बलात्कार पीड़िता की फोटो को सार्वजनिक करके मिशनरियों ने किया कानूनी अपराध… क्या बिशप के खिलाफ मुंह खोलने की है सजा ?

केरल में ईसाई बिशप द्वारा नन के बलात्कार के बाद जहाँ पूरा देश आक्रोशित है तथा बलात्कारी बिशप को फांसी की मांग कर रहा है वहीं आश्चर्यजनक रूप से ईसाई मिशनरिया बलात्कारी बिशप के बचाव में उतर आई हैं तथा न सिर्फ नन को ही दोषी ठहरा रही हैं बल्कि वो कार्य भी कर रही हैं जो कानूनन अपराध है. अआप्को बता दें कि बलात्कारी बिशप के बचाव में मिशनरीज ऑफ जीसस ने देश के बलात्कार रोधी कानून का उल्लंघन करते हुए शुक्रवार को रेप पीड़िता नन और आरोपी की एक साथ बैठे हुए तस्वीर जारी कर दी. जालंधर डायसिस के बिशप पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली नन इसी मिशनरीज से ताल्लुक रखती हैं. मिशनरीज ऑफ जीसस ने नन के आरोपों की जांच करने वाले आयोग के निष्कर्षों को प्रकाशित करने के लिए मीडिया को जारी विज्ञप्ति में तस्वीर जारी की.

ज्ञात हो की भारतीय कानून में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर पाबंदी है. हालांकि, मिशनरीज ने तस्वीर प्रकाशित नहीं करने को लेकर आगाह करते हुए कहा कि अगर प्रेस नियम का उल्लंघन करती है, तो मिशनरीज को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए. उसने दावा किया कि 23 मई, 2015 को तस्वीर उस वक्त ली गई, जब नन बिशप फ्रेंको मुलक्कल के साथ एक निजी समारोह में भाग ले रही थीं. उन्होंने दावा किया कि नन ने मुलक्कल के साथ ऐसे कई कार्यक्रमों में भाग लिया था. शिकायत दाखिल करने के बाद नन कभी सार्वजनिक रूप से या मीडिया के सामने पेश नहीं हुई. मिशनरीज ने प्रेस विज्ञप्ति में पीड़िता, उसकी पांच साथी ननों और चार अन्य पर बिशप के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगाया. आश्चर्य होता है कि एक बलात्कारी बिशप को बचाने के लिए ईसाई मिशनरियां क़ानून को भी ठेंगा दिखा रही हैं जबकि ये वही लोग हैं नारी स्वाभिमान तथा मानवता की बड़ी बड़ी बातें करते हैं लेकिन आज उन्ही के बीच में एक महिला की अस्मिता को रौंदा गया है तो महिला को न्याय दिलाने के बजाय महिला के खिलाफ खड़े हो गए हैं.

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