बीजेपी नेता ने घोषित किया एक मुस्लिम नेता का नाम जो उनके हिसाब से है असम का सबसे बड़ा दुश्मन

AIUDF प्रमुख बदरुद्दीन अज़मल असम का सबसे बड़ा दुश्मन है. अजमल भारतीय नागरिक जरूर है लेकिन वह भारतीय                                संस्कृति के खिलाफ है और जो भारतीय संस्कृति के खिलाफ है वह हमारा दुश्मन है. ये कहना है भारतीय जनता                                                               पार्टी के कद्दावर नेता तथा असम के वित्तमंत्री हिमंत बिस्वा शर्मा का.

 

नागरिकता संशोधन बिल को लेकर मचे राजनैतिक घमासान के बीच असम के वित्तमंत्री तथा भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता हिमंत बिस्वा शर्मा ने बड़ा बयान देते AIUDF प्रमुख  बदरुद्दीन अजमल  को असम का सबसे बड़ा दुश्मन बताया है. एक राष्ट्रीय मीडिया से बात करते हुए शर्मा ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि मैं अजमल के खिलाफ हूं. अजमल एक भारतीय नागरिक हो सकते हैं लेकिन वह हमारे संस्कृति के खिलाफ हैं. हम बदरुद्दीन अजमल को असम का दुश्मन मानते हैं.

 

हिमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि नागरिकता संशोधन विधेयक-2016 असमिया लोगों के हितों की रक्षा करेगा और इसे पास किया जाना चाहिए. उन्होंने तर्क दिया है कि अगर विधेयक पास नहीं हुआ तो राज्य की 17 सीटों को नुकसान होगा, जिसका मतलब है असम का अंत होना. इन 17 सीटों में करीब आठ से नौ लाख लोग हैं जिनके नाम एनआरसी में नहीं शामिल हैं और जिनके वोट महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान और बांग्लादेश की अल्पसंख्यक आबादी(हिन्दू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी, ईसाई आदि) को नागरिकता नहीं देते हैं तो आप विभाजन पीड़ितों को दंडित कर रहे हैं. और अगर आप इन आठ लाख लोगों को वापस इनके देश भेजते हैं जो नागरिकता संशोधन विधेयक के पारित होने से लाभ पा सकते है तो असम की करीब 17 सीटें एआर्इयूडीएफ के पास चली जाएंगी तथा असम दूसरा कश्मीर बन जायेगा.

हिमंत बिस्वा शर्मा ने कहा कि यह विधेयक राज्य की 17 सीटों की रक्षा करेगा. उन्होंने कहा कि ये 8-9 लाख लोग बहुमत का गठन तो नहीं करते हैं लेकिन ये बदरुद्दीन अजमल की नीतियों का विरोध करते हैं और असमिया सोच का समर्थन करते हैं. ऐसे में अगर आप इन लोगों को हटाते हैं तो ये 17 सीटें बदरुद्दीन अजमल के पास चली जाएंगी. पहले से ही उनके पास पहले से ही 35 सीटें है और अगर ये 17 सीटें भी आप खो देंगे तो असम काे खो देंगे. उन्होंने कहा कि अगर ये १७ सीटें बदरुद्दीन अजमल के पास चली गई तो असम के जिन्ना के रास्ते चल पड़ेगा तथा हमारे हाथ से निकाल जाएगा.

 

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