चुनाव से पहले राष्ट्रगीत पर बवाल.. फिर बोला एक नेता- “मेरा धर्म नहीं दे रहा इजाजत”

लोकसभा चुनावों से वीर बलिदानियों की प्रेरणा राष्ट्रगीत “वन्देमातरम” का विरोध एक बार से शुरू हो गया है. उत्तर प्रदेश के संभल से सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार शफीकुर्रहमान बर्क द्वारा वन्देमातरम के अपमान के बाद अब एक और नेता ने एलान कर दिया है कि वह वन्देमातरम नहीं गायेगा क्योंकि वन्देमातरम उसके मजहब के खिलाफ है. इस बार वन्देमातरम को गैर मजहबी बताने वाले नेता का नाम है एसटी हसन जो  उत्तर प्रदेश की ही मुरादाबाद लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार हैं.

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मुरादाबाद लोकसभा सीट से सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार एसटी हसन ने ‘वंदे मातरम’ को धर्म से जोड़ते हुए कहा कि वह इस बारे में अपने धार्मिक गुरु से विचार करेंगे, अगर उनका धर्म उन्हें इजाजत नहीं देता तो वो भी ‘वंदे मातरम’ के विरोध में खड़े हैं. एसटी हसन ने कहा कि कहा जाता है कि वंदेमातरम गैर इस्लामिक है तो वह साफ़ करना चाहते हैं कि वह वन्देमातरम के विरोध में खड़े हैं. उन्होंने कहा कि वह इस बारे में इस्लामिक जानकारों से बात करेंगे तथा अगर उन्होंने कहा कि वन्देमातरम गैर इस्लामिक है तो वह वन्देमातरम का विरोध करेंगे.

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बता दें कि पहले सपा-बसपा गठबंधन ने मुरादाबाद सीट से मीट कारोबारी नासिर कुरैशी को उम्मीदवार बनाया था. इसके बाद कुरैशी का टिकट काटकर एसटी हसन को उम्मीदवार बनाया गया है. पहले संभल से सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार शफीकुर्रहमान बर्क तथा अब मुरादाबाद से सपा-बसपा के ही उम्मीदवार एसटी हसन द्वारा वन्देमातरम की खिलाफात के बाद ये सवाल है कि क्या अखिलेश तथा मायावती इन लोगों के माध्यम से अपना वोट साधने की कोशिश कर रहे हैं? पहली बार में इसका जवाब संभवतः आपको हाँ ही मिलेगा..

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