जहाँ मात्र 12 घंटे में गिरफ्तार कर लिया गया अपराधी, उसे प्रियंका गांधी बता रहीं कानून व्यवस्था की कमी..

जब कोई व्यक्ति किसी में सिर्फ और सिर्फ कमियां खोजने पर उतारू हो जाता है तब उसको अच्छाई में भी बुराई दिखाई देने लगती है . राजनीति हो या खेल , अब तक तमाम जगहों पर प्रतिद्वंदिता चलती थी जिसको प्रतिस्पर्धा भी कहा जाता है . इसमें एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ और उस होड़ में एक दूसरे से बेहतर कर के दिखाने की कोशिश हुआ करती थी . इसमें दोनों पक्षों द्वारा किये गये प्रयासों के फल सुखद रूप में ही प्राप्त होते थे .. लेकिन अब जो हो रहा उसको विकृत रूप ही कहा जाएगा राजनीति का.

इस से पहले सहारनपुर में दलित सवर्ण को लड़ाने की साजिश किस ने की और उन उन्मादियो को किस ने समर्थन दिया ये अब काफी हद तक साफ़ हो चुका है.. इसके बाद सोनभद्र की घटना में अपनी एतिहासिक गलती छिपा कर जिस प्रकार से राजनीति हुई उसको भी सभी ने देखा था.. फिर जनपद चंदौली का नम्बर लगाया गया जहाँ पर खुद से खुद को आग लगाने वाले मामले को जय श्रीराम न कहने की घटना को खुद कांग्रेस के अधिकारिक ट्विटर हैंडल ने डाला जबकि पुलिस जांच में सब साफ था.

इन घटनाओं से साफ़ लगने लगा है कि राजनीनि अब प्रतिस्पर्धा के बजाय नफरत पर आ कर टिक गई है .. नफरत की उसी राजनीति ने हर मामले को बेवजह तूल देने, घुमा फिर कर पेश करने और भ्रामक रूप में प्रस्तुत करने की एक परम्परा चला दी है.. नफरत की इस राजनीति में सोशल मीडिया का उपयोग के बजाय दुरूपयोग किया जा रहा है जिसमे वो बड़े नाम शामिल हैं जिन्हें कभी प्रधानमन्त्री जैसे पदों के लिए देखा और सोचा जा रहा था.. समझना आसान है कि उनके हाथ में सत्ता आती तो क्या होता .

फिलहाल अब अपनी पुरानी परम्परा को आगे बढाते हुए प्रियंका गांधी ने एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी पर आरोप लगाने के लिए लिया है एक अर्धसत्य का सहारा .. रामपुर जिले में समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान के ऊपर कार्यवाही से जहाँ अखिलेश यादव बेहद गुस्से में हैं तो वही अब उनके साथ कांग्रेस पार्टी भी परोक्ष रूप में खड़ी होती दिखाई दे रही है . इस से पहले आजम खान के खिलाफ बयानबाजी कर रहे कांग्रेस नेता को बाहर का रास्ता दिखाने की भी खबर थी ..

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की बागडोर अपने हाथो में लेने वालीं प्रियंका गांधी ने अब रामपुर जिले के एक ऐसे मामले को कानून व्यवस्था की चरमराहट बताया है जिसमे मुलजिम को मात्र 12 घंटे में गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया गया है .. रेप के एक मामले में मात्र 12 घंटे एक अन्दर मुलजिम को दबोच कर आम जनता के बीच सराहना का पात्र बनी पुलिस के खिलाफ प्रियंका गांधी ने ट्विटर पर नकरात्मक रूप से लिखा जबकि प्रियंका गांधी के ट्विट और रामपुर की जनता के मूड में जमीन आसमान का अंतर है..

रामपुर में जनता ने मात्र 12 घंटे में दोषी की गिरफ्तारी का दिल खोल कर स्वागत किया है . ये वही रामपुर है जहाँ पर कुछ माह पहले रेपिस्ट को गोली मारी गई थी , उस समय से अब तक यहाँ की पुलिस का नेतृत्व आज के समय में यूथ आइकॉन के रूप में चर्चित IPS अजय पाल शर्मा कर रहे हैं.. आज़म खान के खिलाफ उनकी न्यायोचित कार्यवाही की चर्चा दिल्ली तक है . इसी बीच इस प्रकार से अर्धसत्य से जनमानस को गुमराह करना कहीं न कहीं कांग्रेस की पारम्परिक राजनीति से कांग्रेस का ही हटना माना जा रहा है.. यहाँ ये भी ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि इस से पहले कई पार्टियाँ और कई नेता लगातार उत्तर प्रदेश पुलिस की मुठभेड़ो पर सवाल उठा कर कहीं न कहीं अपराधियो के मनोबल को बढाने में मदद कर चुके हैं ..

देखिये इस मामले में प्रियंका गांधी का अर्धसत्य और उस पर रामपुर पुलिस का जवाब पूर्ण सत्य के साथ –


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