Breaking News:

पहले बच्चे का सर फोड़ कर बेरहमी से मारा और बाद में उलटे आरोप पुलिस पर ही जड़ दिए. उन्मादी के साथ शातिर भी निकला अज़हर का बेटा शावेज़


घर के आपसी झगड़ों से ले कर बड़े बड़े आतंकी हमलो से अपने सीमित संसाधन और बाहुबल से दिन में भूखे रहे कर और रात में जाग कर संघर्ष करती पुलिस जब आखिर फर्जी और आधारहीन आरोपों का भी सामना करना पड़ता है तो ये यकीनन पुलिस से ज्यादा उस समाज के लिए घातक होता है जिसकी रक्षा वो पुलिस वाला कर रहा होता है . शारीरिक रूप से घायल जवान कई बार अपने मोर्चे पर डटा रहता है लेकिन मानसिक रूप से चोटिल रक्षको के लिए मोर्चे पर डटे रहना किसी भी रूप से सम्भव नहीं हो पाता . .ज्ञात हो कि फर्जी मामलों में किसी निर्दोष को सज़ा न हो इसके लिए पुलिस प्रशासन को न सिर्फ शासन से बल्कि भारत की माननीय अदालतों तक से आये दिन दिशा निर्देश मिला करते हैं और इन फर्जी मामले के अपराधो को रोकना उत्तर प्रदेश शासन के लिए एक बड़ी चुनौती थी जिसको किसी भी हाल में रोकने के लिए शासन के निर्देश थे . उसी निर्देश पर चलते हुए जब कानून व्यवस्था के पेंच कसे गये तब से ऐसे कई मामले सामने आये हैं जब पुलिस वालों को फर्जी और आधारहीन आरोपों का शिकार बनाया गया है . पिछले कुछ समय में तमाम पुलिस वालों ने आत्महत्या की है जिसमे कुछ विभागीय दबाव के शिकार बने थे तो कुछ ऐसे ही फर्जी आरोप लगाने वालों के ..

फर्जी आरोपों की लाइन लगाए ये वो लोग हैं जो कभी कानून को ठीक से पालन करने में अपनी तौहीनी समझते थे लेकिन जब से प्रशासन ने उनको सही राह दिखाने की कोशिश की तो वो अपने असल रूप में आ गये और निशाने पर ले लिया प्रशासन को ही .उत्तर प्रदेश के योगीराज में जहाँ पुलिस बेहद चुस्त और दुरुस्त हो कर प्रशासनिक और कानूनी शासन को मजबूती के साथ पटरी पर लाना चाहती है वहीँ उसकी राह में तरह तरफ से रोड़े बिछाये जा रहे हैं . कहीं उसे पत्थरों का सामना करना पड़ रहा , कहीं उसे गोलियां झेलनी पड़ रही .. और अब इन सब बातों से पार पा जाए तो अंतिम हथियार के रूप में आधारहीन और नकली स्वरचित आरोप झेलने पर मजबूर किया जा रहा . इस मामले में नम्बर उस शामली जिले का लगाया गया है जो भले ही कभी कैराना जैसे स्थलों से चर्चा में रहा हो पर अब अपनी शांति और सौहार्द के लिए जाना जाता है .. ये शांति और सौहार्द यहाँ इसलिए है क्योकि यहाँ के प्रशासन ने उसके लिए जीत तोड़ और रात दिन मेहनत की है . सीधे शासन की देखरेख में वहां उन अधिकारियो व कर्मचारियों को तैनात किया गया है जिन्हें किसी भी अनावश्यक दबाव और अवैध प्रभाव से झुकाया न जा सके . उन्हें में से एक हैं थाना भवन थाने थानाध्यक्ष श्री किशन कुमार जी .. इनके व् इनके साथी पुलिस स्टाफ की सक्रियता से थाना भवन क्षेत्र में अपराध का स्तर बाकी स्थानों से बेहद कम है और जनता में शांति और सौहार्द है ..

नया मामला आया है उत्तर प्रदेश के शामली जिले से. यहाँ पर थानाक्षेत्र थाना भवन में एक विद्यालय में शावेज़ पुत्र अज़हर नाम का एक ऐसा छात्र था जो पैरों से दिव्यांग है पर इसके बाद भी उसकी हरकतें हमेशा ऐसी रही हैं जो उस स्कूल में कई बार अशांति का कारण बनी थी .. आये दिन गाली गलौज करना और बेवजह किसी को पीट देने के बाद जब स्कूल कोई कार्याही की बात करता तो अपने मुस्लिम समुदाय का होने के नाते और दिव्यांग होने को आगे कर के उन्हें इतना धमका देता था कि सामने वाला अपनी गलती न होने के बाद और प्रताड़ित होने के बाद भी पीछे हट जाया करता था.  शावेज़ की हरकतों से ये कहना गलत नहीं होगा कि कुछ ऐसे ही विचारधारा के लोगों के चलते वो तमाम असल पीड़ित भी संदेहास्पद मामलों में न्याय से वंचित हो जाते हैं . सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अपने से बेहद कमजोर लड़के को बुरी तरह से पीटने के बाद शावेज़ खान ने उसका सर तक फोड़ डाला था ..

जब चोट खाये बच्चे के अभिभावक  शिकायत ले कर शावेज से मिले तो उसने उन्हें भी बुरी तरह से डराया धमकाया और उन्हें उलटे ही केस में फंसाने की धमकी दे डाली . शावेज़ का पूरा परिवार क्षेत्र के दबंगों में से गिना जाता है जिनके लिए शायद पहले कानून , न्याय , दया आदि का कोई स्थान नहीं था .. इस मामले में आख़िरकार न्याय की गुहार स्थानीय थाना भवन में की गयी .. थानाध्यक्ष श्री किशन कुमार जी ने त्वरित कार्यवाही करते हुए शावेज़ को हिरासत मे लिया और दोनों पक्षों को आमने सामने बैठाया . आख़िरकार दोनों पक्षों से हुई पूछताछ में शावेज खान दोषी साबित हुआ और उस पर यथोचित कार्यवाही की गयी .. लेकिन अन्याय करने के बाद भी न्याय होने से बेहद खफा शावेज़ उसी समय रचने लगा था वो तमाम साजिशें जो आख़िरकार उसने एक लम्बे समय बाद सतह पर दिखानी शुरू कर दी ..

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ समय बाद हालात सामान्य होने के बाद शावेज़ उन तमाम लोगों को खोज निकाला जिनके कई काले कारनामे थाना भवन पुलिस की सक्रियता से बंद हो चुके थे . इन तमाम में वो भी थे जो गौ मांस के कारोबार , गौ तस्करी जैसे अपराधों में संलिप्त थे और थानेदार श्री किशन कुमार जी के कार्यवाही के जद में आये थे . उन्होंने इसको एक मौके की तरह देखा और पीछे से शावेज को मोहरा बना कर गढ़ डाली एक नई कहानी . शावेज के अनुसार उसको अल्पसंख्यक होने के नाते प्रताड़ित किया गया जबकि उसके द्वारा बेरहमी से पीटा गया छात्र खुद अल्पसंख्यक समुदाय से था और उसी का हममज़हब था .. इतना ही नहीं , स्कूल में शावेज़ के द्वारा प्रताड़ित होने वाले अधिकतर छात्र खुद ही उसी समुदाय से आते थे .. दूसरा आरोप दिव्यांग होने के बाद भी खुद को पीटने का है तो इसके प्रमाण में थाने से जाते समय खुद शावेज़ ने लिखित रूप में दिया था कि उसको कोई चोट आदि नहीं है और वो अपना मेडिकल नहीं करवाना चाहता है . ये तमाम बातें उसने अपने अभिभावकों की मौजूदगी में कही थी और उस समय सभी संतुष्ट दिख रहे थे .. लेकिन असल में उसी समय मन में रची जा रही थी वो साजिश जिसको अब अंजाम दिया गया .

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शावेज़ अपने सहपाठियों को पीटते हुए बार बार ये कहता था कि उसके घर वालों की इतनी पहुंच है कि कोई उसका कुछ बिगाड़ नहीं सकता .. उसको अपने घर से मिला संरक्षण भी उसकी इन बिगड़ती आदतों की जिम्मेदार हैं . फिलहाल ये मामला सामने आते ही पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाई और मौके पर मुआयना करते हुए न्यायोचित कार्यवाही की . इस मामले को पुलिस शान्तिपूर्ण समाधान की तरफ दोनों पक्षों की संलिप्तता आदि को देखते हुए ले भी गयी लेकिन किसी भी प्रकार से विवाद को बढाने पर आमादा एक पक्ष को रास नहीं आया और उसने पुलिस के शांति स्थापना के प्रयासों को प्रभावित करने के लिए पुलिस को ही निशाने पर ले डाला . इसको अवसर समझ कर वो तमाम असमाजिक तत्व शामिल हो गये जिन्हें पुलिस ने अपनी सक्रियता से काले काम करने से रोक रखा था और इन्होने अपने हर प्रभाव का इस्तेमाल किया अपने अपराध को दबाने का और स्थानीय पुलिस को दबाव में लेने का पर वो सब नाकाम रहा .. आखिरकार जब सभी हथकंडे फेल हो गये तो अंतिम रास्ता पुलिस वालों को लपेटने का दिखा और उसके लिए आगे कर दिया अपनी उस दिव्यांगता को जो उस समय रुकावट नहीं आयी थी जब उसने अपने से कमजोर एक लड़के को पीट कर सर फोड़ डाला था .

इस मामले में उच्चाधिकारियों को संज्ञान में लाया गया है जिन्होंने जांच जारी होने की बात कही है लेकिन लगभग पूरा क्षेत्र इस घटना की सत्यता से परिचित है . इस पूरे मामले में कुछ सवाल उठते हैं . क्या दिव्यांगता मात्र को आगे करने से किसी को कोई भी अपराध करने की छूट मिल जाती है ? क्या पुलिस को अपराधी में सामान्य या दिव्यांगता आदि देख कर कार्यवाही करने के कोई निर्देश हैं ? जब एक बार मामले का स्थाई समाधान हो चुका था जो बीच में २ सप्ताह के आस पास खामोश रहने एक बाद एकाएक इस प्रकार से हल्ला क्यों मचाया गया ? हिरासत के समय शावेज अपने पूरे परिवार वालो के साथ रहा , उसके परिवार वालों के आगे ही उसको पीटा जाता तो एक पिता या माता तत्काल ही उसको उठाते .. ऐसे आधारहीन आरोपों से आरोपित किये गए किशन कुमार जी स्वय एक धार्मिक विचारधारा के पुलिस अधिकारी हैं फिर भी उनके ऊपर ऐसे आरोप कहीं न कहीं न सिर्फ उन्हें बल्कि वर्दी में निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते तमाम पुलिसवालों के मनोबल पर असर डालता है . एक तो दिव्यांग दूसरा अल्पसंख्यक, होने के नाते इतना अतिविश्वास था की उसकी साजिश कामयाब हो जायेगी लेकिन न सिर्फ पुलिस वाले अपितु आम जनता भी इन आरोपों को ठीक से जानती है और सबको आशा में है कि वही होगा जो न्यायोचित होगा ..

असल में इस पूरे मामले से शामली के पुलिस विभाग को थानाभवन क्षेत्र में अवैध कार्य करने वालों द्वारा एक परोक्ष चेतावनी देने की कोशिश भी है कि यदि उनके अनैतिक कार्यों में रुकावट डाली तो ऐसे ही आरोपों से उन्हें मानसिक प्रताड़ित किया जाएगा. इसलिए एक स्टाफ को निशाने पर ले कर इस प्रकार की मानसिक प्रताड़ना दी जा रही है जिस से वो अपराधियों के विरुद्ध की जा रही अपनी कठोर कार्यवाही से विचलित हो जाएँ . लेकिन तारीफ करनी होगी पुलिस बल की जो ऐसे तमाम आरोपों को झेलते हुए भी जनता की सुरक्षा दिन में भूखे रह कर और रातों में जाग कर कर रहा है .

यहाँ प्रसंशा की पात्र वो शामली जिले की वो पुलिस है जो एक दिव्यांग की पीड़ा को जानते हुए अपने दायित्यो को जानते हुए इस मामले में सब कुछ शीशे की तरफ साफ़ होने के बाद भी ऐसे झूठे मामलों पर कोई कानूनी कार्यवाही नहीं की . , असल में गहराई से पड़ताल करने पर सामने आता है कि इस पूरे मामले में सीधे निशाना योगी सरकार को बनाने की साजिश रची गयी है . आये दिन ऐसे तमाम मामले सामने आ रहे हैं जिसमे शासन और प्रशासन के अधिकारियो को ऐसे कई झूठे और स्वरचित मामलो से न सिर्फ मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है बल्कि उनके सामाजिक जीवन को भी प्रभावित किया गया है .. बिजनौर के सिपाही कमल शुक्ला , रामपुर के सब इंस्पेक्टर जय प्रकाश , मुरादाबाद चंदौसी के चौकी इंचार्ज हरपाल सिंह , शाहजहांपुर के सिपाही के , जौनपुर में थानेदार अखिलेश जी , जौनपुर में ही पूरी शाहगंज कोतवाली पर , देवरिया में थानाध्यक्ष श्रवण यादव , श्रावस्ती के सिरसिया थाने के थानेदार श्री यशवंत चौधरी , रामपुर जिले के थाना बिलासपुर पुलिस और अब शामली के थानाभवन थानाध्यक्ष किशन कुमार जी पर इस प्रकार से आधारहीन आरोप व स्वरचित मिथ्या मामले रचने वालों पर कड़ी कार्यवाही न हुई तो निश्चित तौर पर ये समाज की शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले, आतंक और अपराध से लड़ते पुलिस बल के लिए किसी भी रूप में सार्थक परिणाम नहीं देगा और इसका असर जनता पर जरूर पड़ेगा .

आरोप लगाने वाले शावेज़ की करतूत –

अपने सहपाठी का फोड़ा गया सर –


 

लहू लुहान छात्र जो बना था शावेज़ के कहर का शिकार –


सुदर्शन के राष्ट्रवादी पत्रकारिता को आर्थिक सहयोग करे और राष्ट्र-धर्म रक्षा में अपना कर्त्तव्य निभाए
DONATE NOW

Share
Loading...

Loading...