साधुओं के हत्यारों को मार गिराने वाली अलीगढ़ पुलिस पर कांग्रेस ने उठाये सवाल… कश्मीर के सैनिकों जैसे हालात पुलिस के जांबाजों की भी करने की साजिश

पूरा देश जानता है कि कश्मीर में जब उन्मादी पत्थरबाज पुलिस तथा सेना के जवानों पर पत्थरबाजी करते हैं तो उन्हें भटका हुआ नौजवान तथा मासूम कहा जाता है लेकिन जब वही पुलिस तथा सेना उन देश के गद्दारों के खिलाफ कोई कार्यवाही करती है तो भी उलटा जवानों को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है कि ये मंवाधिकारों का हनन है. अब कश्मीर के जवानों जैसे ही हालात उत्तर प्रदेश के जवानों का भी करने का प्रयास किया जा रहा है तथा ये हिंदुस्तान की सेक्यूलर राजनीति ही कर रही है. वो यूपी पुलिस जो इस समय अपराधियों का काल बनी हुई है, उस यूपी पुलिस के जवानों के खिलाफ न सिर्फ तथाकथित मानवाधिकार बल्कि सेक्यूलर राजनीति भी तनकर खड़ी हो गयी है.

आपको बता दें कि कांग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में साधुओं की ह्त्या करने वाले कुख्यात अपराधियों का एनकाउंटर करने वाली अलीगढ़ पुलिस पर सवाल खड़े किये हैं.कांग्रेस पार्टी ने कहा है कि अलीगढ़ एनकाउंटर कोई एनकाउंटर नहीं था बल्कि एक सुनियोजित षड्यंत्र था. उत्तर प्रदेश कांग्रेस की तरफ से एक बयान में आरोप लगाया गया है कि अलीगढ़ में पुलिस कप्तान की मौजूदगी में मीडियार्किमयों को बुलाकर जिस तरह दो लोगों से मुठभेड़ की पटकथा लिखी गयी उससे साबित होता है कि यह पुलिस और सरकार का पूर्व नियोजित और निश्चित आयोजन था. बयान के मुताबिक जीवन के अधिकारों के संरक्षण के लिए जिम्मेदार सरकार और उसकी पुलिस का ये कृत्य मानवता को शर्मसार करने वाला हो जाता है. बयान में कहा गया कि कोई भी सरकार किसी व्यक्ति को उसके जीवन अधिकार से न्यायिक प्रक्रिया का शुचितापूर्ण पालन किये बिना वंचित नहीं कर सकती. जीवन के अधिकार से वंचित करने की युक्तियुक्तता के निर्धारण का कार्य भारतीय संविधान ने अदालतों को दिया है. पुलिस और उसकी रिंग मास्टर सरकार को नहीं.

कांग्रेस का का कहना है कि ‘देशी जेम्स बाण्ड’ बन मौके पर ही ‘फुल एण्ड फाइनल’ करने की लाइसेंस प्राप्त भाजपा सरकार की पुलिस 11 महीने में 1241 मुठभेड़ें कर चुकी है. इनमें मारे जाने वाले लोगों में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों का बड़ा प्रतिशत रहा है. ये मुठभेड़ मानो सरकार का राजनीतिक कार्यक्रम बन चुकी हैं. मालूम हो कि अलीगढ़ के हरदुआगंज थानाक्षेत्र के मछुआ गांव के पास कल पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में मुस्तकीम तथा नौशाद नामक इनामी बदमाश मारे गये थे. इनपर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित था. इन दोनों बदमाशों ने अलीगढ़ में साधू की ह्त्या की थी. अलीगढ़ पुलिस की इस जांबाज कार्यवाही के बाद जहाँ पूरा राज्य पुलिस को सैल्यूट कर रहा है वहीं सेक्यूलर राजनीती पुलिस के खिलाफ हो गई है.

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