जफ़र और सलमान है जांबाज जवान सतीश यादव के हत्यारे.. छिपे है उस बटला हाउस में जिसके लिए मैडम जी ने बहाये थे आंसू

29 जुलाई को हुई वारदात में वीरगति को प्राप्त हुए सिपाही सतीश यादव के गुनहगारों में अब तक तीन आरोपियों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, जबकी एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसके बटला हाउस में छिपे होने की आशंका है। आगरा में हुई इस वारदात का आरोपी अब दिल्ली में पनाह लिए हुए है। इस मामले को लेकर अब दिल्ली पुलिस भी चौकन्नी हो गयी है और सतीश के हत्यारे को ढूढ़ने में आगरा पुलिस की मदद करेगी।

आरोपी जफ़र की लोकेशन लगातार दिल्ली के बटला हाउस की आ रही है। पुलिस अपनी पूरी कोशिश कर रही है कि जल्द से जल्द इस मुख्य आरोपी जफ़र को हिरासत में लिया जाए। पुलिस आरोपी जफ़र की तलाश में दो बार बटला हाउस जा चुकी है लेकिन पुलिस को अब तक सफलता प्राप्त नहीं हुई है। यह वारदात 29 जुलाई की है जब एत्माद्दौला के प्रकाश पुरम में चोरी के इरादे से घूम रहे चार बदमाशों को सिपाही सतीश यादव और कुलदीप ने घेर लिया था। इसी दौरान सतीश ने एक बदमाश को दबोच लिया था। जफर और उसके साथी सलमान ने सिपाही सतीश को गोली मारकर वहा से भाग गए और सतीश ने अपनी जान गवाह दी।
इस मामले में मंगलवार रात को पुलिस ने नौ बजे कालिंदी विहार में मुठभेड़ के बाद सलमान उर्फ लल्ला, राहुल जाटव और श्यामवीर उर्फ सरिया को गिरफ्तार किया था। इसी मुठभेड़ में सलमान के पैर में गोली लगी थी और एक बार फिर गिरोह का सरगना जफर उर्फ सोनू भागने में कामयाब हो गया। सूत्रों से पता लगा है कि जफर मूल रूप से आगरा में बोदला स्थित नवी शाह की दरगाह का रहने वाला है। उसने अपनी मामी से निकाह कर लिया। इसके बाद सीता नगर में किराये पर रहने लगा। उसका एक बच्चा भी है।
घटना को अनजाम देकर चारो आरोपी अलग अलग भागे थे ताकि पुलिस को गुमराह कर सके। जफ़र दिल्ली जाकर रहने लगा।
बताया जाता है की दिल्ली के बटला हाउस में उसके रिश्तेदार रहते हैं। पुलिस के दो बार दबीश करने के लिए टीम को बटला हाउस भेजा गया। सर्विलांस की मदद से पुलिस को उसकी लोकेशन मिली। तंग गलियों में पुलिस को उसका ठिकाना नहीं मिल पाया। अभी भी सूचना आ रही है कि वह बटला हाउस में किसी के घर पर शरण लिए है।पुलिस रिकार्ड के मुताबिक, इससे पहले जफर चोरी की कई वारदात को अंजाम देने के बाद भी पकड़ा नहीं जा सका है। इतना ही नहीं जम्मू में भी मिली थी जफ़र की लोकेशन इस पर एक टीम को जम्मू भेजा गया। मगर, वहां भी कुछ हाथ नहीं लग सका।सिपाही सतीश यादव की हत्या के चारों आरोपी पढ़े लिखे नहीं है। सभी मजदूरी करते हैं। मजदूरी नहीं मिलने पर चोरी का प्लान बनाते हैं। उनकी उम्र भी 25 से 30 साल है। 
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