बिलासपुर पुलिस, शामली के थानाभवन थानाध्यक्ष किशन कुमार जी और अब बिजनौर के स्योहारा थाने के थानाध्यक्ष श्री अरिहंत कुमार सिद्धार्थ जी पर इस प्रकार से आधारहीन आरोप व स्वरचित मिथ्या मामले रचने वालों पर कड़ी कार्यवाही न हुई तो निश्चित तौर पर ये समाज की शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले, आतंक और अपराध से लड़ते पुलिस बल के लिए किसी भी रूप में सार्थक परिणाम नहीं देगा और इसका असर जनता पर जरूर पड़ेगा .

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