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पुलिस और अदालत के आगे अड़े रहे केरल के हिन्दू.. सबरीमाला मंदिर के पट हुए बंद लेकिन एक भी महिला पूरी नहीं कर सकी अपनी जिद

सबरीमाला मंदिर की पवित्रता को भंग करने के तमाम प्रयास केरल के धर्मावलंबी हिन्दुओं की धर्मपरायणता के आगे असफल हो गये. ए महीने के लिए सबरीमाला मंदिर के पट सोमवार को बंद हो चुके हैं लेकिन केरल के हिन्दुओं ने एक भी महिला को मुख्य मंदिर तक नहीं जाने दिया तथा सबरीमाला मंदिर की जो पवित्र परंपरा रही है, उसको बनाये रखा है. सबरीमाला मंदिर में ‘दर्शन’ के आखिरी दिन सोमवार को ‘रजस्वला’ आयुवर्ग की एक और महिला ने मंदिर में प्रवेश का प्रयास किया, लेकिन हिन्दू श्रद्धालुओं के विरोध के चलते उन्हें वापस लौटना पड़ा.

रात में मंदिर का प्रवेशद्वार बंद होने से पहले ‘रजस्वला’ आयुवर्ग की और महिलाओं के मंदिर आने का प्रयास करने की खबरों के बीच सुरक्षा बढ़ा दी गई है. अधिकारियों ने कहा कि बिंदू नामक महिला पहाड़ी पर स्थित सबरीमाला मंदिर की तलहटी में स्थित पम्बा की ओर बढ़ रही थी. पम्बा से ही श्रद्धालु मंदिर के लिए पांच किलोमीटर की चढ़ाई शुरू करते हैं. बिन्दु को उनके अनुरोध पर पुलिस संरक्षण प्रदान किया गया. बिंदू केरल राज्य परिवहन निगम की बस में पुलिसकर्मियों के साथ सफर कर रही थी. जब बस पम्बा पहुंचने वाली थी, ‘नैष्ठिक ब्रह्मचारी’ के मंदिर में 10 से 50 साल की आयु वर्ग की लड़कियों व महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे श्रद्धालुओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं के एक समूह ने सड़क बाधित कर दी और उन्हें बस से उतरने के लिए बाध्य कर दिया.

अधिकारियों ने कहा कि बिंदू को पुलिस की जीप में सुरक्षा में ले जाया गया. भगवान अयप्पा मंदिर के द्वार 17 अक्टूबर को पांच दिवसीय पूजा के लिए खुलने के बाद मंदिर में दर्शन का प्रयास करने वाली करीब 12 महिलाओं को आक्रोशित हिन्दुओं के चलते वापस होना पड़ा है. मंदिर खुलने के पहले दिन कोई पूजा नहीं हुई. मंदिर के द्वार सोमवार को रात 10 बजे बंद हो गये.’रजस्वला’ आयुवर्ग की महिलाओं को घने जंगल स्थित मंदिर तक जाने से रोकने के लिए सबरीमाला सन्नीधानम मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु अभी भी डेरा डाले बैठे हैं. सबरीमाला सन्नीधानम, पम्बा, निलाकल और इलावुमकल में दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 लागू किए जाने के बावजूद सैकड़ों अयप्पा श्रद्धालुओं ने महिलाओं को मंदिर तक जाने से रोक दिया है.

पुलिस ने इस सूचना के बाद सन्नीधाम और अन्य क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी है कि कुछ महिलाएं मंदिर जाने का प्रयास कर सकती हैं. वहीं, अयप्पा श्रद्धालुओं के कड़े विरोध के चलते पुलिस मुख्य मंदिर में फातिमा का प्रवेश नहीं करा सकी. श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या ने रविवार को छह महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश से रोक दिया था. इसके अलावा छह अन्यओं को भी प्रसिद्ध मंदिर तक जाने से रोका गया. 10 से 50 साल की आयुवर्ग की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश से रोक हटाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के केरल सरकार के खिलाफ हिन्दू श्रद्धालुओं का प्रदर्शन जारी है.

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