पहले गौ माता की रक्षा का आदेश जारी किया, फिर फतवों को प्रतिबंधित किया और अब एक नया आदेश . न्याय क्या है इसको दिखा रहा उत्तराखंड हाईकोर्ट

असल न्याय क्या होता है इसकी एक बड़ी नजीर बन रहा है उत्तराखंड हाईकोर्ट . पहले गौ माता के लिए दिया गया आदेश दुनिया भर में सराहना का पात्र बना जिसमे गौ माता की रक्षा के लिए SDM स्तर तक के अधिकारियो को सीधे जिम्मेदार बनाया और बताया गया जिसके बाद अचानक ही गौ तस्करी जैसे अपराधो पर लगाम लग गयी . उसके बाद आये दिन जारी होते फतवों पर सीधा आदेश देते हुए फतवा देने वालों के खिलाफ कार्यवाही के आदेश जारी किये जिसके बाद अब मज़हबी कट्टरपंथ से बहुत दूर हो गया है उत्तराखंड . अब उसी हाईकोर्ट का एक नया आदेश बन रहा बाकी अन्य राज्यों के लिए नजीर .

ज्ञात हो कि देवभूमि को उसके असल स्वरुप में फिर से लाने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट का ये आदेश आने वाले समय में बनने वाला है नजीर . अब एक नए आदेश में बच्चो के बचपन को सुरक्षित रखने के लिए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पोर्न वेबसाइट्स पर सख्ती के साथ पांबदी को लागू करने का आदेश दिया है। सर्वविदित है कि पोर्न साइटों के गलत प्रभाव और इससे दुष्कर्म की घटनाओं में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई थी जिसके कुप्रभावों को देखते हुए हाईकोर्ट ने ये आदेश दिया है।

इतना ही नहीं हाईकोर्ट ने सीधे सीधे केंद्र सरकार को निर्देशित करते हुए इंटरनेट पर उपलब्ध 859 पोर्न साइट्स को बंद करने के लिए सख्त कदम उठाए। इतना ही नहीं , हाईकोर्ट ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर्स को भी केंद्र सरकार की सूची के अनुसार पोर्न साइट्स बंद करने के कड़े निर्देश जारी किये हैं .  कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति मनोज तिवारी की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि पोर्न साइटों को बच्चों की पहुंच से दूर रखने की जरूरत है ताकि बच्चों पर इसका गलत प्रभाव ना पड़े।

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