हिंदुओ के बाद अब निशाने पर पुलिस ? कोर्ट में लगी थी याचिका- “पुलिस हिरासत में मरे 2 मुसलमान”.. जबकि वो वाहन चोरी के संदिग्ध भी थे

अचानक ही बदल गये है सभी सुर और धीरे धीरे इसको ही कहा जा सकता है असल रंग में आना.. अभी चोरी के एक आरोपी के चलते भारत के तमाम हिस्सों में खुल कर मजहबी रूप दिखाया गया और साफ़ साफ़ उसको अपना आदमी बोला गया है .. कुछ समय पहले तक टी वी डिबेट में सीना ठोंक कर कहा जाता रहा कि आतंक का कोई धर्म नही है लेकिन जिस प्रकार से अपराधियों के साथ खुल कर कई लोग खड़े हो रहे है उस से यही लग रहा है कि अपराध का धर्म शायद कुछ लोगों को पता है ..

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तबरेज की मौत के बाद जिस प्रकार से हंगामा चल रहा उसके पीछे की साजिश सब देख रहे हैं.. हिन्दुओ को बदनाम करने के लिए मोब लिंचिंग शब्द जोड़ा जा रहा है और ऐसा दिखाया जा रहा कि हमेशा हमलावर हिन्दू होता है और पीड़ित एक अन्य वर्ग.. अब साजिश का दायरा सीधे सीधे हिन्दुओ से आगे बढ़ कर समाज की रक्षा और सुरक्षा की पहली पंकित पुलिस वालों तक पहुच गया है और उनको बाकयदा मुसलमानों का उत्पीडन करने वाला घोषित करने की तैयारी में याचिका दाखिल कर दी गई थी .

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बताया ये रहा है कि बिहार की डुमरा थाने की पुलिस ने 5 और 6 मार्च को मोटर साइकिल चोरी के मामले में तस्लीम और गुफरान को हिरासत में लिया था ..उनके परिवार वालों के अनुसार अगले दिन परिवारों को सूचित किया गया कि दोनों व्यक्तियों की मृत्यु हो गई है. यद्दपि पुलिस का दावा इस से काफी अलग है .. लेकिन बाकायदा इसको सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए दलील में कहा गया है कि कैसे 7 मार्च को केवल SHO डुमरा चंद्रभूषण सिंह को गिरफ्तार किया गया..

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लेकिन आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में संदिग्ध मुलजिमों की कथित यातना से मौत के मामले में SIT जांच से इनकार कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पटना हाईकोर्ट जाने के लिए कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह इस तरह गाइडलाइन जारी नहीं करता है. याचिका में तस्लीम अंसारी और गुफरान अंसारी की मौत की मजिस्ट्रेटी जांच के अलावा एक अन्य राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक द्वारा निगरानी में एसआईटी जांच की मांग की गई थी.इस घटना को लेकर पांच पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया था

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